India-France Deal: 114 राफेल विमानों की मेगा डील पर अहम बैठक, मैक्रों के दौरे से पहले लग सकती है मुहर
रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक फरवरी के दूसरे हफ्ते में संभावित
India-France Deal: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम उठने की तैयारी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 से 20 फरवरी तक भारत दौरे से पहले 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील पर अहम फैसला लिया जा सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) की महत्वपूर्ण बैठक फरवरी के दूसरे हफ्ते में होने की संभावना है। इस बैठक में राफेल विमानों की खरीद पर निर्णायक चर्चा होने की उम्मीद है।
India-France Deal: मैक्रों का भारत दौरा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 18 से 20 फरवरी के बीच भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरान वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में भाग लेंगे। हालांकि इस दौरान रक्षा सहयोग भी एजेंडे में शामिल है। भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत है और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
मैक्रों की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। राफेल विमानों की डील इनमें सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण है। अगर DAC की बैठक में इस डील को मंजूरी मिल जाती है, तो मैक्रों की यात्रा के दौरान इस पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
114 राफेल विमानों का सौदा
भारतीय वायुसेना ने 114 नए लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना बनाई है। यह भारत के रक्षा इतिहास में सबसे बड़े विमान खरीद सौदों में से एक होगा। फ्रांस का राफेल विमान इस प्रतियोगिता में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
भारत ने पहले ही 36 राफेल विमानों की खरीद की थी, जो 2020 से भारतीय वायुसेना में शामिल हो रहे हैं। इन विमानों की क्षमता और प्रदर्शन से वायुसेना बेहद संतुष्ट है। राफेल को दुनिया के सबसे उन्नत मल्टीरोल लड़ाकू विमानों में गिना जाता है।
नई डील में 114 विमानों की खरीद प्रस्तावित है, जिसकी कीमत कई अरब डॉलर हो सकती है। यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत होने की संभावना है, जिसमें विमानों का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही निर्मित किया जाएगा।
India-France Deal: वायुसेना की तात्कालिक जरूरत
भारतीय वायुसेना को अपने बेड़े को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है। पुराने लड़ाकू विमान धीरे-धीरे सेवानिवृत्त हो रहे हैं और स्क्वाड्रनों की संख्या घट रही है। वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वाड्रन चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह संख्या 31-32 के आसपास है।
भारत का 5वीं पीढ़ी का स्वदेशी लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) अभी शुरुआती विकास चरण में है। इसे सेवा में आने में अभी कई साल लगेंगे। वहीं हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का तेजस एमके-1ए प्रोजेक्ट भी अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के इंजन पर निर्भर होने की वजह से धीमी रफ्तार से चल रहा है।
ऐसे में राफेल जैसे सिद्ध और उन्नत लड़ाकू विमानों की खरीद वायुसेना की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।
मेक इन इंडिया के तहत निर्माण
नई राफेल डील में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण भारत में करेगी। इससे भारत में रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पहले 36 राफेल विमानों की खरीद में सभी विमान फ्रांस में बने थे। लेकिन नई डील में अधिकतर विमान भारत में ही निर्मित होंगे। इसके लिए भारत में एक नई उत्पादन लाइन स्थापित की जाएगी।
यह व्यवस्था भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में भी मदद करेगी। भारतीय इंजीनियर और तकनीशियन अत्याधुनिक विमान निर्माण तकनीक सीखेंगे, जो भविष्य में स्वदेशी विमानों के विकास में सहायक होगा।
India-France Deal: रक्षा अधिग्रहण परिषद की भूमिका
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) भारत में रक्षा खरीद से संबंधित सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। रक्षा मंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। DAC ही यह तय करती है कि कौन से रक्षा उपकरण खरीदे जाएं और किन शर्तों पर।
फरवरी के दूसरे हफ्ते में होने वाली DAC की बैठक में राफेल डील पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें डील की कीमत, निर्माण योजना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और डिलीवरी शेड्यूल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर फैसला लिया जाएगा।
अगर DAC इस डील को मंजूरी दे देती है, तो यह कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) के पास अंतिम स्वीकृति के लिए जाएगी। CCS की मंजूरी के बाद ही औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर हो सकेंगे।
भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है। राफेल विमानों के अलावा दोनों देश पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों और अन्य रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं।
फ्रांस ने भारत को स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण करने में मदद की है। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करते हैं। समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष में भी सहयोग बढ़ रहा है।
राफेल डील इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। यह भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को भी गहरा करेगी।
India-France Deal: निष्कर्ष
114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण में मील का पत्थर साबित होगी। यह डील न केवल भारत की रक्षा क्षमता बढ़ाएगी बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा देगी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की आगामी यात्रा के दौरान इस डील पर महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है। DAC की बैठक और उसके बाद के निर्णय भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों की दिशा तय करेंगे।
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