Heart Attack: हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 2-3 घंटे क्यों होते हैं बेहद अहम? एंजियोप्लास्टी में देरी पड़ सकती है भारी

हार्ट अटैक में समय पर इलाज जरूरी, जानें एंजियोप्लास्टी, लक्षण और बचाव के उपाय

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Heart Attack: हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें मरीज की जान और भविष्य की सेहत सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितनी जल्दी सही इलाज मिल पाता है। भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर लोग सीने में हल्का भारीपन, बेचैनी, घबराहट या सांस की तकलीफ को पेट की गैस, एसिडिटी या सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा साबित होती है। चिकित्सा विज्ञान में स्पष्ट माना गया है कि हार्ट अटैक आने के बाद के शुरुआती दो से तीन घंटे गोल्डन पीरियड के समान होते हैं। इस निर्धारित समय सीमा के भीतर अगर मरीज को एंजियोप्लास्टी जैसी जरूरी प्रक्रिया मिल जाए, तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी क्षति से बचाया जा सकता है।

Heart Attack: हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 2-3 घंटे क्यों माने जाते हैं बेहद महत्वपूर्ण?

नई दिल्ली स्थित जीबी पंत अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता के अनुसार, एक्यूट हार्ट अटैक की स्थिति में मरीज को बिना एक पल गंवाए ऐसे कॉर्डियक सेंटर ले जाना चाहिए जहां 24 घंटे प्राइमरी एंजियोप्लास्टी और कैथ लैब की सुविधा मौजूद हो। हार्ट अटैक उस स्थिति में होता है जब हृदय की मांसपेशियों को शुद्ध रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी में खून का थक्का जमने से रक्त प्रवाह अचानक पूरी तरह रुक जाता है। जैसे ही रक्त प्रवाह रुकता है, दिल की मांसपेशियां ऑक्सीजन के अभाव में मृत होने लगती हैं।

शुरुआती दो से तीन घंटों के भीतर यदि इस बंद नस को चिकित्सकीय प्रक्रिया से खोल दिया जाए, तो दिल की अधिकांश मांसपेशियों को नष्ट होने से बचा लिया जाता है। समय बीतने के साथ-साथ हृदय के ऊतकों को होने वाला नुकसान स्थायी हो जाता है, जिससे भविष्य में हार्ट फेलियर का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि, यदि तीन घंटे से अधिक का समय भी बीत चुका हो, तब भी तत्काल अस्पताल पहुंचना अनिवार्य है क्योंकि देरी के बावजूद चिकित्सा हस्तक्षेप से जीवन रक्षा संभव होती है।

एंजियोप्लास्टी क्या है और यह हृदय को कैसे बचाती है?

एंजियोप्लास्टी एक ऐसी मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य हृदय की अवरुद्ध या अत्यधिक संकरी हो चुकी धमनियों में सामान्य रक्त प्रवाह को तुरंत बहाल करना होता है। हार्ट अटैक के आपातकालीन मामलों में इसे प्राइमरी एंजियोप्लास्टी कहा जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की कलाई या जांघ की रक्त वाहिका के माध्यम से एक बेहद महीन कैथेटर ट्यूब को हृदय की प्रभावित कोरोनरी धमनी तक पहुंचाते हैं। इसके बाद एक सूक्ष्म बैलून को फुलाकर जमी हुई रुकावट और थक्के को दबाया जाता है तथा नस को दोबारा सिकुड़ने से रोकने के लिए वहां एक स्थायी मैटेलिक या ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट स्थापित कर दिया जाता है। स्टेंट लगते ही रक्त का बहाव सामान्य हो जाता है और हृदय की धड़कन सुरक्षित दायरे में लौट आती है।

सीने के दर्द को गैस समझने की भूल न करें: प्रमुख लक्षण

हार्ट अटैक के लक्षण केवल फिल्मों की तरह अचानक सीने को पकड़कर गिर पड़ने तक सीमित नहीं होते। कई मामलों में इसके लक्षण धीमे और भ्रमित करने वाले होते हैं। सीने के बीच में या बाईं तरफ भारी दबाव, निचोड़न जैसा दर्द, सांस लेने में अचानक कठिनाई, बिना किसी परिश्रम के ठंडा पसीना आना, चक्कर आना और बेचैनी इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई बार यह दर्द जबड़े, गर्दन, पीठ, कंधों या बाएं हाथ तक फैलता महसूस होता है।

विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और अनियंत्रित डायबिटीज के मरीजों में साइलेंट हार्ट अटैक या बिना तेज दर्द वाले लक्षण देखे जाते हैं, जहां केवल अत्यधिक कमजोरी, अपच या उल्टी जैसा महसूस होता है। लोग अक्सर इसे घरेलू काढ़ा या एंटासिड सिरप पीकर दबाने की कोशिश करते हैं, जिससे बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है। किसी भी असामान्य बेचैनी को बिना ईसीजी (ECG) कराए अनदेखा नहीं करना चाहिए।

क्या हर मरीज को तुरंत एंजियोप्लास्टी या सर्जरी की आवश्यकता होती है?

हार्ट अटैक के हर मामले में एक ही तरह का उपचार लागू नहीं होता। प्राथमिक उपचार के तहत रक्त को पतला करने वाली दवाएं (थ्रॉम्बोलाइटिक्स) और जीवन रक्षक इंजेक्शन दिए जाते हैं। एंजियोप्लास्टी का फैसला मरीज की कोरोनरी एंजियोग्राफी रिपोर्ट, ब्लॉकेज के प्रतिशत और उसकी शारीरिक स्थिरता के आधार पर लिया जाता है।

यदि किसी मरीज की केवल एक या दो नसों में गंभीर ब्लॉकेज है, तो एंजियोप्लास्टी सबसे कारगर साबित होती है। लेकिन यदि मुख्य धमनी (लेफ्ट मेन आर्टरी) गंभीर रूप से प्रभावित हो या तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में जटिल रुकावटें हों, तो हृदय रोग विशेषज्ञ कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग यानी बाईपास सर्जरी की सलाह देते हैं। जिन मरीजों में ब्लॉकेज बहुत मामूली या गैर-महत्वपूर्ण होता है, उन्हें गहन चिकित्सकीय निगरानी और दवाओं के जरिए स्थिर किया जाता है।

Heart Attack: स्वस्थ हृदय के लिए जरूरी सावधानियां और जीवनशैली के नियम

हार्ट अटैक जैसी अचानक आने वाली विपदा से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। चालीस वर्ष की आयु के बाद या पारिवारिक इतिहास होने पर रक्तचाप, फास्टिंग ब्लड शुगर, एचबीए1सी (HbA1c) और लिपिड प्रोफाइल की सालाना जांच जरूर करानी चाहिए ताकि बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता चल सके।

जीवनशैली में सुधार के तहत दैनिक आहार में अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों, रिफाइंड तेल और अत्यधिक नमक से परहेज करना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम तीस से पैंतालीस मिनट का मध्यम व्यायाम जैसे तेज चलना या योग दिल की धमनियों को लचीला बनाए रखता है। इसके साथ ही धूम्रपान, तंबाकू और अत्यधिक मानसिक तनाव से पूरी तरह दूरी बनाकर तथा कम से कम सात से आठ घंटे की नियमित नींद लेकर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक न्यूनतम किया जा सकता है।

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