India-EU Deal: भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता, पीएम मोदी ने की घोषणा
PM मोदी ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया, 2031 तक व्यापार 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है
India-EU Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मंगलवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA पर हस्ताक्षर हो गए हैं। 18 साल की लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इसकी घोषणा करते हुए इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताया है। यह समझौता भारत और यूरोप दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
India-EU Deal: प्रधानमंत्री ने की ऐतिहासिक घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों के साथ भारत की इस डील को पूरी दुनिया में मदर ऑफ ऑल डील कहा जा रहा है। यह दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को देश के लिए गौरव का विषय बताया।
रक्षा मंत्री ने की यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात
समझौते पर हस्ताक्षर से पहले यूरोपीय संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। रक्षा मंत्री ने यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और भारत-यूरोप संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। इस मुलाकात के बाद ही औपचारिक रूप से समझौते पर मुहर लगाई गई।
18 साल की लंबी प्रतीक्षा हुई समाप्त
यह समझौता 2007 से चली आ रही वार्ताओं का परिणाम है। पूरे 18 साल तक दोनों पक्षों ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान कई दौर की वार्ता हुई। कभी बातचीत धीमी पड़ी तो कभी नए मुद्दे सामने आए। लेकिन दोनों पक्षों ने धैर्य के साथ बातचीत जारी रखी। आखिरकार यह लंबी प्रतीक्षा समाप्त हुई और ऐतिहासिक समझौता संभव हो सका।
India-EU Deal: दो विशाल अर्थव्यवस्थाओं का मिलन

यह समझौता दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है। यूरोपीय संघ की जीडीपी 20 ट्रिलियन डॉलर है जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर है और यह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। यूरोपीय संघ में 45 करोड़ लोग रहते हैं जबकि भारत की आबादी 140 करोड़ है। इन दोनों विशाल बाजारों का एकीकरण व्यापार में नई संभावनाएं खोलेगा।
व्यापार में होगी अभूतपूर्व वृद्धि
विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते से 2031 तक भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह लगभग 4.68 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। भारत का निर्यात बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा। यूरोपीय कंपनियों को भी भारतीय बाजार में व्यापार करने के नए अवसर मिलेंगे। दोनों पक्षों के लिए यह जीत की स्थिति है।
लग्जरी कारों की कीमतों में आएगी भारी कमी
इस समझौते का सबसे बड़ा असर लग्जरी कारों की कीमतों पर दिखाई देगा। मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और पॉर्श जैसी महंगी कारों पर लगने वाला टैरिफ 110 प्रतिशत से घटकर 40 प्रतिशत हो जाएगा। 15000 यूरो यानी करीब 16.3 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाली कारों पर यह नई दर लागू होगी। इससे इन कारों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी और खरीदारों को राहत मिलेगी।
India-EU Deal: यूरोपीय उत्पाद होंगे किफायती
विमान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रसायन, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और धातु स्क्रैप जैसे उत्पाद भी सस्ते होंगे। यूरोप से आने वाली शराब की कीमतों में भी कमी आ सकती है। वस्त्र उद्योग को बड़ा फायदा मिलेगा। भारतीय कपड़े यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बिक सकेंगे। इससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सेवा क्षेत्र में खुलेंगे रोजगार के द्वार
भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करने के नए अवसर खुलेंगे। आईटी, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम और व्यापार जैसे सेवा क्षेत्रों में भारतीयों की मांग बढ़ेगी। युवाओं को विदेश में करियर बनाने का मौका मिलेगा। इससे भारत में कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। युवा पीढ़ी के लिए यह सुनहरा अवसर है।
दवा और चिकित्सा उपकरणों का लाभ
भारतीय दवा उद्योग इस समझौते से काफी लाभान्वित होगा। यूरोपीय बाजार में भारतीय दवाओं की पहुंच आसान होगी। साथ ही यूरोप से आधुनिक चिकित्सा उपकरण और दवाएं भारत में कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।
India-EU Deal: कृषि निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना
भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होगी। चाय, मसाले, चावल, फल और सब्जियां यूरोपीय बाजार में अधिक मात्रा में जा सकेंगी। किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषि आय में वृद्धि से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
छोटे और मध्यम उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
एमएसएमई यानी सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों को इस समझौते से विशेष लाभ होगा। छोटे व्यवसायी यूरोपीय बाजार में अपने उत्पाद बेच सकेंगे। निर्यात बढ़ने से इन उद्योगों का विस्तार होगा। नए रोजगार पैदा होंगे। देश की अर्थव्यवस्था में इनका योगदान बढ़ेगा।
तकनीकी सहयोग में वृद्धि
यूरोप से भारत को उन्नत तकनीक हस्तांतरण में मदद मिलेगी। नवीकरणीय ऊर्जा, विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। भारतीय कंपनियां यूरोपीय तकनीक का उपयोग कर अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार कर सकेंगी। अनुसंधान और विकास में भी साझेदारी होगी।
India-EU Deal: निवेश में होगी बढ़ोतरी
यूरोपीय कंपनियां भारत में अधिक निवेश करेंगी। विनिर्माण इकाइयां स्थापित होंगी। बुनियादी ढांचे के विकास में सहायता मिलेगी। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। नए उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पर्यावरण और जलवायु सहयोग
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। पर्यावरण संरक्षण की परियोजनाओं में साझेदारी होगी। यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
India-EU Deal: वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति मजबूत
यह समझौता वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। यूरोपीय संघ जैसे बड़े आर्थिक समूह के साथ साझेदारी से भारत की साख बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह देश के लिए कूटनीतिक जीत भी है।
आम नागरिकों को मिलेगा लाभ
इस समझौते का अंततः लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। विभिन्न उत्पाद सस्ते होंगे। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आर्थिक विकास तेज होगा। जीवन स्तर में सुधार होगा। यह समझौता देश की समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निष्कर्ष: भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता दोनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 18 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद यह समझौता साकार हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा है जो इसके महत्व को दर्शाता है। यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
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