ईरान संकट के बीच रूस का बड़ा ऐलान, भारत और चीन को बढ़ाकर देगा तेल की आपूर्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों को मिली राहत
होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव के बीच रूस के उप PM अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा, जरूरत पड़ने पर भारत और चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने को तैयार।
Iran-US War: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच दुनिया के तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच रूस ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण ऐलान किया है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने स्पष्ट कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो रूस भारत और चीन को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। ऐसे समय में जब होर्मुज मार्ग पर तनाव बढ़ रहा है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो रही हैं, रूस का यह प्रस्ताव भारतीय रिफाइनरियों और नीति निर्माताओं को नई ताकत देता है।
रूस पहले से है भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
यह ऐलान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस पहले से ही भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है। फरवरी 2026 में भी रूस से भारत ने करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन यानी एक मिलियन बैरल प्रतिदिन से थोड़ा अधिक कच्चा तेल आयात किया। हालांकि जनवरी की तुलना में यह आंकड़ा थोड़ा कम था लेकिन फिर भी रूस सभी देशों में शीर्ष पर बना रहा। यह आंकड़ा बताता है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-रूस के बीच ऊर्जा संबंध कितने मजबूत हो गए हैं। 2022 से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था लेकिन यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस ने भारत और चीन को सस्ते दामों पर तेल देना शुरू किया और अब रूस भारत का नंबर एक तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है।
Iran-US War: सऊदी अरब ने भी बढ़ाई आपूर्ति
रूस के साथ-साथ सऊदी अरब ने भी भारत को तेल आपूर्ति बढ़ाई है। फरवरी 2026 में सऊदी अरब ने भारत को जनवरी की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक तेल भेजा। यह इस बात का संकेत है कि खाड़ी देश भी मौजूदा संकट के बीच भारत के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। हालांकि सऊदी अरब की आपूर्ति बढ़ने के बावजूद रूस ने अपनी बढ़त बनाए रखी और वह भारत का सबसे बड़ा तेल स्रोत बना रहा। अब रूस के नए बयान के बाद यह स्थिति और मजबूत हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों मंडरा रहा है खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20 से 25 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और ईरान का तेल इसी मार्ग से निकलता है। अब जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि इस जलमार्ग पर उसका पूरा नियंत्रण है और यहां से गुजरने वाले जहाजों को मिसाइल या ड्रोन हमलों का खतरा हो सकता है तो पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग देने के लिए तैयार है। इन बयानों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
Iran-US War: भारत पर होर्मुज बंद होने का क्या असर पड़ेगा?
भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत बेहद ज्यादा है। प्रतिदिन करीब 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है। इसमें इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात से पूरा करता है जिसमें से करीब 50 से 55 प्रतिशत मध्य पूर्व से आता है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है। अगर यह मार्ग कुछ दिनों के लिए भी बाधित हुआ तो भारत की तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। इसीलिए भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही हैं और रूस का यह प्रस्ताव इस दिशा में सबसे बड़ी राहत है।
भारत के लिए रूस का विकल्प क्यों है सबसे बेहतर
होर्मुज से गुजरे बिना रूसी तेल भारत तक पहुंच सकता है। रूस का तेल आर्कटिक महासागर और पूर्वी मार्गों से भेजा जा सकता है जो होर्मुज पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा रूस अपना तेल भारत को रियायती दामों पर देता है जिससे भारत के आयात खर्च में भी कमी आती है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा है क्योंकि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है। अब संकट के इस समय में रूस का खुलकर सामने आना और आपूर्ति बढ़ाने का प्रस्ताव देना भारत-रूस के बीच ऊर्जा साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाता है।
Iran-US War: भारतीय रिफाइनरियों की वैकल्पिक तैयारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही होर्मुज संकट की आशंका को देखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाश रही हैं। रूस के अलावा पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से भी तेल आयात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही भारत के पास विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार हैं जो आपात स्थिति में काम आ सकते हैं। रूस का यह नया प्रस्ताव भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाता है और होर्मुज संकट की स्थिति में भारत को एक बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
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