India-EU Trade Deal: ट्रंप के टैरिफ से भारत को फायदा, यूरोपीय संघ ने कहा- ‘इंडिया बेहद जरूरी हो गया है’
गणतंत्र दिवस पर होगी EU-इंडिया समिट, तीन बड़े समझौतों की उम्मीद
India-EU Trade Deal: अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ की धमकियों के बीच भारत और यूरोपीय संघ के बीच रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। यूरोपीय यूनियन की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की हाई रिप्रेजेंटेटिव काजा कल्लास ने बुधवार को स्पष्ट संकेत दिए कि वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल के इस दौर में भारत यूरोप के लिए बेहद अहम साझेदार बन गया है।
भारत की यात्रा से कुछ दिन पहले यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए कल्लास ने कहा, “इस ज्यादा खतरनाक दुनिया में, हम दोनों एक साथ मिलकर काम करने से फायदा उठाएंगे। भारत यूरोप की आर्थिक मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता जा रहा है।” उन्होंने संकेत दिया कि यूरोपीय संघ नई दिल्ली के साथ व्यापार, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच संबंधों को लेकर एक शक्तिशाली नए एजेंडे पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
India-EU Trade Deal: गणतंत्र दिवस पर खास मेहमान बनेगा यूरोपीय संघ

26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार मुख्य अतिथि के तौर पर यूरोपीय संघ की शीर्ष नेतृत्व शामिल होगी। यह पहला मौका होगा जब किसी क्षेत्रीय संगठन को इस राष्ट्रीय पर्व पर विशेष सम्मान दिया जा रहा है। गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के बाद 27 जनवरी को 16वीं EU-INDIA समिट का आयोजन होना तय है।
इस समिट में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट भारत-यूरोप संबंधों में एक नया अध्याय खोल सकता है। दोनों पक्ष लंबे समय से रुके हुए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं।
काजा कल्लास ने बताई रणनीतिक साझेदारी की अहमियत
काजा कल्लास ने EU (India-EU Trade Deal) और भारत के बीच होने वाली इस मीटिंग को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत ऐसे समय में एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं जब नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था युद्धों, दबाव और आर्थिक बंटवारे के चलते भारी तनाव में है।
कल्लास ने आगे कहा, “आज के समय में दो बड़े लोकतंत्र किसी भी तरह हिचकिचाने का जोखिम नहीं उठा सकते। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 21वीं सदी के लिए एक प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था को बनाए रखें।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और यूरोप दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं और वैश्विक शांति तथा स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऐसे में दोनों की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय हितों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित होगी।
India-EU Trade Deal: तीन बड़े समझौतों पर हो सकते हैं हस्ताक्षर
आगामी समिट में भारत और यूरोपीय संघ के बीच तीन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ये समझौते व्यापार से लेकर रक्षा तक विभिन्न क्षेत्रों को कवर करेंगे।
व्यापार और निवेश समझौता: 27 जनवरी को यूरोपीय संघ-भारत व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी हो सकती है। कल्लास ने कहा कि इस ऐतिहासिक डील से कई बड़े बदलाव होने की उम्मीद है। यह समझौता बाजार खोलेगा, व्यापारिक रुकावटें हटाएगा और क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। यह डील दोनों पक्षों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभदायक साबित हो सकती है।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी: काजा कल्लास ने कहा कि वे अगले हफ्ते नई दिल्ली में EU-भारत सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करने का इंतजार कर रही हैं। यह समझौता समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और साइबर-रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करेगा। इसके साथ ही सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत की शुरुआत भी की जाएगी, जो दोनों पक्षों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने में मदद करेगा।
मोबिलिटी और माइग्रेशन समझौता ज्ञापन: दोनों पक्षों ने मोबिलिटी पर सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचे पर एक समझौता ज्ञापन (MOU) को अंतिम रूप देने की योजना बनाई है। उम्मीद है कि इससे श्रमिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी। यह समझौता भारतीय प्रतिभाओं को यूरोप में काम करने के अधिक अवसर प्रदान करेगा और यूरोपीय कंपनियों को कुशल भारतीय कार्यबल तक पहुंच देगा।
ट्रंप के टैरिफ से भारत को मिल रहा लाभ
डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल की स्थिति बन गई है। इस माहौल में यूरोपीय संघ (India-EU Trade Deal) भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है और भारत उनकी पहली पसंद बनकर उभरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के टैरिफ से बचने के लिए यूरोपीय कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाना चाह रही हैं। भारत का बड़ा बाजार, कुशल कार्यबल और लोकतांत्रिक व्यवस्था इसे एक आकर्षक विकल्प बनाती है। इसके अलावा भारत की डिजिटल इकोनॉमी और स्टार्टअप संस्कृति भी यूरोपीय निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
India-EU Trade Deal: भारत के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी
भारत के लिए भी यूरोपीय संघ (India-EU Trade Deal) के साथ मजबूत संबंध कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। यूरोप भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और एक प्रमुख निवेश स्रोत है। व्यापार समझौते से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग से भारत को आधुनिक तकनीक और खुफिया जानकारी तक पहुंच मिलेगी। यह भारत की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगा। मोबिलिटी समझौते से भारतीय पेशेवरों को यूरोप में काम करने के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे विदेशी मुद्रा की आमदनी बढ़ेगी।
इसके अलावा यूरोप के साथ साझेदारी भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करेगी। यह दिखाएगा कि भारत केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि एक वैश्विक खिलाड़ी है जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बना सकता है।
आगामी गणतंत्र दिवस समारोह और EU-इंडिया समिट भारत-यूरोप संबंधों में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन सकते हैं। दोनों पक्ष इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं।
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