Mahashivratri Pujan Samagri: इन 5 चीजों के बिना अधूरी रह जाएगी भोलेनाथ की आराधना

भगवान शिव को प्रसन्न करने वाली ये 5 चीजें: बेलपत्र, धतूरा, केसर, शमी फूल और शहद। शास्त्रों में महत्व, पूजा की विधि।

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Mahashivratri Pujan Samagri, नई दिल्ली: महाशिवरात्रि सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र पर्वों में से एक है। इस दिन देशभर में करोड़ों भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को सबसे सरल और जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माना जाता है। एक सच्चे मन से की गई पूजा उन्हें अत्यंत प्रिय है।

हालांकि शिव जी की पूजा में सादगी का विशेष महत्व है, फिर भी शास्त्रों में कुछ विशेष सामग्री का उल्लेख है जिनके बिना महाशिवरात्रि की पूजा को अधूरा माना जाता है। ये पांच चीजें न केवल पूजा को संपूर्ण बनाती हैं बल्कि भोलेनाथ को विशेष रूप से प्रसन्न करने में भी सहायक होती हैं। आइए जानते हैं इन पांच अनिवार्य वस्तुओं के बारे में और उनके महत्व को।

Mahashivratri Pujan Samagri: बेलपत्र, शिव पूजा की आत्मा

बेलपत्र को भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्ता माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि बेलपत्र के बिना शिव पूजा अधूरी रहती है। त्रिदल बेलपत्र में तीन पत्तियां होती हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक मानी जाती हैं। कुछ धर्मग्रंथों में इन तीन पत्तियों को भगवान शिव, माता पार्वती और मां लक्ष्मी का वास स्थान भी बताया गया है।

बेलपत्र चढ़ाने की विधि में भी कुछ नियम हैं। बेलपत्र को सदैव उल्टा चढ़ाना चाहिए, यानी पत्ते की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर होनी चाहिए। तीन-तीन पत्तों के गुच्छे बनाकर शिवलिंग पर अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि एक बेलपत्र चढ़ाने से एक हजार कमल के फूल चढ़ाने के बराबर पुण्य मिलता है।

महाशिवरात्रि से पहले ही ताजे बेलपत्र एकत्रित कर लेने चाहिए। ध्यान रखें कि पत्ते कटे-फटे या मुरझाए हुए नहीं होने चाहिए। हरे, ताजे और स्वच्छ बेलपत्र ही शिव जी को चढ़ाने चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय मंत्रों का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

धतूरा: भोलेनाथ का प्रिय फूल और फल

धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। धतूरे का सफेद फूल और उसका फल दोनों ही शिव जी को चढ़ाए जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष निकला तो भगवान शिव ने उसे पी लिया था। उस विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने शिव जी को धतूरा अर्पित किया था। तब से धतूरा शिव जी का प्रिय बन गया।

धतूरे में औषधीय गुण भी होते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है जो शिव जी के विष पान के प्रसंग से जुड़ी हुई है। महाशिवरात्रि की पूजा में धतूरे का फूल और फल दोनों चढ़ाना चाहिए। कुछ स्थानों पर धतूरे का दूध भी शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है, हालांकि यह सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

धतूरा चढ़ाते समय ध्यान रखें कि इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें विषैले तत्व होते हैं। केवल भगवान को अर्पित करने के बाद इसे वहीं छोड़ देना चाहिए या पवित्र स्थान पर विसर्जित कर देना चाहिए। धतूरा अर्पित करने से रोग-व्याधि दूर होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

केसर: सुगंध और शुभता का प्रतीक

लाल केसर भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि महादेव को केसर की सुगंध बहुत भाती है। केसर को सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इसकी सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

महाशिवरात्रि की पूजा में केसर को कई तरीकों से उपयोग किया जा सकता है। केसर को चंदन के साथ मिलाकर शिवलिंग पर लेप लगाया जा सकता है। दूध में केसर मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। केसर के तिलक से शिवलिंग को सजाना भी प्रचलित है।

केसर चढ़ाने से बड़ी से बड़ी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। यह धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। केसर का उपयोग करते समय शुद्ध और असली केसर का ही प्रयोग करना चाहिए। नकली या मिलावटी केसर का उपयोग शुभ नहीं माना जाता।

शमी का फूल: मनचाहे वरदान का माध्यम

शमी का पेड़ और उसके फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के वृक्ष में देवी लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए शमी का फूल चढ़ाने से धन-धान्य की वृद्धि होती है। शमी के पत्ते और फूल दोनों ही शिवलिंग पर चढ़ाए जा सकते हैं।

विशेष मान्यता है कि शमी का फूल चढ़ाने से भगवान शिव मनचाहा वरदान देते हैं। जिन लोगों के अटके हुए काम हों, नौकरी या व्यवसाय में समस्या हो, या कोई बड़ी इच्छा पूर्ण करनी हो, उन्हें महाशिवरात्रि पर शमी के फूल अवश्य चढ़ाने चाहिए।

शमी के फूल पीले रंग के होते हैं और गुच्छों में खिलते हैं। इन्हें तोड़ते समय वृक्ष से क्षमा मांगनी चाहिए और केवल आवश्यक मात्रा में ही फूल तोड़ने चाहिए। शमी के फूल चढ़ाते समय विशेष संकल्प लेना शुभ माना जाता है।

शहद: जीवन में मिठास का वाहक

शहद को अमृत के समान माना जाता है और यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। महाशिवरात्रि की पूजा में शहद का विशेष महत्व है। शहद की मिठास जीवन में मधुरता और सुख-समृद्धि का प्रतीक है।

शिवलिंग पर शहद चढ़ाने या शहद से अभिषेक करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पंचामृत में भी शहद एक मुख्य घटक है। शुद्ध शहद का उपयोग करना चाहिए। शहद चढ़ाते समय यह प्रार्थना की जाती है कि जैसे शहद मीठा होता है, वैसे ही जीवन में मधुरता और खुशियां बनी रहें।

शहद चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्त के जीवन को सुख-समृद्धि से भर देते हैं। पारिवारिक कलह दूर होती है, संबंधों में मधुरता आती है और जीवन में शांति का वास होता है। शहद का प्रसाद ग्रहण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता।

संपूर्ण पूजा का महत्व

इन पांच वस्तुओं को महाशिवरात्रि की पूजा में अवश्य शामिल करना चाहिए। ये सभी वस्तुएं अलग-अलग प्रकार के वरदान और आशीर्वाद देने में सहायक हैं। बेलपत्र से पूजा की पवित्रता बढ़ती है, धतूरा मनोकामना पूर्ति में सहायक है, केसर बड़ी इच्छाओं को पूरा करता है, शमी का फूल विशेष वरदान देता है और शहद जीवन में मिठास लाता है।

भक्तों को चाहिए कि वे विधि-विधान से इन सभी वस्तुओं को एकत्रित करें और पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान शिव को अर्पित करें। केवल सामग्री का होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सच्चे मन और पूर्ण समर्पण के साथ पूजा करनी चाहिए।

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