Kabhi Khushi Kabhie Gham के ‘लड्डू’ का 25 साल बाद चौंकाने वाला ट्रांसफॉर्मेशन: गोल-मटोल बाल कलाकार Kavish Majmudar अब बने फिट और हैंडसम हंक, लेटेस्ट तस्वीरें देख फैंस हुए हैरान

25 साल बाद फिट और हैंडसम लुक में नजर आए कविश मजूमदार

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K3G Laddoo: वर्ष 2001 में रिलीज हुई करण जौहर की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। शाहरुख खान, काजोल, ऋतिक रोशन, करीना कपूर, अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी इस फिल्म के हर एक किरदार ने दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। इस फिल्म में ऋतिक रोशन के बचपन का किरदार यानी गोल-मटोल और चुलबुला ‘लड्डू’ (रोहन) तो हर किसी को याद ही होगा। इस यादगार बाल किरदार को निभाने वाले अभिनेता कविश मजूमदार अब 25 साल बाद पूरी तरह से बदल चुके हैं। उनकी हालिया तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद फैंस हैरान हैं क्योंकि बचपन का वह गोल-मटोल लड्डू अब बेहद फिट और हैंडसम युवक बन चुका है।

करण जौहर के निर्देशन में बनी इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म ने उस दौर में करीब 40 करोड़ रुपये के बजट में 135 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई करके बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। फिल्म के गाने, डॉयलॉग्स और भावुक सीन आज भी दर्शकों को बांधकर रखते हैं। मुख्य कलाकारों के साथ-साथ इस फिल्म के बाल कलाकारों को भी खूब लोकप्रियता मिली थी। कविश मजूमदार ने जिस मासूमियत के साथ लड्डू के किरदार को जिया था, वह आज भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान ले आता है। आइए विस्तार से जानते हैं कविश मजूमदार के इस हैरान कर देने वाले बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन और उनके अब तक के फिल्मी सफर के बारे में।

फिल्म की सांस्कृतिक विरासत

‘कभी खुशी कभी गम’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों के ताने-बाने को दर्शाने वाली एक ऐसी गाथा है जिसे आज भी हर पीढ़ी के लोग बड़े चाव से देखते हैं। फिल्म में जहां बड़े कलाकारों ने अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया, वहीं छोटे रोहन (लड्डू) और छोटी पूजा (पूह) के रूप में कविश मजूमदार और मालविका राज ने कहानी में एक अलग ही मासूमियत और मिठास भर दी थी। लड्डू का किरदार इस कदर लोकप्रिय हुआ कि आज दो दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी लोग कविश को असल जिंदगी में इसी नाम से पहचानते हैं।

इस फिल्म की बेमिसाल कामयाबी ने यह साबित कर दिया था कि यदि कहानी में भावनाओं का सच्चा पुट हो, तो बड़े सितारों के बीच भी छोटे बाल कलाकार अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाने में सफल रहते हैं। टीवी पर जब भी यह फिल्म प्रसारित होती है, तो इसे आज भी शानदार टीआरपी मिलती है, जो इसकी कभी न खत्म होने वाली लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

बचपन और अभिनय की शुरुआत

कविश मजूमदार ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने अभिनय करियर की शुरुआत इतने बड़े बैनर की फिल्म से की थी, जिसकी कल्पना कई नए कलाकार भी नहीं कर पाते। फिल्म में लड्डू के किरदार में उनका मस्तीखोर अंदाज और लड्डू खाने की दीवानगी दर्शकों को बेहद पसंद आई थी। फिल्म की रिलीज के वक्त कविश की उम्र बहुत कम थी, लेकिन कैमरे के सामने उनका आत्मविश्वास और कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी।

इस शानदार शुरुआत के बाद हर किसी को उम्मीद थी कि कविश बड़े पर्दे पर लगातार नजर आते रहेंगे और उनका एक्टिंग करियर बहुत लंबा होगा, लेकिन कविश और उनके परिवार ने एक अलग राह चुनी। उन्होंने फिल्म के तुरंत बाद काम करने के बजाय अपनी स्कूली शिक्षा को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया। कॉलेज के दिनों में कदम रखते ही कविश के भीतर सिनेमा को लेकर एक नई समझ विकसित हुई और उन्होंने अभिनय के साथ-साथ कैमरे के पीछे रहकर शॉर्ट फिल्में बनाने और निर्देशन की बारीकियों को सीखने में अपनी रुचि दिखाई।

लड्डू से हैंडसम हंक तक का सफर

फिल्म की रिलीज को करीब 25 साल पूरे होने जा रहे हैं और इस लंबे अंतराल में कविश मजूमदार का पूरा लुक और व्यक्तित्व पूरी तरह से बदल चुका है। बचपन में अपने भारी वजन और गोल-मटोल चेहरे के लिए पहचाने जाने वाले कविश ने अपनी फिटनेस पर कड़ा काम किया है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, नियमित वर्कआउट और संतुलित डाइट की बदौलत अपना वजन काफी कम कर लिया है और एक टोंड बॉडी हासिल की है।

