प्रतिबंधों की परवाह नहीं! बिटकॉइन के जरिए दुनिया को चकमा दे रहा ईरान, खुला राज IRGC से जुड़े वॉलेट से 3 अरब डॉलर का ट्रांजैक्शन, रूस और उत्तर कोरिया भी अपना रहे यही तरीका

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान बिटकॉइन माइनिंग से अरबों डॉलर लेनदेन, रूस-उत्तर कोरिया भी अपना रहे यही रास्ता

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Iran Bitcoin sanctions: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के बारे में एक ऐसा सच सामने आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान ने एक ऐसा रास्ता खोज निकाला है जिससे वह पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अरबों डॉलर का लेनदेन कर रहा है। यह रास्ता है बिटकॉइन माइनिंग का जिसने ईरान को एक ऐसी वित्तीय शक्ति दे दी है जिस पर अमेरिकी ट्रेजरी की पकड़ बेहद मुश्किल है।

Iran Bitcoin sanctions: 2019 में रखी गई नींव, अब बना हथियार

ईरान ने वर्ष 2019 में बिटकॉइन माइनिंग को आधिकारिक और कानूनी मान्यता दी थी। उस समय इसे एक आर्थिक प्रयोग और देश की ऊर्जा संपदा के बेहतर उपयोग के तरीके के रूप में पेश किया गया था। ईरान के पास प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं जिनकी वजह से बिजली उत्पादन बेहद सस्ता पड़ता है। इसी सस्ती बिजली का फायदा उठाकर ईरान में बड़े पैमाने पर बिटकॉइन माइनिंग शुरू हुई। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों और विश्लेषकों का कहना है कि यह धीरे-धीरे एक बड़े प्रतिबंध-विरोधी भुगतान नेटवर्क में तब्दील हो गया।

Iran Bitcoin sanctions: कैसे काम करता है यह पूरा तंत्र

इस तंत्र को समझना बेहद जरूरी है। माइनिंग प्रक्रिया के जरिए तैयार किए गए बिटकॉइन को सीधे सरकारी नियंत्रण वाले डिजिटल वॉलेट में स्थानांतरित किया जाता है। इसके बाद इन्हीं बिटकॉइन का इस्तेमाल विदेशों में भुगतान के लिए किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में तीन बड़ी बाधाएं नहीं आतीं जो आमतौर पर ईरान के सामने रहती हैं। पहली बात, इसमें SWIFT ट्रांसफर की कोई जरूरत नहीं होती। दूसरी बात, इसमें किसी मध्यस्थ बैंक की भूमिका नहीं होती। तीसरी और सबसे अहम बात यह है कि इस पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की नजर रख पाना बेहद मुश्किल है।

Iran Bitcoin sanctions: प्रति बिटकॉइन 71,700 डॉलर का मार्जिन

अमेरिका के जाने-माने बिटकॉइन रणनीतिकार जेक पर्सी के अनुसार ईरान में एक बिटकॉइन माइन करने की लागत केवल करीब 1,300 डॉलर आती है। इसका कारण है ईरान में उपलब्ध बेहद सस्ती ऊर्जा। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बिटकॉइन की कीमत करीब 73,000 डॉलर के आसपास है। इसका सीधा मतलब है कि प्रत्येक बिटकॉइन पर ईरान को करीब 71,700 डॉलर का संभावित लाभ मिलता है। इस विशाल मार्जिन का इस्तेमाल ईरान अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए कर सकता है और कर भी रहा है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसे रोकना पारंपरिक प्रतिबंध तंत्र के बस की बात नहीं है।

Iran Bitcoin sanctions: 7.78 अरब डॉलर का क्रिप्टो इकोसिस्टम

ब्लॉकचेन विश्लेषण की अग्रणी कंपनी Chainalysis के ताजा अनुमान के अनुसार 2025 तक ईरान का कुल क्रिप्टो इकोसिस्टम करीब 7.78 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह एक बेहद बड़ी रकम है जो यह दर्शाती है कि ईरान कितने बड़े पैमाने पर क्रिप्टो का इस्तेमाल कर रहा है। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि 2025 के अंत में ईरान में आने वाली क्रिप्टो फंडिंग का आधे से ज्यादा हिस्सा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े डिजिटल वॉलेट पतों से संबंधित था। अकेले एक साल में इन पतों के माध्यम से 3 अरब डॉलर से अधिक का लेनदेन हुआ।

Iran Bitcoin sanctions: हमले से पहले ही मिल गए संकेत

जब 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले शुरू हुए तब ब्लॉकचेन विश्लेषकों ने पारंपरिक खुफिया स्रोतों से भी पहले कुछ असामान्य वित्तीय हलचलें नोट कर ली थीं। ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Nobitex से अचानक बड़ी मात्रा में धन निकाला जाने लगा। 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच करीब 10.3 मिलियन डॉलर एक्सचेंज से बाहर ट्रांसफर हुए। इस दौरान प्रति घंटे का ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2026 के सामान्य औसत से 873 फीसदी अधिक हो गया। इसका मतलब है कि हमले से पहले ही कुछ लोगों को खतरे की भनक लग गई थी।

Iran Bitcoin sanctions: रूस और उत्तर कोरिया भी अपना रहे यही राह

यह रास्ता केवल ईरान ने ही नहीं अपनाया है। विश्लेषण रिपोर्टों के अनुसार 2025 में प्रतिबंधित संस्थाओं से जुड़े क्रिप्टो पतों पर करीब 154 अरब डॉलर का लेनदेन हुआ। रूस ने पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए एक स्टेबलकॉइन के माध्यम से करीब 93 अरब डॉलर का लेनदेन किया। उत्तर कोरिया के साइबर हमलावरों ने एक बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज पर हमला करके 1.5 अरब डॉलर की चोरी की और इस राशि को सीधे अपने हथियार कार्यक्रम में झोंक दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर आधारित वैश्विक प्रतिबंध प्रणाली के सामने ब्लॉकचेन एक नई और बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

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