पश्चिम एशिया संकट भारत की GDP पर डाल सकता है 0.6% तक का असर, Fitch की यूनिट BMI की चेतावनी, निवेश माहौल भी होगा प्रभावित
ईरान संकट से तेल कीमतें 10% बढ़ीं तो भारत की GDP पर 0.3-0.6% नकारात्मक असर। निवेश माहौल प्रभावित, FY27 GDP 7% अनुमान बरकरार।
Indian Market Outlook: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का सबब बनता जा रहा है। फिच ग्रुप की शोध एवं विश्लेषण इकाई BMI यानी Business Monitor International ने अपनी ताजा ‘इंडिया आउटलुक’ रिपोर्ट में आगाह किया है कि अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो भारत की GDP पर 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च महीने से ही अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। BMI ने हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
Indian Market Outlook: निवेश माहौल पर पड़ सकता है असर
BMI की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत में निवेश की भावना को प्रभावित कर सकता है। इससे यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले सकारात्मक प्रभाव को आंशिक रूप से बेअसर किया जा सकता है। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है और इससे भारत में निवेश हतोत्साहित हो सकता है। भारत जैसे शुद्ध तेल आयातक देशों पर इस संकट का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने का अनुमान है।
GDP अनुमान 7% पर बरकरार लेकिन जोखिम बढ़ा
BMI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत पर बनाए रखा है। यह चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.9 प्रतिशत की वृद्धि से कम है। हालांकि अनुमान स्थिर रखा गया है लेकिन रिपोर्ट में जोखिम बढ़ने की स्पष्ट चेतावनी दी गई है। तेल कीमतों में और उछाल आने पर आयात बिल बढ़ेगा, ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा और रुपए पर भी असर हो सकता है।
Indian Market Outlook: कब और कैसे शुरू हुआ यह संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और इसमें से बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
कुल मिलाकर BMI की यह रिपोर्ट भारत सरकार और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि पश्चिम एशिया का यह संकट जितना लंबा खिंचेगा उतना ही भारत की विकास गाथा पर इसका असर गहरा होता जाएगा।
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