एप्सटीन फाइल्स विवाद मामले में हरदीप सिंह पुरी का करारा जवाब कहा ‘कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला, आइलैंड से कोई लेना-देना नहीं’

राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री ने दिया स्पष्टीकरण, 2014 का ईमेल डिजिटल इंडिया के बारे में था

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Epstein files: एप्सटीन फाइल्स को लेकर सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को करारा जवाब दिया। राहुल गांधी ने संसद में आरोप लगाया था कि विवादास्पद एप्सटीन फाइल्स में भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी नाम शामिल है। इन आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी जेफ्री एप्सटीन से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं की और न ही उनका एप्सटीन के विवादित आइलैंड से कोई लेना-देना है।

पुरी ने बताया कि 2009 में जब वे विदेश सेवा से रिटायरमेंट के बाद इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में सेक्रेटरी जनरल के पद पर कार्यरत थे, तब 8 वर्षों में उनकी केवल तीन बार संस्थागत मुलाकातें हुईं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2014 में लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन को भेजा गया उनका ईमेल डिजिटल इंडिया की प्रगति के बारे में था, जिसे CC में एप्सटीन को भी भेजा गया था। मंत्री ने राहुल गांधी पर आधारहीन आरोप लगाने की आदत होने का आरोप लगाने के साथ ही कहा कि वे संसद में बयान देकर भाग जाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे विवाद की सच्चाई।

Epstein files क्या है?

जेफ्री एप्सटीन एक अमेरिकी अरबपति था जो नाबालिग लड़कियों की तस्करी और यौन शोषण के मामले में 2019 में गिरफ्तार किया गया था। जेल में ही संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई थी।

एप्सटीन फाइल्स में दुनिया भर के कई प्रभावशाली लोगों, राजनेताओं, व्यापारियों और हस्तियों के नाम शामिल हैं जिनका किसी न किसी रूप में एप्सटीन से संपर्क था। हाल ही में लाखों ईमेल और दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं जिनमें विभिन्न लोगों के एप्सटीन के साथ संपर्क का विवरण है। यह जरूरी नहीं कि सभी नाम अवैध गतिविधियों से जुड़े हों।

कई लोगों ने एप्सटीन से व्यावसायिक, परोपकारी या सामाजिक संदर्भ में मुलाकात की थी, जो उस समय कानूनी रूप से स्वीकार्य थे। एप्सटीन की विवादास्पद गतिविधियां सार्वजनिक होने से पहले कई प्रतिष्ठित लोग उससे जुड़े थे, जो बाद में विवाद का कारण बने।

Epstein files: राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए थे?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में भाषण देते हुए एप्सटीन फाइल्स का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इन फाइल्स में भारत सरकार के एक केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी शामिल है।

राहुल गांधी ने कहा कि लगभग 3 मिलियन ईमेल सामने आए हैं जिनमें विभिन्न लोगों के एप्सटीन के साथ संबंधों का विवरण है। कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए उपयोग करने की कोशिश की।

हालांकि, राहुल गांधी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हरदीप पुरी पर वास्तव में क्या आरोप है या उनका एप्सटीन से किस तरह का संबंध था। उन्होंने बस नाम लेकर आरोप लगाए और फिर अन्य मुद्दों पर बात करने लगे, जैसा कि पुरी ने बाद में आरोप लगाया।

हरदीप सिंह पुरी का विस्तृत स्पष्टीकरण

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 2009 में जब वे विदेश सेवा से रिटायर हुए, तब उन्होंने इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) ज्वाइन किया था।

IPI एक वैश्विक संगठन है जो शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर काम करता है। पुरी उस संस्था के सेक्रेटरी जनरल थे। उन्होंने बताया कि उनके IPI में बॉस एप्सटीन को जानते थे और संस्थागत संदर्भ में कुछ बैठकें हुई थीं।

पुरी ने स्पष्ट किया, “8 वर्षों में मेरी एप्सटीन से केवल तीन बार मुलाकात हुई और वह भी संस्थागत संदर्भ में, व्यक्तिगत रूप से नहीं।” उन्होंने जोर देकर कहा, “एप्सटीन से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला। मैं खुद व्यक्तिगत रूप से एप्सटीन से नहीं मिला।” यह दोहराना इस बात को स्पष्ट करने के लिए था कि उनका कोई निजी संबंध नहीं था।

सबसे महत्वपूर्ण, पुरी ने कहा, “मेरा एप्सटीन आइलैंड से कोई लेना-देना नहीं है।” एप्सटीन का निजी द्वीप उसकी अवैध गतिविधियों का केंद्र था।

