Himanta Biswa Sarma: हिमंत सरमा की राहुल गांधी को चुनौती, बोले- कांग्रेस सरकारें दें इस्तीफा तो बैलेट पेपर से लड़ेंगे चुनाव

असम CM ने SIR और वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस को घेरा, तीन राज्यों की सरकारों से मांगा इस्तीफा

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Himanta Biswa Sarma: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है। इसी पृष्ठभूमि में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को खुली चुनौती दी है। सरमा ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह बैलेट पेपर के जरिए चुनाव मैदान में उतरने को पूरी तरह तैयार हैं, बशर्ते कांग्रेस के नेतृत्व वाली संबंधित राज्य सरकारें पहले अपने पदों से इस्तीफा दें। उन्होंने कर्नाटक, तेलंगाना और केरल की सरकारों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि यदि विपक्ष के दावों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव प्रक्रिया संदिग्ध थी, तो इन्हीं प्रक्रियाओं के तहत बनी कांग्रेस सरकारें भी नैतिक आधार खो चुकी हैं।

Himanta Biswa Sarma: गुवाहाटी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा प्रहार

गुवाहाटी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ छेड़े गए अभियान पर कड़े सवाल खड़े किए। सरमा ने कहा कि राहुल गांधी जिस तरह संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें सबसे पहले अपने रुख में एकरूपता लानी चाहिए।

सरमा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चयन विपक्ष के मुताबिक कथित गड़बड़ी से हुआ है, तो उसी चुनावी प्रक्रिया के जरिए राहुल गांधी भी सांसद और नेता प्रतिपक्ष बने हैं, इसलिए उन्हें भी पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने चुनौती दी कि कांग्रेस पहले केरल, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारों का इस्तीफा दिलवाए और यह घोषणा करे कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का पूर्ण बहिष्कार करेगी।

‘हर पांच साल में जरूरी है SIR’, घुसपैठ और जनसांख्यिकी पर जताई चिंता

असम के मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पुरजोर बचाव करते हुए इसे देश की लोकतांत्रिक सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकीय संतुलन तेजी से बदल रहा है।

सरमा ने मांग उठाई कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अक्षुण्ण रखने के लिए हर पांच साल में अनिवार्य रूप से एसआईआर कराया जाना चाहिए ताकि मतदाता सूची से अवांछित और अवैध प्रविष्टियों को हटाया जा सके। उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को जनसमर्थन विहीन बताते हुए आरोप लगाया कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की सोची-समझी कोशिश है।

विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन का मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल

असम सीएम का यह आक्रामक बयान ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से कथित तौर पर लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने और एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और शीर्ष अदालत में याचिका दायर की।

विपक्ष का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि मतदाता सूची की निष्पक्ष ऑडिट कराई जाए और हटाए गए वास्तविक मतदाताओं के नाम तुरंत बहाल किए जाएं।

Himanta Biswa Sarma: ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की पुरानी बहस फिर हुई तेज

हिमंत बिस्वा सरमा के इस ताजा बयान ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में ईवीएम बनाम मतपत्र की बहस को नए सिरे से भड़का दिया है। जहां विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली की विश्वसनीयता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाकर चुनावी पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का पुराना राजनीतिक पैंतरा करार दे रही है।

चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के नवीनीकरण और मतदान के तौर-तरीकों को लेकर यह सियासी टकराव और अधिक तीखा रूप ले सकता है।

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