सोशल मीडिया पर जब भी वे अपनी तस्वीरें साझा करते हैं, तो फैंस के लिए यह यकीन कर पाना मुश्किल हो जाता है कि यह वही छोटा लड्डू है। आज कविश एक लंबे, फिट और बेहद आकर्षक लुक वाले हैंडसम युवा के रूप में नजर आते हैं। वजन घटाने और खुद को पूरी तरह से बदलने का उनका यह सफर आज के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो फिटनेस की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

करियर के उतार-चढ़ाव

अपनी पढ़ाई पूरी करने और फिल्म मेकिंग की समझ विकसित करने के बाद कविश मजूमदार ने साल 2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘लक’ में एक असिस्टेंट डायरेक्टर (सहायक निर्देशक) के तौर पर काम किया। इस अनुभव ने उन्हें फिल्म निर्माण के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को बहुत करीब से समझने में मदद की। कैमरे के पीछे काम करने के बाद उन्होंने एक बार फिर कैमरे के सामने आने का मन बनाया।

साल 2013 में उन्होंने फिल्म ‘गोरी तेरे प्यार में’ के जरिए बॉलीवुड में बतौर वयस्क अभिनेता अपनी नई पारी की शुरुआत की। इसके बाद साल 2014 में वरुण धवन स्टारर ‘मैं तेरा हीरो’ और रितेश देशमुख की ‘बैंकचोर’ जैसी फिल्मों में भी वे छोटे लेकिन मजेदार किरदारों में दिखाई दिए। कविश ने कभी भी फिल्म इंडस्ट्री में केवल फेम या मुख्य अभिनेता बनने की अंधी दौड़ में शामिल होने की कोशिश नहीं की, बल्कि उन्होंने हमेशा अपनी पसंद और शर्तों के अनुसार काम करना बेहतर समझा।

चकाचौंध से दूर संतुलित जीवन

कविश मजूमदार वर्तमान में सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस और फॉलोअर्स के साथ लगातार जुड़े रहते हैं। वे अक्सर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी, फिटनेस रूटीन और नए प्रोजेक्ट्स की झलकियां इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करते हैं। बॉलीवुड की पार्टीज और ग्लैमरस चकाचौंध से दूर रहकर उन्होंने अपने लिए एक बेहद सादगी भरा और संतुलित जीवन चुना है।

अक्सर सोशल मीडिया पर फैंस उनकी बचपन की ‘लड्डू’ वाली तस्वीरों और आज के नए लुक की तुलना करते हुए पोस्ट शेयर करते हैं, जिसे देखकर पुरानी यादें पूरी तरह से ताजा हो जाती हैं। कविश भी इन यादों का पूरा सम्मान करते हैं और ‘K3G’ के सेट से जुड़े अपने अनुभवों को अक्सर फैंस के साथ साझा करके उन्हें पुरानी यादों के सफर पर ले जाते हैं।

चाइल्ड आर्टिस्ट्स के सामने चुनौतियां

कविश मजूमदार का यह सफर इस बात का सटीक उदाहरण है कि बचपन में मिलने वाली अपार सफलता और स्टारडम को बड़े होने पर कैसे संभाला जाना चाहिए। फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर यह देखा गया है कि जो बच्चे बाल कलाकार के रूप में बहुत नाम कमाते हैं, बड़े होने पर उन्हें मुख्यधारा के सिनेमा में सही किरदार चुनने में भारी कठिनाई होती है। कई बाल कलाकार समय के साथ गुमनामी के अंधेरे में खो जाते हैं या फिर हमेशा के लिए इंडस्ट्री से दूरी बना लेते हैं।

कविश ने इस मानसिक और व्यावहारिक चुनौती को बेहद परिपक्वता के साथ संभाला। उन्होंने केवल एक्टिंग के भरोसे रहने के बजाय फिल्म मेकिंग की अन्य विधाओं जैसे डायरेक्शन और राइटिंग में अपनी स्किल्स को मजबूत किया। उनकी यह यात्रा नए युवा कलाकारों को सिखाती है कि ग्लैमर और फेम अस्थायी हो सकते हैं, लेकिन आपकी सीख और कला हमेशा आपके साथ रहती है।

निष्कर्ष और अंतिम समीक्षा

‘कभी खुशी कभी गम’ का वह छोटा सा लड्डू आज असल जिंदगी में एक आत्मनिर्भर, फिट और बेहद आत्मविश्वासी युवा बनकर सबके सामने खड़ा है। 25 साल बाद उनका यह अविश्वसनीय ट्रांसफॉर्मेशन केवल शारीरिक बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी मानसिक दृढ़ता को भी दर्शाता है। उन्होंने स्टारडम के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया और अपनी एक अलग पहचान बनाई।

सिनेमा प्रेमियों के लिए कविश हमेशा उनके पसंदीदा ‘लड्डू’ ही रहेंगे, लेकिन आज के दौर में वे एक बेहतरीन व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं जो जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का संदेश देता है। उम्मीद है कि आने वाले समय में कविश मजूमदार कैमरे के सामने या कैमरे के पीछे से कुछ और बेहतरीन प्रोजेक्ट्स के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करते रहेंगे।

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