जगतियाल में इंसानियत शर्मसार, किडनी फेल पति को पत्नी ने श्मशान में छोड़ा, स्थानीय लोगों ने बचाई जान, घटना ने समाज और रिश्तों पर खड़े किए गंभीर सवाल

किडनी फेल पति को पत्नी ने छोड़ा, लोगों ने बचाई जान

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Kidney failure patient: जगतियाल शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे पढ़कर आंखें नम हो जाती हैं। श्रीधर नाम के एक व्यक्ति की दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी थी। वे मौत और ज़िंदगी के बीच उस कगार पर खड़े थे, जहां हर सांस एक संघर्ष साबित हो रही थी। ऐसी हालत में जिस इंसान का हाथ थामे रहना सबसे ज़रूरी था, वही पत्नी उन्हें श्मशान घाट पर अकेला छोड़कर चली गई।

Kidney failure patient: श्मशान में रोगी को छोड़ना

20 मार्च 2026 को जगतियाल में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई, जिसने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रीधर नाम के एक व्यक्ति को उनकी पत्नी श्मशान घाट में छोड़कर चली गई जब उनकी दोनों किडनियां खराब थीं। स्थानीय लोगों ने इस गंभीर हालत में श्रीधर को श्मशान में पाया और बिना समय गंवाए उन्हें अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। इन अनजान लोगों ने वह किया जो अपनों ने नहीं किया और उनकी जान बचाई।

Kidney failure patient: बीमारी और विश्वासघात की कहानी

श्रीधर पिछले कई महीनों से दोनों किडनियों की बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज चल रहा था और वे अक्सर अस्पताल आते-जाते रहते थे। हालत इतनी खराब हो गई कि वे चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गए थे। परिवार के कुछ करीबी सूत्रों के अनुसार, श्रीधर की पत्नी ने कई महीनों से उनका हालचाल लेना बंद कर दिया था। वे दवाएं भी नहीं लाती थीं और न ही अस्पताल ले जाकर उनका इलाज करवाती थीं। बीमारी का बोझ और देखभाल की कमी दोनों ने मिलकर उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था।

Kidney failure patient: समाज में हलचल

इस घटना से जगतियाल शहर में सनसनी फैल गई है। लोग इस बात पर हैरान हैं कि एक पत्नी अपने बीमार पति को श्मशान घाट में कैसे छोड़ सकती है। स्थानीय लोगों ने तुरंत श्रीधर को अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया और उनकी जान बचाई। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। समाज के लोग भी इस घटना की निंदा कर रहे हैं और उस पत्नी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Kidney failure patient: सामाजिक और मानसिक पहलू

समाजशास्त्री डॉ. राम कुमार शर्मा कहते हैं, “यह घटना न केवल एक अपराध है, बल्कि समाज की गिरती हुई इंसानियत का भी प्रमाण है। जब अपनों का साथ छोड़ दिया जाता है, तो समाज का कर्तव्य बनता है कि वह उस बेबस की मदद करे।” स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. कविता सिंह के अनुसार, “किडनी फेल होने वाले रोगियों को निरंतर देखभाल और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। जब रोगी बिस्तर से उठने में असमर्थ हो, तो उसे अकेला छोड़ना जानलेवा हो सकता है।”

Kidney failure patient: कानूनी कार्रवाई और समाज सेवा

पुलिस ने श्रीधर की पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पत्नी ने पति को जानबूझकर श्मशान में छोड़ा था। समाज सेवा संगठनों ने भी श्रीधर की मदद के लिए आगे आने की घोषणा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो लोग श्रीधर को अस्पताल ले गए, वे आज भी उनके साथ खड़े हैं।

निष्कर्ष

यह घटना समाज के लिए एक सबक है कि अपनों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। श्रीधर को बचाने वाले स्थानीय लोग आज समाज के लिए प्रेरणा हैं। यह मामला समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि हम कितनी जल्दी अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं।

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