युद्ध के कारण भारतीय बासमती चावल का निर्यात हुआ ठप, ईरान को जाने वाला 2 अरब डॉलर का कारोबार अधर में, रास्ते में फंसी खेप, चाय निर्यात पर भी संकट
मिडिल-ईस्ट युद्ध से भारत का बासमती चावल निर्यात प्रभावित, ईरान को 1.2 अरब डॉलर का कारोबार अधर में, रास्ते में फंसी खेप, चाय निर्यात पर भी संकट
Israel US Iran War: मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग की लपटें अब भारत के कृषि निर्यात तक पहुंच गई हैं। शनिवार को हुए संयुक्त हमले के बाद से पश्चिम एशिया में जो अनिश्चितता गहराई है उसका सबसे ज्यादा असर भारतीय बासमती चावल के कारोबार पर पड़ा है। ईरान जो भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार है वहां की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि निर्यातकों की नींद उड़ गई है। रास्ते में फंसी खेप, रुके हुए भुगतान और बीमा संबंधी अनिश्चितता ने व्यापारियों को बेहद मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। यह संकट केवल बासमती तक सीमित नहीं है बल्कि चाय और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी इसकी मार पड़ रही है।
Israel US Iran War: जंग से पहले तेज हुई थी मांग, अब अचानक ठप हुआ कारोबार
व्यापार जगत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जंग शुरू होने से पहले पिछले दो महीनों में ईरानी आयातकों ने भारत से बड़ी मात्रा में बासमती चावल के ऑर्डर दिए थे। इस बढ़ी हुई मांग के कारण भारतीय बाजार में बासमती के दाम करीब 10 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए थे। किसान और व्यापारी दोनों खुश थे कि इस बार का सीजन अच्छा रहेगा। लेकिन जैसे ही इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए और जवाब में ईरान ने पूरे मध्य-पूर्व में मिसाइलें बरसानी शुरू कर दीं, पूरा कारोबार लगभग रात भर में ठप हो गया।
भारत से ईरान भेजी गई एक बड़ी खेप इस वक्त समुद्री रास्ते में है और मौजूदा हालात में यह स्पष्ट नहीं है कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच भी पाएगी या नहीं। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद समुद्री मार्ग पर भरोसा करना बेहद जोखिम भरा हो गया है। शिपमेंट के अलावा भुगतान को लेकर भी गहरी अनिश्चितता है क्योंकि ईरान पर लगे प्रतिबंधों और युद्ध की स्थिति में बैंकिंग लेनदेन बेहद पेचीदा हो गया है।
2 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार दांव पर
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के आंकड़ों पर गौर करें तो इस संकट की गंभीरता का अंदाजा होता है। भारत के कुल बासमती निर्यात का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईरान को जाता है जबकि 20 प्रतिशत इराक को। यानी पश्चिम एशिया के इन दो देशों में मिलाकर भारत का 20 लाख टन से ज्यादा बासमती चावल हर साल जाता है जिसकी कुल कीमत 2 अरब डॉलर यानी करीब 17 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक है। अकेले 2025 में भारत ने ईरान को 1.2 अरब डॉलर यानी करीब 10 हजार करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया था।
इस पूरे कारोबार के अधर में लटकने से न केवल निर्यातक बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड जैसे बासमती उत्पादक राज्यों के हजारों किसान भी प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इराक और मध्य एशिया के अन्य बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं जिससे भारतीय बासमती की पूरी वैश्विक मांग पर असर पड़ेगा।
Israel US Iran War: चाय निर्यात पर भी पड़ रही है मार
संकट केवल बासमती चावल तक सीमित नहीं है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार भारत ने ईरान को करीब 7 अरब रुपये की चाय निर्यात की थी। ईरान भारतीय चाय का भी एक प्रमुख खरीदार है और युद्ध की स्थिति में वहां का आयात लगभग ठप हो गया है। भुगतान का जोखिम और समुद्री मार्ग की अनिश्चितता ने चाय निर्यातकों को भी नई खेप भेजने से रोक दिया है। असम और दार्जिलिंग के चाय बागान मालिक भी इस संकट से चिंतित हैं।
ईरानी रियाल की गिरावट और टैरिफ ने बनाया दोहरा संकट
इस जंग से पहले भी ईरान की अर्थव्यवस्था बेहद दबाव में थी। अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत पहले से ही बुरी तरह गिरी हुई थी। रियाल की वैल्यू में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आने से वहां के आम लोगों और कारोबारियों की खरीद क्षमता कम हो गई है। इस पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की मार ने व्यापार को और भी मुश्किल बना दिया था। अब ऊपर से युद्ध का संकट आ गया है जिसने बची-खुची उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है।
Israel US Iran War: आगे की राह कठिन लेकिन विकल्पों की तलाश जरूरी
भारतीय निर्यातक और उद्योग संगठन अब सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस संकट में सरकार को आगे आकर रुके हुए भुगतान और बीमा के मामलों में सहायता देनी चाहिए। साथ ही वैकल्पिक बाजारों की तलाश भी तेज करनी होगी। चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के कुछ देश भारतीय बासमती के लिए नए बाजार बन सकते हैं लेकिन यह रातोंरात नहीं होगा।
मध्य-पूर्व में जंग कितने दिन चलती है यही तय करेगा कि भारतीय कृषि निर्यात को इस संकट से कितना नुकसान उठाना पड़ेगा। फिलहाल हजारों करोड़ रुपये का कारोबार अधर में लटका है और उम्मीद की नजरें मध्य-पूर्व में शांति की संभावना पर टिकी हैं।
Read More Here
- मार्च 2026 में इन मूलांक वालों पर बरसेगी किस्मत, पैसा-प्यार-नौकरी सब मिलेगा एकसाथ
- पिता को खोकर भी मैदान में उतरेंगे रिंकू सिंह, रोते हुए घर से हुई विदाई
- ईरान पर अमेरिका-इजरायल का महाहमला, रक्षा मंत्री की मौत का दावा, खाड़ी देशों में मचा हाहाकार
- स्मार्टफोन खरीदना होगा महंगा! AI की वजह से चिप संकट गहराया, कीमतें 14% तक उछलेंगी