ईरान ने माना इजरायली हमले में अली लारीजानी की मौत, बासिज बल प्रमुख सुलेमानी भी ढेर, 67 वर्षीय लारीजानी थे ईरान के सबसे ताकतवर नेताओं में, बेटे और सुरक्षाकर्मी भी मारे गए, जानें पूरा घटनाक्रम

ईरान ने की पुष्टि, बासिज प्रमुख सुलेमानी भी मारे गए, हमले में परिवार भी शामिल

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Iran-US War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध और भयावह होता जा रहा है। ईरान ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि इजरायली हवाई हमले में उनके वरिष्ठ नेता और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत हो गई है। 67 वर्षीय लारीजानी ईरान के सबसे प्रभावशाली और ताकतवर नेताओं में गिने जाते थे। इसी के साथ ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी समाचार एजेंसी ने बासिज बल के प्रमुख जनरल गुलाम रजा सुलेमानी की मौत की भी पुष्टि की है। इस हमले में लारीजानी के बेटे और उनके कुछ सुरक्षाकर्मी भी मारे गए।

अली लारीजानी की मौत – मुख्य तथ्य एक नजर में

विवरण जानकारी
मृत नेता अली लारीजानी
पद सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिव
आयु 67 वर्ष
मौत का कारण इजरायली हवाई हमला
हमले का स्थान तेहरान के पास
हमले का समय रात भर चला
पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया और सुरक्षा परिषद
अन्य मृत लारीजानी के बेटे और सुरक्षाकर्मी
आखिरी बार देखे गए 13 मार्च, तेहरान में कुद्स रैली
दूसरा बड़ा नुकसान बासिज बल प्रमुख जनरल सुलेमानी

Iran-US War: इजरायल ने पहले ही किया था दावा

इजरायल ने इस हमले से पहले ही घोषणा कर दी थी कि तेहरान के पास रात भर चले हवाई हमले में लारीजानी को मार गिराया गया है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने दावा किया था कि सोमवार रात के हमलों में बासिज बल के प्रमुख जनरल सुलेमानी के साथ-साथ लारीजानी को भी निशाना बनाया गया।

ईरान ने शुरुआत में लारीजानी की मौत की न पुष्टि की और न ही खंडन किया। लेकिन बाद में ईरानी राज्य मीडिया और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी।

बासिज बल प्रमुख की भी हुई मौत

विवरण जानकारी
मृत अधिकारी जनरल गुलाम रजा सुलेमानी
पद बासिज बल के प्रमुख
पुष्टि ईरान की न्यायपालिका की समाचार एजेंसी मिजान
हमले का समय सोमवार रात

बासिज बल ईरान की अर्धसैनिक संस्था है जो देश के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय रहती है। इस बल के प्रमुख की मौत ईरान की सैन्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

अली लारीजानी का सियासी सफर – कौन थे वे?

लारीजानी ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक स्तंभ थे। उनका राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा।

समय पद और भूमिका
1994 से 2004 ईरान के सार्वजनिक प्रसारण संस्था के प्रमुख और संस्कृति मंत्री
2005 से सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव
2005 से 2007 ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार
2008 से 2020 ईरान की संसद मजलिस के अध्यक्ष
2021 चीन के साथ 25 साल के रणनीतिक समझौते पर बातचीत के लिए विशेष दूत
2021 और 2024 राष्ट्रपति चुनाव में अयोग्य घोषित

Iran-US War: ईरान के लिए कितना बड़ा झटका

लारीजानी अयातुल्ला खामेनेई के अत्यंत करीबी और भरोसेमंद माने जाते थे। पिछले महीने के अंत में अमेरिकी-इजरायली हमलों में खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी ही देश की व्यवस्था संभाल रहे थे और सभी अहम फैसले ले रहे थे।

ऐसे नाजुक समय में जब ईरान पहले से ही अपने सर्वोच्च नेता की मौत से हिला हुआ था तब लारीजानी और सुलेमानी जैसे वरिष्ठ नेताओं की एक साथ मौत ईरान की शासन व्यवस्था और सैन्य ढांचे दोनों के लिए गहरा आघात है।

आखिरी बार कब देखे गए थे लारीजानी?

लारीजानी को आखिरी बार 13 मार्च 2026 को तेहरान में कुद्स रैली के दौरान देखा गया था। इस रैली में वे ईरान के राष्ट्रपति के साथ नजर आए थे। इसके महज 5 दिन बाद इजरायली हमले में उनकी मौत की खबर सामने आई।

Iran-US War: लारीजानी का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

लारीजानी का जन्म इराक के नजफ में हुआ था लेकिन बाद में उनका परिवार ईरान आ गया और यहीं बस गया। वे ईरान की शासन व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरे और दशकों तक देश की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे।

युद्ध का बढ़ता दायरा – भारत और दुनिया पर असर

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं रहा। लारीजानी जैसे वरिष्ठ नेताओं और सैन्य प्रमुखों की मौत यह बताती है कि यह संघर्ष अब ईरान की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था को सीधे निशाना बना रहा है।

इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। भारत में भी इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और सोने-चांदी के बाजार पर देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ का कहना है कि अली लारीजानी की मौत ईरान के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे न केवल एक अनुभवी राजनेता थे बल्कि देश की सुरक्षा नीति के मुख्य संचालक भी थे। उनकी मौत के बाद ईरान में नेतृत्व का संकट और गहरा होगा।

Iran-US War: निष्कर्ष

अली लारीजानी की मौत और बासिज बल प्रमुख की मौत यह दर्शाती है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच का यह युद्ध अब एक नए और अत्यंत खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। ईरान पहले से ही अपने सर्वोच्च नेता की मौत से हिला हुआ था और अब इन वरिष्ठ नेताओं की मौत से उसकी शासन व्यवस्था और सैन्य नेतृत्व दोनों गहरे संकट में हैं। यह युद्ध न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति को प्रभावित कर रहा है।

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