LPG Cylinder Crisis: ईरान युद्ध ने रोकी व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की सप्लाई, हिमाचल से बेंगलुरु तक हाहाकार, होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर, दिल्ली-UP में अभी राहत लेकिन कब तक?

ईरान युद्ध से होर्मुज बंद, कमर्शियल LPG (19/47.5/425 kg) रिफिलिंग पर रोक; हिमाचल-बेंगलुरु में होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत, दिल्ली-UP में अभी राहत लेकिन संकट बढ़ सकता है

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LPG Cylinder Crisis: ईरान युद्ध की आग अब सीधे भारतीय रसोई और उद्योगों तक पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने के कारण वैश्विक एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो गई है। केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक यानी कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की रिफिलिंग अनिश्चितकाल के लिए बंद करने के निर्देश तेल कंपनियों को दे दिए हैं। केंद्रीय मंत्रालय के इस आदेश से 19 किलोग्राम, 47.5 किलोग्राम और 425 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग रुक गई है। इसका असर देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से महसूस किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश से लेकर बेंगलुरु तक और पटना से रांची तक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और उद्योग सब बेहाल हैं।

LPG Cylinder Crisis: केंद्र सरकार का क्यों आया यह फैसला?

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। कतर भारत को करीब 40 फीसदी एलएनजी आपूर्ति करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत को करीब 55 फीसदी एलएनजी मिलती है। जब होर्मुज बंद हो गया तो आयात प्रभावित हुआ और घरेलू भंडार पर दबाव बढ़ने लगा। ऐसे में सरकार के सामने दो विकल्प थे या तो सभी को कम गैस मिले या फिर घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाए। सरकार ने दूसरा रास्ता चुना और व्यावसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग पर रोक लगा दी। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के फील्ड अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि केंद्र सरकार की ओर से कंपनियों को स्पष्ट निर्देश मिले हैं।

हिमाचल प्रदेश – उद्योग जगत में हड़कंप

हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ यानी BBN औद्योगिक क्षेत्र में इस फैसले का सबसे तात्कालिक असर दिखा। यह देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है जहां फार्मा, पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग और गत्ता निर्माण जैसे उद्योगों में प्रतिदिन हजारों व्यावसायिक सिलिंडरों का इस्तेमाल होता है। सिलिंडर बंद (LPG Cylinder Crisis) होते ही उत्पादन ठप होने का खतरा मंडराने लगा। परवाणू में गैस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटरों की आपात बैठक भी हुई लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

बेंगलुरु – मंगलवार से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की आशंका

दक्षिण भारत के सबसे बड़े शहर बेंगलुरु (LPG Cylinder Crisis) में स्थिति और भी गंभीर है। यहां कमर्शियल गैस सप्लाई ठप होने के कारण मंगलवार यानी आज से होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ गई है। बेंगलुरु जैसे महानगर में जहां लाखों लोग रोज होटल और रेस्टोरेंट का खाना खाते हैं वहां इस संकट का सामाजिक असर बहुत गहरा है। रेस्टोरेंट मालिक सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं और कह रहे हैं कि अगर अगले कुछ दिनों में गैस की आपूर्ति नहीं हुई तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

पटना और बिहार – धीरे-धीरे बढ़ रहा दबाव

बिहार की राजधानी पटना और आसपास के जिलों में भी कमर्शियल गैस (LPG Cylinder Crisis) की किल्लत महसूस होने लगी है। होटल और ढाबा संचालकों को पहले से भंडारित सिलिंडरों के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। पटना के बड़े होटलों में अभी कुछ दिनों का स्टॉक बचा है लेकिन अगर आपूर्ति जल्द नहीं बहाल हुई तो अगले सप्ताह तक वहां भी संकट गहरा सकता है। गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे छोटे शहरों में तो स्थिति पहले से ज्यादा नाजुक बताई जा रही है।

रांची और झारखंड – उद्योग और खानपान दोनों प्रभावित

रांची और झारखंड के अन्य शहरों में भी कमर्शियल एलपीजी (LPG Cylinder Crisis) का संकट महसूस होने लगा है। यहां ईंट भट्ठों, छोटे उद्योगों और ढाबों में व्यावसायिक सिलिंडरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आपूर्ति रुकने से इन इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। रांची के बड़े बाजारों में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और छोटे रेस्टोरेंट मालिकों की चिंता बढ़ गई है।

कर्नाटक – बेंगलुरु के अलावा अन्य शहरों में भी चिंता

कर्नाटक में बेंगलुरु (LPG Cylinder Crisis) के अलावा मैसूरु, हुबली-धारवाड़ और मंगलुरु में भी कमर्शियल गैस की उपलब्धता कम होती जा रही है। कर्नाटक में पर्यटन उद्योग काफी बड़ा है और होटल-रेस्टोरेंट उसकी रीढ़ हैं। गैस संकट ने इस पूरे सेक्टर को सीधे चोट पहुंचाई है।

दिल्ली और UP – अभी राहत लेकिन कब तक?

दिल्ली और उत्तर प्रदेश में फिलहाल स्थिति थोड़ी बेहतर (LPG Cylinder Crisis) है। यहां व्यावसायिक गैस की आपूर्ति अभी सामान्य बताई जा रही है। लेकिन यह राहत कितने दिन टिकेगी यह कोई नहीं जानता। अगर ईरान युद्ध और लंबा खिंचा और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा तो भंडार खत्म होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। उद्योग जगत के जानकारों का अनुमान है कि अगर स्थिति दो से तीन हफ्ते और ऐसी ही रही तो दिल्ली और UP के बड़े शहरों में भी व्यावसायिक गैस का संकट गहरा सकता है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और आगरा जैसे शहरों में पहले से सतर्कता बरती जाने लगी है।

LPG जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम

इस बीच सरकार ने एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए भी एक अहम फैसला लिया है। अब घरेलू सिलिंडर की बुकिंग एक निश्चित दिनों के अंतराल के बाद ही हो सकेगी ताकि कोई एक परिवार जरूरत से ज्यादा सिलिंडर न जमा कर ले। यह कदम उन लोगों की वजह से जरूरी हो गया जो संकट की आशंका में घरेलू सिलिंडर स्टॉक करने लगे थे जिससे जरूरतमंद परिवारों को दिक्कत आ रही थी।

LPG Cylinder Crisis: आम आदमी पर क्या होगा असर?

अगर यह संकट लंबा खिंचा तो इसके असर बहुआयामी होंगे। रेस्टोरेंट और ढाबे बंद होने से लाखों कामगारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ेगी। उद्योगों में उत्पादन घटने से सामान की कीमतें बढ़ेंगी। खाने-पीने की चीजों में महंगाई आएगी। छोटे और मझोले उद्यमियों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। सरकार की नजर इस पूरी स्थिति पर बनी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हल निकला तो गैस आपूर्ति जल्द सामान्य हो सकती है।

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