ब्रह्मपुत्र के नीचे बनेगी भारत की पहली अंडरवाटर रोड-रेल टनल, 18,662 करोड़ के प्रोजेक्ट को कैबिनेट की मंजूरी
18,662 करोड़ की मंजूरी, गोहपुर-नुमालीगढ़ 15.79 किमी ट्विन ट्यूब टनल, सफर 6 घंटे से घटकर 15-20 मिनट
Brahmaputra Underwater Road-Rail Tunne: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने असम में एक अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना भारत के लिए ऐतिहासिक होगी क्योंकि यह देश की पहली और दुनिया की दूसरी अंडरवाटर रोड कम रेल टनल होगी। NH-15 पर गोहपुर से नुमालीगढ़ तक 4 लेन वाली एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी बनाने के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन ट्यूब रोड कम रेल टनल का निर्माण शामिल है।
इस विशाल परियोजना को इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर कुल 18,662 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा।
Brahmaputra Underwater Road-Rail Tunne: वर्तमान में कितनी है दूरी और समय
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वर्तमान स्थिति: NH-715 पर स्थित नुमालीगढ़ और NH-15 पर स्थित गोहपुर के बीच की दूरी लगभग 240 किलोमीटर है।
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समय: इस यात्रा को पूरा करने में औसतन 6 घंटे का समय लगता है।
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चुनौती: यह मार्ग नुमालीगढ़, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बिस्वनाथ शहर से होकर गुजरता है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है और मानसून में संपर्क टूटने का खतरा रहता है।
परियोजना के बाद: इस नई टनल के बन जाने के बाद यह दूरी सिर्फ 15.79 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा का समय घटकर मात्र 15-20 मिनट हो जाएगा।
Brahmaputra Underwater Road-Rail Tunne: अनोखी टनल की विशेषताएं
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विश्व स्तरीय डिजाइन: यह टनल भारत में अपनी तरह की पहली और विश्व में दूसरी अंडरवाटर रोड कम रेल टनल होगी, जिसमें सड़क और रेल दोनों की सुविधा एक साथ होगी।
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अत्याधुनिक सुविधाएं: टनल में आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट, सीसीटीवी निगरानी और उन्नत संचार व्यवस्था होगी।
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आपदा प्रबंधन: टनल का डिजाइन इस प्रकार होगा कि भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना किया जा सके।
Brahmaputra Underwater Road-Rail Tunne: राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे का महत्वपूर्ण जंक्शन
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राजमार्ग कनेक्टिविटी: यह परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों NH-15 और NH-715 को आपस में जोड़ेगी।
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रेल कनेक्टिविटी: गोहपुर की तरफ रंगिया-मुकोंगसेलेक रेल सेक्शन और नुमालीगढ़ की तरफ फुरकटिंग-मरियानी लूप लाइन सेक्शन को जोड़ा जाएगा।
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मल्टी-मॉडल एकीकरण: परियोजना 4 बड़े रेलवे स्टेशनों, 2 हवाई अड्डों और 2 अंतर्देशीय जलमार्गों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करेगी।
Brahmaputra Underwater Road-Rail Tunne: आर्थिक, सामाजिक और क्षेत्रीय विकास
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कनेक्टिविटी केंद्र: परियोजना कुल 11 आर्थिक केंद्रों, 3 सामाजिक केंद्रों, 2 पर्यटन केंद्रों और 8 लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जुड़ेगी।
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पूर्वोत्तर राज्यों को लाभ: अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों को माल ढुलाई और आवाजाही में अत्यधिक लाभ मिलेगा।
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रोजगार के अवसर: निर्माण चरण में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। स्थानीय युवाओं, इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
Brahmaputra Underwater Road-Rail Tunne: पर्यावरण और सुरक्षा के उपाय
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पारिस्थितिकी संरक्षण: ब्रह्मपुत्र नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जलीय जीवन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े, इसके लिए आधुनिक बोरिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
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वन्यजीव सुरक्षा: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे संरक्षित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और वन्यजीवों के आवागमन मार्गों को बाधित नहीं किया जाएगा।
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अपशिष्ट प्रबंधन: मलबे और अपशिष्ट का पर्यावरण अनुकूल तरीके से निपटान किया जाएगा।
निष्कर्ष
यह परियोजना भारत की बढ़ती इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचा विकास क्षमता का प्रतीक है। विश्व में केवल एक ही अंडरवाटर रोड कम रेल टनल मौजूद है और भारत दूसरा देश होगा जो इस तरह की जटिल परियोजना को साकार करेगा। यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी दक्षता को रेखांकित करेगी।
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