ईरान-इजरायल जंग के बीच OPEC+ का बड़ा फैसला, अप्रैल से हर दिन 2 लाख बैरल ज्यादा तेल बाजार में उतारेगा, भारत को कितनी मिलेगी राहत, जानें पूरी बात
ईरान-इजरायल जंग के बीच OPEC+ का फैसला, अप्रैल से 206,000 bpd अतिरिक्त उत्पादन, होर्मुज खतरे के बावजूद बाजार स्थिर करने की कोशिश, भारत को सीमित राहत
Israel US Strikes in Iran: मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने दुनियाभर के तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं सहमी हुई हैं। इसी बीच रविवार को एक राहत भरी खबर आई। तेल निर्यातक देशों के संगठन यानी OPEC+ ने एक महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया कि वह अप्रैल महीने से हर दिन 2 लाख 6 हजार बैरल अतिरिक्त कच्चा तेल वैश्विक बाजार में उतारेगा। यह फैसला तेल की कीमतों को काबू में रखने और बाजार को स्थिर रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो यह अतिरिक्त सप्लाई भी नाकाफी साबित हो सकती है।
Israel US Strikes in Iran: क्यों लेना पड़ा यह अचानक फैसला?
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हमले किए और उसके बाद से ही वैश्विक तेल बाजार में भारी हलचल मच गई। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई जाने लगी और दुनिया के बड़े-बड़े देश चिंतित हो उठे। इसी खतरे को भांपते हुए सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में OPEC+ के आठ प्रमुख देशों के समूह ने रविवार को आनन-फानन में बैठक बुलाई और उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया। इस समूह में सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। इन सभी देशों का मानना है कि बाजार में अतिरिक्त तेल उतारने से कीमतों को एक सीमित दायरे में रखा जा सकेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
सबको चौंका गया OPEC+ का फैसला
इस बैठक से पहले बाजार के जानकारों और विशेषज्ञों का अनुमान था कि OPEC+ अधिकतम 1 लाख 37 हजार बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त सप्लाई का फैसला कर सकता है। लेकिन संगठन ने 2 लाख 6 हजार बैरल का आंकड़ा चुनकर सबको हैरान कर दिया। यह अनुमान से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है। OPEC+ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वैश्विक स्तर पर तेल के घटते भंडार और बढ़ती मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर इस उत्पादन दर को घटाया या बढ़ाया जा सकता है ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट का सामना किया जा सके। संगठन बाजार की स्थितियों पर लगातार और बारीकी से नजर रख रहा है।
Israel US Strikes in Iran: होर्मुज जलडमरूमध्य की चुनौती बनी हुई है सबसे बड़ा खतरा
यह फैसला राहत देने वाला जरूर है लेकिन असली और सबसे बड़ी चुनौती अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। फारस की खाड़ी में स्थित इस जलमार्ग से सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान का तेल दुनियाभर के देशों तक पहुंचता है। ईरान ने पहले से ही होर्मुज को बंद करने की धमकी दे रखी है और मौजूदा युद्ध के माहौल में यह खतरा पहले से कहीं ज्यादा वास्तविक लग रहा है। अगर यह जलमार्ग किसी भी कारण से बंद होता है तो OPEC+ की यह अतिरिक्त सप्लाई भी दुनिया तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा और तेल की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं।
भारत को कितनी राहत मिलेगी?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और मध्य-पूर्व इसका सबसे बड़ा स्रोत है। OPEC+ के इस फैसले से भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है। अगर तेल की कीमतें काबू में रहीं तो देश की आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर खाने-पीने की चीजों से लेकर ट्रांसपोर्ट और उद्योगों तक पर पड़ता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचा और होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हुआ तो भारत के सामने विकल्प सीमित होंगे। ऐसे में भारत को रूस से मिलने वाले रियायती तेल पर और ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है लेकिन वह भी पूरी जरूरत पूरी करने में सक्षम नहीं होगा। इसके अलावा भारत ईरान से सूखे मेवे और अन्य वस्तुओं का भी आयात करता है जो अब बाधित हो सकता है।
Israel US Strikes in Iran:आगे क्या होगा?
OPEC+ का यह कदम एक सकारात्मक संकेत जरूर है लेकिन यह काफी नहीं होगा अगर मध्य-पूर्व में युद्ध और भड़का। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि यह संघर्ष चार सप्ताह तक चल सकता है। अगर इतने समय में युद्ध समाप्त हुआ और होर्मुज खुला रहा तो OPEC+ की यह अतिरिक्त सप्लाई तेल बाजार को स्थिर रखने में कामयाब हो सकती है। लेकिन अगर संघर्ष और गहरा हुआ तो दुनिया 1973 जैसे तेल संकट की ओर बढ़ सकती है जब कीमतें कई गुना बढ़ गई थीं और दुनियाभर में मंदी आ गई थी। फिलहाल सबकी निगाहें मध्य-पूर्व के हालात पर टिकी हैं।
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