मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का Plan-B तैयार, देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई किल्लत नहीं, अफवाहों पर न दें ध्यान, ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका से नए समझौते

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बीच भारत तैयार, पेट्रोल-डीजल और LPG की पर्याप्त स्टॉक, अफवाहें झूठी। ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका से नए गैस समझौते, GAIL ने प्राथमिकता क्षेत्रों को सुनिश्चित किया

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Iran-US War: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आशंका को हवा दे दी है। कतर द्वारा फोर्स मेज्योर घोषित करने और गैस आपूर्ति में रुकावट की खबरों के बाद भारतीय उपभोक्ताओं में भी चिंता और घबराहट का माहौल बन गया था। सोशल मीडिया पर यह अफवाहें भी तेजी से फैलने लगीं कि देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री सीमित की जा सकती है। लेकिन इन सभी आशंकाओं को भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी भी तरह की कमी की कोई संभावना नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने एक मजबूत Plan-B भी तैयार कर लिया है जो किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे मामले का हाल।

सोशल मीडिया की अफवाहें झूठी हैं

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह खबरें तेजी से वायरल हो रही थीं कि मध्य पूर्व संकट के कारण भारत में ईंधन की किल्लत हो सकती है और पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर रोक लग सकती है। कुछ लोगों ने घबराकर पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त ईंधन भरवाना शुरू कर दिया था। लेकिन सरकारी सूत्रों ने इन सभी खबरों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताते हुए साफ कहा है कि ईंधन की सीमित बिक्री की कोई भी योजना सरकार के पास नहीं है। देशवासियों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य रूप से अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन खरीदते रहें। पैनिक बायिंग से बचें क्योंकि इससे अनावश्यक दबाव पैदा होता है।

Iran-US War: देश के पास है पर्याप्त भंडार

भारत के पास इस समय पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त रणनीतिक भंडार मौजूद है। विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में बने भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में कच्चे तेल का विशाल स्टॉक सुरक्षित है। इसके अलावा रिफाइनरियों और ईंधन डिपो में भी पर्याप्त मात्रा में ईंधन का भंडारण है। सूत्रों ने बताया कि इस स्टॉक को हर दिन नए आयात से रिफिल भी किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में कोई कमी न हो। देश की सभी प्रमुख तेल रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुचारु है।

कतर का विकल्प तैयार, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से नए समझौते

मध्य पूर्व संकट में सबसे बड़ी चिंता कतर से एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आपूर्ति को लेकर थी। कतर दुनिया की 20 प्रतिशत एलएनजी जरूरतों को पूरा करता है। भारत अपनी कुल 195 MMSCMD गैस आयात में से लगभग 60 MMSCMD कतर से लेता है। कतर के फोर्स मेज्योर घोषणा के बाद भारत ने तत्काल वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश शुरू कर दी। इस दिशा में बड़ी सफलता मिली है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भारत को गैस बेचने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा भारत ने संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ नए ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन नए समझौतों से गैस की किल्लत का खतरा काफी हद तक टल गया है।

Iran-US War: GAIL की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस सुनिश्चित

गैस आपूर्ति की चुनौती से निपटने के लिए GAIL यानी गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ने फोर्स मेज्योर घोषित करते हुए प्राथमिकता के आधार पर गैस वितरण का फैसला किया है। इसके तहत खाद उद्योग और बिजली उत्पादन जैसे सबसे जरूरी क्षेत्रों को निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। खाद उद्योग को प्राथमिकता देना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे देश की कृषि उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। बिजली उत्पादन में रुकावट से पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है इसलिए इसे भी प्राथमिकता दी गई है।

दिन में दो बार हो रही है समीक्षा

भारत सरकार मध्य पूर्व संकट को बेहद गंभीरता से ले रही है। सरकार दिन में दो बार देश की ऊर्जा स्थिति की विस्तृत समीक्षा कर रही है। इसमें आयात की स्थिति, भंडारण का स्तर, वितरण श्रृंखला और वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था सभी पर नजर रखी जा रही है। समुद्र में बढ़ते खतरे के कारण जहाजों के बीमे की समस्या भी सामने आई है। इस मुद्दे पर भारत अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है ताकि तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

Iran-US War: वैश्विक साझेदारी से मजबूत होगी ऊर्जा सुरक्षा

भारत इस समय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA और OPEC के साथ भी लगातार संपर्क में है। प्रमुख तेल उत्पादक देशों के साथ बातचीत चल रही है ताकि कच्चे तेल और एलपीजी की निरंतर आपूर्ति बनी रहे। OPEC प्लस ने भी इस संकट के बीच अपना उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। भारत की मजबूत कूटनीतिक सक्रियता और विविध आपूर्ति स्रोत देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी ताकत हैं।

कुल मिलाकर भारत सरकार ने मध्य पूर्व के इस संकट से निपटने के लिए हर स्तर पर तैयारी कर ली है। देशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं होगी और सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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