NCERT की किताब में न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया गया, सुप्रीम कोर्ट ने लिया सख्त संज्ञान — CJI बोले, “यह गहरी साजिश है”

CJI बोले- "यह गहरी साजिश है", किताब पर प्रतिबंध, सभी कॉपियां वापस लें, अगली सुनवाई 11 मार्च को

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NCERT Controversy: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की 8वीं कक्षा की एक किताब में न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इसे एक “सुनियोजित साजिश” करार देते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले की गहराई से जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

NCERT Controversy: क्या है पूरा मामला? 

NCERT की 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड’, जिसका पहला संस्करण फरवरी 2026 में प्रकाशित हुआ था, में एक अध्याय में भारतीय न्यायपालिका को भ्रष्ट संस्था के रूप में चित्रित किया गया था:

  • भ्रामक दावे: किताब में यह दावा किया गया था कि लोग न्यायपालिका में अलग-अलग स्तर पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं।

  • गलत प्रस्तुतीकरण: एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश के भाषण के कुछ शब्दों को इस तरह प्रस्तुत किया गया जैसे न्यायपालिका ने खुद अपनी संस्थागत खामियां स्वीकार की हों।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और आज इस पर सुनवाई हुई। पीठ में मुख्य न्यायाधीश के साथ जस्टिस बागची भी शामिल थे।

NCERT Controversy: CJI ने क्यों कहा , “यह साजिश है”?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कड़े शब्दों में कहा कि यह कोई सामान्य चूक नहीं बल्कि एक सोचा-समझा और कैलकुलेटेड कदम है:

  • नियोजित लक्ष्य: उन्होंने कहा कि इस सामग्री का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पहले शिक्षकों के माध्यम से, फिर छात्रों तक और फिर उनके अभिभावकों तक यह संदेश पहुंचाना था कि भारतीय न्यायपालिका भ्रष्ट है।

  • संस्थागत प्रहार: CJI ने कहा, “पूरा शिक्षक समाज इसे ट्रोल कर रहा है। यह एक गहरी साजिश है जो हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव को हिलाने की कोशिश करती है।”

  • संवैधानिक मर्यादा: उन्होंने यह भी कहा कि भारत के संविधान निर्माता अत्यंत जागरूक थे और उन्होंने विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका — तीनों के बीच स्वायत्त रूप से कार्य करने की व्यवस्था इसीलिए बनाई थी ताकि लोकतंत्र सुचारू रूप से चल सके।

NCERT Controversy: जस्टिस बागची ने उठाया डिजिटल सर्कुलेशन का मुद्दा

जस्टिस बागची ने डिजिटल युग में सामग्री के त्वरित प्रसार पर चिंता जताई:

  • तीव्र फैलाव: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि डिजिटल युग में एक किताब की हजारों प्रतियां पल भर में बन जाती हैं।

  • जांच का दायरा: उन्होंने सवाल किया कि यह सामग्री किताब में कैसे शामिल हुई और इसका ऑनलाइन प्रसार किस हद तक हो चुका है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी यह आरोप लगाया कि इस किताब का ऑनलाइन सर्कुलेशन हार्ड कॉपी से कहीं अधिक हो चुका है।

NCERT Controversy: NCERT की ओर से बिना शर्त माफी, लेकिन SC ने नहीं मानी

सुनवाई में NCERT की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए:

  • माफीनामा: उन्होंने कहा कि इस अध्याय को किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता और NCERT इस मामले में बिना शर्त माफी मांगती है।

  • अनुशासनात्मक कार्रवाई: उन्होंने यह भी बताया कि जिन दो लोगों ने यह अध्याय तैयार किया था, उन्हें अब UGC या किसी भी मंत्रालय के साथ काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • न्यायालय की असहमति: सुप्रीम कोर्ट ने इस माफी को तत्काल स्वीकार करने से इनकार कर दिया। CJI ने कहा, “माफी स्वीकार की जाए या नहीं, यह हम आगे तय करेंगे। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि यह माफी वास्तविक है या नहीं।” इसके साथ ही कोर्ट ने संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।

NCERT Controversy: किताब पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, सभी कॉपियां वापस लेने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब के उत्पादन और वितरण पर कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  1. पूर्ण प्रतिबंध: इस किताब के उत्पादन और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  2. केंद्र व राज्यों को निर्देश: कोर्ट ने NCERT को केंद्र और सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किताब की सभी हार्ड और सॉफ्ट कॉपियां तत्काल सार्वजनिक पहुंच से हटाई जाएं।

  3. डायरेक्टर की जिम्मेदारी: NCERT के डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूलों में भेजी गई सभी प्रतियां जब्त करें और कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें।

  4. डेडलाइन: सभी राज्यों के शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिवों को भी निर्देश दिया गया है कि वे दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करें।

  5. अवमानना की चेतावनी: कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस किताब को भौतिक या डिजिटल रूप से वितरित करने की कोई भी कोशिश सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना मानी जाएगी।

NCERT Controversy: वरिष्ठ वकीलों ने भी उठाए सवाल

  • कपिल सिब्बल: उन्होंने सवाल उठाया कि यह किताब PDF फॉर्मेट में पहले से उपलब्ध है और राजनेताओं तथा नेताओं के संदर्भ में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

  • विकास सिंह: उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से किया गया है।

NCERT Controversy: अगली सुनवाई 11 मार्च को

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गहरी जांच की मांग की है। CJI ने कहा कि यह मामला बंद नहीं होगा और यह पता लगाया जाएगा कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कौन-कौन लोग हैं। अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी।

SG तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार और NCERT न्यायपालिका की संस्था के साथ पूरी तरह खड़े हैं और इस मामले में कोई भी दोषी बचकर नहीं निकल पाएगा।

निष्कर्ष

यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था में सामग्री के चयन और समीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट किस हद तक सतर्क है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या सामने आता है और इस मामले के जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

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