ईरान जंग का कहर! सेंसेक्स 537 अंक धड़ाम, निवेशकों के डूबे करोड़ों, रुपया भी कमजोर निफ्टी 24,500 के नीचे फिसला, वॉल स्ट्रीट पर भी भारी बिकवाली
मध्य पूर्व युद्ध का असर, सेंसेक्स 79,478 पर, निफ्टी 24,612 के करीब, रुपया 91.65 पर कमजोर, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर पार
Iran war market impact: मध्य पूर्व में जारी युद्ध की आग अब सीधे भारतीय शेयर बाजार तक पहुंच गई है। शुक्रवार की सुबह जब बाजार खुला तो निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बीएसई सेंसेक्स 537 अंक से ज्यादा टूटकर 79,478 के स्तर पर आ गया जबकि एनएसई का निफ्टी भी 153 अंक से अधिक गिरकर 24,612 के करीब पहुंच गया। इस गिरावट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब दुनिया में अशांति होती है तो उसकी सबसे पहली और सबसे तगड़ी चोट शेयर बाजार पर ही पड़ती है।
Iran war market impact: किन शेयरों ने किया निराश
शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन सबसे आगे रहा। विमानन कंपनियां इस युद्ध से दोहरी मार झेल रही हैं क्योंकि एक तरफ हवाई रास्ते बाधित हो रहे हैं और दूसरी तरफ जेट फ्यूल की लागत बढ़ रही है। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलएंडटी के शेयर भी लाल निशान पर कारोबार करते दिखे। बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि ये क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
Iran war market impact: इन शेयरों ने दिखाई ताकत
गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने जरूर उम्मीद की किरण दिखाई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL के शेयर में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। युद्ध के समय रक्षा क्षेत्र की कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ना स्वाभाविक है क्योंकि वैश्विक तनाव के समय दुनिया भर की सरकारें अपने रक्षा बजट बढ़ाती हैं। आईटी सेक्टर की बात करें तो इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस और विप्रो के शेयरों में भी खरीदारी देखी गई। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आईटी कंपनियां अपनी कमाई मुख्यतः डॉलर में करती हैं।
Iran war market impact: रुपया भी नहीं बचा इस तूफान से
शेयर बाजार की गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 5 पैसे की कमजोरी के साथ 91.65 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। गुरुवार के पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 91.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इससे ठीक एक दिन पहले 5 मार्च को रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर को छूकर वापस आया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 84.46 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 85 फीसदी आयात करता है इसलिए कच्चा तेल सीधे व्यापार घाटे पर दबाव बनाता है।
Iran war market impact: वॉल स्ट्रीट पर भी मचा हाहाकार
भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट पर भी गुरुवार को जमकर बिकवाली हुई। अमेरिका का प्रमुख सूचकांक S&P 500 करीब 0.6 फीसदी गिर गया और इस साल अब तक जो मामूली बढ़त हासिल हुई थी वह भी स्वाहा हो गई। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार के दौरान एक समय 1,100 अंक से भी ज्यादा टूट गया था। हालांकि बाजार बंद होने तक यह कुछ संभला लेकिन फिर भी 784 अंक यानी 1.6 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट भी 0.3 फीसदी नीचे आया।
Iran war market impact: क्यों बढ़ रही है तेल की कीमत और क्या होगा असर
ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की तेल उत्पादन और निर्यात क्षमता पर सीधा असर पड़ने की आशंका बन गई है। विशेषज्ञों की चिंता यह है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं तो इसके दूरगामी नतीजे होंगे। घरों का खर्च बढ़ेगा, महंगाई पर दबाव आएगा, केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव पड़ेगा और कुल मिलाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। भारत के संदर्भ में यह और भी चिंताजनक है क्योंकि महंगाई पहले से ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
read more here