महंगाई की दोहरी मार, गिरते रुपये और बढ़ती लागत के बीच तेल, साबुन, चाय, दाल सब हुए महंगे, FMCG कंपनियों ने 2% से 5% तक बढ़ाए दाम

रुपये की गिरावट और कच्चे माल की बढ़ती लागत से दोहरी मार, FMCG कंपनियों ने तेल, साबुन, डिटर्जेंट, चाय, नूडल्स, चॉकलेट, अनाज पर 2-5% तक दाम बढ़ाए; नई महंगाई की लहर शुरू

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Inflation Rate: कुछ महीनों की राहत के बाद महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर जोरदार दस्तक दे दी है। रसोई से लेकर बाथरूम तक इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की जरूरत की चीजें अब महंगी होने लगी हैं। तेल, साबुन, डिटर्जेंट, चाय, नूडल्स, चॉकलेट और अनाज जैसे उत्पाद बनाने वाली FMCG कंपनियां 2 से 5 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा रही हैं और बाजार में नए महंगे पैकेट पहुंचने लगे हैं। इसकी दो बड़ी वजहें हैं जो एकसाथ मिलकर आम आदमी पर दोहरी मार कर रही हैं। पहली है कच्चे माल की लगातार बढ़ती लागत और दूसरी है डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी।

Inflation Rate: कब से शुरू हुई यह नई महंगाई?

सितंबर 2025 में जीएसटी में कटौती के बाद कंपनियों ने कुछ महीनों तक कीमतें स्थिर रखी थीं जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे उत्पादों के नए और महंगे पैकेट बाजार में आने लगे हैं। कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के दबाव में यह कदम उठाना अब उनकी मजबूरी बन गई है।

कच्चे तेल और नारियल तेल ने बढ़ाई लागत

महंगाई की इस नई लहर के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। साबुन, शैम्पू और डिटर्जेंट जैसे पर्सनल और होम केयर उत्पाद कच्चे तेल से बनने वाले रसायनों पर निर्भर होते हैं। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सल्फर, एन-पैराफिन और लिक्विड पैराफिन जैसे रसायनों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा नारियल तेल की कीमतें पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं जिसका सीधा असर इन उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है।

Inflation Rate: गिरता रुपया बना आम आदमी का नया दुश्मन

इस पूरी महंगाई की कहानी में रुपये की कमजोरी एक अलग ही मुसीबत बनकर सामने आई है। डॉलर के मुकाबले रुपया हाल में रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया जिसके चलते आयातित कच्चे माल की कीमतें और बढ़ गई हैं। ओट्स, बादाम और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ विदेशों से मंगाए जाते हैं। रुपये में गिरावट के कारण इन चीजों को आयात करना महंगा हो गया है और यह अतिरिक्त लागत अंततः उपभोक्ता की जेब से वसूली जा रही है।

होम केयर, चाय और अनाज भी हुए महंगे

महंगाई की यह मार केवल एक-दो उत्पादों तक सीमित नहीं है। होम केयर सेगमेंट में भी कीमतें बढ़ने लगी हैं और कुछ कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में और भी पैकेट महंगे हो सकते हैं। चाय की कीमतों में भी हाल में बढ़ोतरी देखी गई है और कच्चे माल की स्थिति के आधार पर आगे और बदलाव संभव है।

Inflation Rate: बिक्री बढ़ी लेकिन मुनाफा दबाव में

एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जीएसटी कटौती के बाद FMCG कंपनियों की बिक्री की मात्रा में साल-दर-साल वृद्धि हुई है। लेकिन कच्चे माल की लागत में तेज बढ़ोतरी ने इन कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन को कम कर दिया है। यही वजह है कि अब ये कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो रही हैं।

आम आदमी के लिए यह समय आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ जहां घरेलू उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं वहीं रुपये की कमजोरी से आयातित सामान भी महंगा होता जा रहा है। ऐसे में परिवारों को अपना बजट सोच-समझकर बनाने की जरूरत है।

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