Epstein files: 2014 के ईमेल की सच्चाई

हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से बताया कि 13 नवंबर 2014 का एक ईमेल है जो विवाद का विषय बना। यह ईमेल उन्होंने लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन को भेजा था। पुरी ने स्पष्ट किया, “मैंने एक निजी व्यक्ति के तौर पर लिंक्डइन के फाउंडर को ईमेल किया था। इसमें कहा था कि भारत में डिजिटलाइजेशन बहुत तेजी से बढ़ रहा है।”

ईमेल में उन्होंने सुझाव दिया था कि रीड हॉफमैन को खुद भारत जाकर देखना चाहिए कि कैसे डिजिटल क्रांति हो रही है। उन्होंने कहा कि लिंक्डइन के फॉलोवर भारत में बढ़ाए जा सकते हैं। पुरी ने कहा, “मैं डिजिटल इंडिया की बात कर रहा था।” यह 2014 था जब मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया अभियान शुरू किया था।

इस ईमेल को CC (कार्बन कॉपी) में एप्सटीन को भी भेजा गया था, क्योंकि संभवतः वह भी उस परिचर्चा का हिस्सा था या IPI से जुड़ा था। इसके जवाब में एप्सटीन ने रीड हॉफमैन को एक ईमेल भेजा जिसमें पुरी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की। एप्सटीन ने लिखा कि पुरी “Two Face Person” हैं और एक नस्लवादी टिप्पणी भी की।

पुरी ने कहा, “आरोप लगाने से पहले एक बार ईमेल पढ़ तो लेते।” उनका कहना था कि ईमेल की असली सामग्री देखी जाए तो स्पष्ट हो जाता है कि यह डिजिटल इंडिया के बारे में था।

राहुल गांधी पर पलटवार

हरदीप सिंह पुरी ने अपने जवाब में राहुल गांधी पर भी कई तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा, “एक हमारे युवा नेता हैं जिन्हें आधारहीन आरोप लगाने की आदत है।” पुरी ने व्यंग्यात्मक तरीके से तुलना की, “एक हमारे नेता हैं (पीएम मोदी) जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को 10वें पायदान से चौथे पायदान पर लाया और एक दूसरे नेता हैं जो कभी-कभार देश में आते हैं।”

उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया, “ये वही नेता हैं जो संसद में अपनी बात करते हैं और भाग जाते हैं।” इसका संदर्भ राहुल के संसद में भाषण देकर चले जाने से था। पुरी ने याद दिलाया, “ये वही नेता हैं जो मनमोहन सिंह की सरकार के समय अध्यादेश को फाड़ देते हैं।” 2013 में राहुल ने सार्वजनिक रूप से सरकारी अध्यादेश की आलोचना की थी।

उन्होंने राहुल की अर्थव्यवस्था संबंधी टिप्पणियों पर भी व्यंग्य किया, “ये नेता कहते हैं कि हमारी इकॉनमी डेड इकॉनमी है। डिक्शनरी की मीनिंग नहीं पता तो कम से कम कॉमन सेंस वाली मीनिंग तो समझ लो।”

Epstein files: राजनीतिक निहितार्थ

यह विवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे टकराव का हिस्सा है। राहुल गांधी लगातार सरकार पर विभिन्न मुद्दों पर हमला कर रहे हैं। एप्सटीन फाइल्स जैसे अंतरराष्ट्रीय विवादास्पद मुद्दे को उठाकर विपक्ष सरकार को शर्मिंदा करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, हरदीप पुरी का विस्तृत स्पष्टीकरण और दस्तावेजी साक्ष्य इस आरोप को कमजोर करते हैं। यह मामला यह भी दिखाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाएं भारतीय राजनीति में मुद्दे बनाई जा रही हैं।

मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया

इस विवाद पर मीडिया में व्यापक चर्चा हुई है। कुछ मीडिया ने राहुल गांधी के आरोपों को प्रमुखता दी, जबकि अन्य ने पुरी के स्पष्टीकरण को प्रमुखता दी। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं का बचाव किया। भाजपा समर्थकों ने राहुल पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस समर्थकों ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए और पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। तटस्थ विश्लेषकों ने कहा कि केवल नाम होने से कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। एप्सटीन से संपर्क होना और उसकी अवैध गतिविधियों में भागीदारी बिल्कुल अलग बातें हैं।

Epstein files: निष्कर्ष

एप्सटीन फाइल्स विवाद में हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों का विस्तृत और दस्तावेजी जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका एप्सटीन से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं था और 2014 का ईमेल डिजिटल इंडिया के बारे में था। यह विवाद भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप की संस्कृति को दर्शाता है। तथ्यों और संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है।

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