Kota Mayor Election Result 2026: भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी बनीं नई महापौर, 30 वोटों से जीतीं

भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी ने कांग्रेस की सुनीता सुमन को 30 मतों से हराया

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Kota Mayor Election Result 2026: हाड़ौती अंचल की सबसे प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील कोटा नगर निगम की महापौर की कुर्सी पर भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा और ऐतिहासिक विजय दर्ज कर ली है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को नगर निगम मुख्यालय में आयोजित हुए मतदान और उसके तत्काल बाद हुई मतगणना में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी अनुसुइया गोस्वामी ने कांग्रेस की उम्मीदवार सुनीता सुमन को 30 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। 100 सदस्यीय नगर निगम सदन में हुए इस मतदान में अनुसुइया गोस्वामी के पक्ष में कुल 65 वोट पड़े, जबकि कांग्रेस की सुनीता सुमन महज 35 वोटों पर ही सिमट कर रह गईं।

इस चुनाव परिणाम की सबसे बड़ी सियासी गूंज कांग्रेस खेमे में हुई भारी बगावत और क्रॉस वोटिंग को लेकर सुनाई दे रही है। सदन में भाजपा के अपने 57 पार्षद निर्वाचित हुए थे और दो निर्दलीय पार्षदों ने उसे खुला समर्थन दिया था। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को 65 मत मिलना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि कांग्रेस के कम से कम छह पार्षदों ने दलगत सीमाओं को तोड़ते हुए भाजपा के पक्ष में मतदान किया। इस अप्रत्याशित सेंधमारी ने कांग्रेस के संगठनात्मक प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है और हाड़ौती की राजनीति में भाजपा के ‘ट्रिपल इंजन’ के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान किया है।

Kota Mayor Election Result 2026: मतदान का गणित और कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की खुली पोल

कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं, जहां महापौर पद पर काबिज होने के लिए जादुई आंकड़े के रूप में 51 मतों की आवश्यकता थी। हालिया निकाय चुनावों के बाद आए नतीजों में भाजपा ने 57 वार्डों में जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस के 39 पार्षद जीतकर आए थे और चार निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे थे। मतदान से एक दिन पूर्व वार्ड संख्या 71 से निर्दलीय पार्षद वंदना फौजदार और वार्ड संख्या 49 से निर्दलीय कौशल किशोर शर्मा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए अनुसुइया गोस्वामी को समर्थन देने का ऐलान किया था।

इस प्रकार भाजपा का घोषित संख्या बल 59 तक पहुंच गया था। दूसरी तरफ कांग्रेस के बागी के रूप में जीतीं निर्दलीय पार्षद रानी जुबेर कांग्रेस में वापस शामिल हो गई थीं, जिससे कांग्रेस का आधार 40 पार्षदों का माना जा रहा था। एक अन्य निर्दलीय राहुल माथुर ने स्वतंत्र मतदान का दावा किया था। जब मतपेटियां खुलीं, तो भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी को 65 और कांग्रेस की सुनीता सुमन को 35 मत मिले। कांग्रेस के कुल पार्षदों की संख्या 39 होने के बावजूद केवल 35 वोट मिलना यह स्पष्ट करता है कि उसके अपने चार पार्षद सीधे तौर पर टूट गए और दोनों तटस्थ निर्दलीयों सहित कुल मिलाकर छह पार्षदों ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में गुप्त मतदान किया।

कौन हैं नई महापौर अनुसुइया गोस्वामी: आक्रामक छवि और लंबा संगठनात्मक सफर

कोटा के प्रथम नागरिक के रूप में निर्वाचित हुईं अनुसुइया गोस्वामी नगर निगम के वार्ड नंबर 98 से पार्षद चुनी गई हैं। वार्ड चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के युवा चेहरे आयुष पारेता को 393 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। भाजपा संगठन में अनुसुइया गोस्वामी का लंबा और निष्ठावान इतिहास रहा है। वे राजस्थान भाजपा में प्रदेश मंत्री के महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं और इससे पूर्व लंबे समय तक कोटा भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष भी रही हैं।

कोटा की राजनीति में उनकी पहचान एक बेहद बेबाक, जुझारू और आक्रामक जननेता के रूप में रही है। वर्षों पूर्व केशवपुरा क्षेत्र में स्थानीय जनसमस्याओं को लेकर एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ हुए विवाद और थप्पड़कांड के बाद वे पूरे राज्य की मीडिया की सुर्खियों में आई थीं। उनका परिवार पीढ़ियों से जनसंघ और भाजपा की मूल विचारधारा से जुड़ा रहा है। उनके परिवार की पूर्व में भी कोटा नगर निगम में पकड़ रही है और बूंदी के पूर्व विधायक अशोक डोगरा उनके समधी हैं, जिससे हाड़ौती के राजनीतिक गलियारों में उनकी साख बेहद मजबूत मानी जाती है।

