पीडीएस घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन: कोलकाता और बर्धमान में छापेमारी, चुनावी माहौल गरम
कोलकाता और बर्धमान में 9 ठिकानों पर एक्शन; विधानसभा चुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल।
PDS Scam: पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े कथित बड़े घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता, बर्धमान और हाबरा समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में करीब नौ ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है, जिसका आधार 2020 की वह शिकायत है जिसमें गरीबों के हिस्से के सब्सिडी वाले गेहूं की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।
1. पीडीएस घोटाला क्या है और कैसे हुआ भ्रष्टाचार?
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का मुख्य उद्देश्य गरीबों और राशन कार्डधारकों को रियायती दरों पर अनाज उपलब्ध कराना है। इस घोटाले की कार्यप्रणाली को समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर गौर करें:
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अनाज की हेराफेरी: केंद्र द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से भेजे गए गेहूं और चावल को लाभार्थियों तक पहुँचाने के बजाय बिचौलियों और डीलरों की मदद से खुले बाजार में ऊँची कीमतों पर बेच दिया गया।
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पहचान छिपाना: जांच में पाया गया कि आरोपियों ने FCI और राज्य सरकार के चिन्ह वाले मूल बोरों को हटाकर या उन्हें पलटकर नए सिरे से भरा, ताकि सरकारी अनाज की पहचान छिपाई जा सके और उसे ‘वैध निजी स्टॉक’ के रूप में दिखाया जा सके।
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निर्यात का खेल: सब्सिडी वाला यह अनाज न केवल स्थानीय बाजार में बेचा गया, बल्कि इसे विदेशों में निर्यात कर बड़े पैमाने पर अवैध मुनाफा कमाया गया।
2. पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक पर शिकंजा
इस घोटाले के केंद्र में राज्य के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक का नाम प्रमुखता से आया है:
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गिरफ्तारी: ईडी ने 2023 में उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उनके कार्यकाल (2016-2021) के दौरान पूरी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।
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संपत्ति की कुर्की: जांच एजेंसी ने मल्लिक और उनके सहयोगियों से जुड़ी सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है।
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विदेशी मुद्रा का मामला: ईडी का दावा है कि घोटाले की राशि करीब 10,000 करोड़ रुपये हो सकती है, जिसका एक हिस्सा हवाला या विदेशी मुद्रा एक्सचेंज एजेंसियों के जरिए दुबई और अन्य देशों में भेजा गया।
3. शनिवार की छापेमारी और नए सुराग
शनिवार को हुई कार्रवाई विशेष रूप से आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) और निर्यातकों (Exporters) पर केंद्रित थी:
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छापेमारी के स्थल: कोलकाता, बर्धमान और हाबरा में निरंजन चंद्र साहा समेत कई बड़े व्यापारियों के ठिकानों की तलाशी ली गई।
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सबूत जुटाना: ईडी की टीमों ने डिजिटल उपकरण, बैंक खाते के दस्तावेज और अनाज के स्टॉक से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई गिरफ्तारियों से मिले सुरागों के आधार पर यह छापेमारी की गई है।
4. चुनावी संदर्भ: 2026 विधानसभा चुनाव पर असर
पश्चिम बंगाल में इस समय चुनावी बिगुल बजा हुआ है, जिससे यह कार्रवाई और भी संवेदनशील हो गई है:
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मतदान का चरण: पहले चरण का मतदान (152 सीटें) 23 अप्रैल को हो चुका है। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जिसके ठीक पहले यह एक्शन हुआ है।
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राजनीतिक घमासान: सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे केंद्र सरकार की “चुनावी साजिश” और एजेंसियों का दुरुपयोग बताया है। वहीं, विपक्षी भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा प्रहार बता रही है।
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मतदाताओं पर प्रभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में पीडीएस राशन एक बड़ा मुद्दा है। राशन की चोरी का आरोप मतदाताओं के मन में सरकार के प्रति असंतोष पैदा कर सकता है।
5. व्यवस्था की कमजोरी और भविष्य के सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों लोगों को अनाज देने वाली इस योजना में पारदर्शिता की भारी कमी रही है:
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निगरानी का अभाव: आपूर्ति श्रृंखला में बिचौलियों की मिलीभगत और पर्याप्त निगरानी न होने से लीकेज की समस्या बढ़ी।
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तकनीकी समाधान: आधार लिंक्ड वितरण और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए ही भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष: सच की तलाश जारी
पीडीएस घोटाले पर ईडी की इस ताजा कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में खलबली मचा दी है। चुनावी युद्ध के बीच भ्रष्टाचार के ये मुद्दे चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। जनता को उम्मीद है कि इस जांच के जरिए गरीबों का हक मारने वालों को सजा मिलेगी और व्यवस्था में सुधार होगा।
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