India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों का विरोध, मोदी-ट्रंप के पुतले जलाने की चेतावनी, 12 फरवरी को हड़ताल का ऐलान
राकेश टिकैत ने मोदी-ट्रंप पुतले जलाने की चेतावनी दी, 12 फरवरी को हड़ताल का ऐलान; समझौते को किसान विरोधी बताया
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर देश में किसान संगठनों ने विरोध का झंडा बुलंद कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने घोषणा की कि किसान संगठन गांव-गांव में इस समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब देश भर में व्यापार समझौते को लेकर बहस तेज हो गई है।
India-US Trade Deal: टिकैत ने किया सरकार पर हमला
राकेश टिकैत ने दिल्ली में एक जनसभा के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की तीखी आलोचना की। उन्होंने इस समझौते की तुलना 1992 की स्थिति से की जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को खोला था। किसान नेता ने कहा कि जिस तरीके से यह समझौता किया गया है वह भारत के लिए खतरनाक साबित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों को इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।
टिकैत ने आरोप लगाया कि यह एकतरफा समझौता है और दबाव में किया गया करार है। उनका कहना था कि भारतीय किसानों को यह समझौता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। किसान नेता ने चेतावनी दी कि अमेरिका सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों से भारतीय बाजार को पाट देगा जिससे भारतीय किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे।
सरकार झूठ बोल रही है टिकैत का आरोप
जब पत्रकारों ने किसानों की सुरक्षा को लेकर सरकार के आश्वासन के बारे में सवाल किया तो टिकैत ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार झूठ बोल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ भी दावा कर सकती है लेकिन वास्तविकता कुछ और है। किसान नेता ने जोर देकर कहा कि विरोध प्रदर्शन ही एकमात्र उपाय बचा है।
टिकैत ने यह भी घोषणा की कि किसान गांवों में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के पुतले जलाए जाएंगे। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो किसान दिल्ली की ओर कूच कर सकते हैं। टिकैत ने कहा कि दिल्ली ज्यादा दूर नहीं है और किसानों के ट्रैक्टर हमेशा तैयार रहते हैं।
India-US Trade Deal: 12 फरवरी को आम हड़ताल का समर्थन
किसान नेता राकेश टिकैत ने 12 फरवरी को होने वाली आम हड़ताल का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसान इस हड़ताल में शामिल होंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव विजू कृष्णन ने भी इस समझौते की कड़ी निंदा की और कहा कि सभी किसान संगठन 12 फरवरी की आम हड़ताल का समर्थन करेंगे।
किसान संगठनों का कहना है कि यह हड़ताल सरकार के खिलाफ एक मजबूत संदेश होगी। वे चाहते हैं कि सरकार इस व्यापार समझौते पर पुनर्विचार करे और किसानों के हितों की रक्षा करे।
भाकियू ने उठाए सवाल
भारतीय किसान यूनियन ने एक विस्तृत बयान जारी कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विवरण पर गंभीर सवाल उठाए। संगठन ने कहा कि समझौते का पूरा विवरण अभी भी गोपनीयता के पर्दे के पीछे छिपा हुआ है। भाकियू ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने किसान संगठनों से बिना किसी परामर्श के यह समझौता कर लिया।
संगठन का कहना है कि कृषि और किसानों की आजीविका पर इस समझौते के प्रभाव को ठीक से समझे बिना हस्ताक्षर कर दिए गए। भाकियू ने इस समझौते को किसान विरोधी बताया और कहा कि यह भारतीय कृषि के लिए घातक साबित हो सकता है।
India-US Trade Deal: जीएमओ उत्पादों के आयात की चिंता
किसान संगठनों की एक बड़ी चिंता यह है कि कृषि आयात पर गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने से आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों यानी जीएमओ के आयात के द्वार खुल सकते हैं। भाकियू ने चेतावनी दी कि इससे भारतीय कृषि पर बुरा असर पड़ेगा और देसी किस्मों को नुकसान होगा।
संगठन का मानना है कि अमेरिका से आने वाले सब्सिडी युक्त कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर बिकेंगे। इससे भारतीय किसानों की उपज की कीमतें गिरेंगी और वे घाटे में चले जाएंगे। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
भारत-यूरोपीय संघ समझौता भी निशाने पर
भाकियू ने सिर्फ भारत-अमेरिका समझौते तक ही अपनी आलोचना सीमित नहीं रखी। संगठन ने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को भी किसानों के हितों के खिलाफ बताया। बयान में कहा गया कि कम टैरिफ के बावजूद भारतीय कृषि निर्यात को यूरोपीय बाजारों में आसानी से पहुंच नहीं मिलेगी।
इसकी वजह यूरोप में लागू स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के सख्त मानक हैं। किसान संगठनों का कहना है कि ये समझौते एकतरफा हैं और भारतीय किसानों को कोई खास फायदा नहीं होगा। उल्टे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
India-US Trade Deal: किसानों की मांगें
किसान संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि व्यापार समझौतों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। अब भी सरकार को इन समझौतों पर पुनर्विचार चाहिए।
किसान चाहते हैं कि कृषि उत्पादों के आयात पर उचित शुल्क लगाया जाए ताकि भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा कर सकें। जीएमओ उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जाए। भारतीय कृषि की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
आगे क्या होगा?
12 फरवरी की आम हड़ताल किसान आंदोलन की दिशा तय करेगी। अगर सरकार किसानों की बात नहीं सुनती है तो आंदोलन और तेज हो सकता है। राकेश टिकैत के बयान से साफ है कि किसान इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि व्यापार समझौते भारत के हित में हैं और किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन किसान संगठन इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिख रहे।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्म हो सकता है। किसान संगठनों ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है और वे मैदान में उतरने को तैयार हैं। देखना होगा कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालती है।
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