सुनीता सुमन की हार और कांग्रेस की कमजोर रणनीति

कांग्रेस पार्टी ने इस प्रतिष्ठित चुनाव में वार्ड नंबर 17 से निर्वाचित साधारण पृष्ठभूमि की महिला पार्षद सुनीता सुमन को अपना महापौर उम्मीदवार बनाया था। पार्टी का उद्देश्य एक सामान्य और जमीनी कार्यकर्ता को आगे लाकर दलित व पिछड़ा वर्ग के सामाजिक समीकरण को साधना था। हालांकि, सदन के भीतर संख्या बल का अभाव और पार्षदों पर आंतरिक अनुशासन न रख पाना कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरा।

मतदान के दिन सुनीता सुमन को केवल 35 पार्षदों का समर्थन हासिल हो सका। चुनाव के तुरंत बाद कांग्रेस हलकों में अपने ही पार्षदों द्वारा की गई इस ऐतिहासिक क्रॉस वोटिंग को लेकर आत्ममंथन और गुस्से का माहौल है। पार्टी नेतृत्व के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि कोटा पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का गृह क्षेत्र है, जहां नगर निगम पर दशकों से कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है। अपने ही गढ़ में छह पार्षदों का छिटक जाना स्थानीय कांग्रेस संगठन के लिए बड़ा राजनीतिक आघात माना जा रहा है।

बाड़ेबंदी, प्रशासनिक दबाव के आरोप और गरमाई सियासत

महापौर चुनाव की घोषणा के साथ ही दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ा शह और मात का खेल शुरू हो गया था। भाजपा ने अपने सभी 57 पार्षदों और दो निर्दलीय समर्थकों को एकजुट रखने के लिए झालावाड़ रोड स्थित एक रिसॉर्ट में कड़े पहरे में रखा था। भाजपा पार्षदों को कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और जिलाध्यक्ष राकेश जैन के नेतृत्व में रणनीति के तहत मतदान स्थल तक लाया गया था।

दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सत्ता के घोर दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए थे। पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और शहर कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम ने आरोप लगाया था कि कोटा विकास प्राधिकरण (KDA), बिजली विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को कांग्रेस पार्षदों के घरों और दुकानों पर भेजकर छापे डलवाए गए, ताकि उन्हें क्रॉस वोटिंग के लिए विवश किया जा सके। कांग्रेस का आरोप था कि वार्ड 42 के पार्षद सियाराम वर्मा के क्लीनिक को सीज किया गया और वार्ड 32 की पार्षद राममूर्ति वर्मा के मकान पर केडीए का बोर्ड लगाया गया। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को कांग्रेस की आसन्न हार की हताशा करार दिया था।

कोटा के शहरी विकास को लेकर नई महापौर की प्राथमिकताएं

महापौर पद पर निर्वाचन का आधिकारिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद अनुसुइया गोस्वामी ने अपनी जीत को कोटा की जनता, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और समर्पित कार्यकर्ताओं की विजय बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विजन और राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार के सहयोग से कोटा को एक विश्वस्तरीय, स्वच्छ, सुरक्षित और समस्या-मुक्त स्मार्ट सिटी बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

देश की ‘कोचिंग कैपिटल’ के रूप में विख्यात कोटा शहर में प्रतिवर्ष लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में नई महापौर के सामने शहर की बुनियादी सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने, सीवरेज व ड्रेनेज प्रणाली को दुरुस्त करने, आवारा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाने और सभी 100 वार्डों में बिना किसी भेदभाव के समान नागरिक सुविधाएं विकसित करने की गंभीर प्रशासनिक चुनौतियां होंगी।

Kota Mayor Election Result 2026: हाड़ौती की राजनीति पर चुनाव परिणाम के दूरगामी मायने

25 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ कोटा नगर निगम का यह महापौर चुनाव राजस्थान के राजनीतिक परिदृश्य में मील का पत्थर साबित हुआ है। 100 सदस्यीय सदन में 65 मतों के साथ भाजपा की प्रचंड जीत ने यह सिद्ध कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर विपक्ष का किला पूरी तरह दरक चुका है।

अनुसुइया गोस्वामी का महापौर बनना न केवल कोटा शहर में भाजपा के संगठनात्मक वर्चस्व की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आगामी नगर पालिका व पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भाजपा अपनी आक्रामक बढ़त बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह परिणाम एक गंभीर चेतावनी है कि यदि पार्टी अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के भीतर विश्वास और अनुशासन कायम नहीं रख सकी, तो भविष्य की चुनावी राह और अधिक कठिन हो जाएगी।

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