Expired sunscreen: सनस्क्रीन एक्सपायर्ड हो गई है? डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताए 4 आसान संकेत, इस्तेमाल से पहले जरूर चेक करें

रंग, गंध और टेक्सचर में बदलाव दिखे तो तुरंत बदलें सनस्क्रीन, त्वचा को रखें सुरक्षित

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Expired sunscreen: गर्मी हो या सर्दी, धूप की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन आज हर किसी की दैनिक स्किनकेयर दिनचर्या का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी पसंदीदा सनस्क्रीन भी समय के साथ अपनी वास्तविक प्रभावशीलता खो सकती है। बाजार से खरीदे गए प्रोडक्ट पर सिर्फ एक्सपायरी डेट देखना ही काफी नहीं होता है, क्योंकि कई बार गलत रखरखाव के कारण यह उत्पाद अपनी तय तारीख से पहले ही खराब हो जाता है। मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. निरुपमा परवंदा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इस गंभीर मुद्दे पर रोशनी डालते हुए बताया है कि सनस्क्रीन के भीतर मौजूद यूवी प्रोटेक्शन फॉर्मूला कमजोर होने पर आपकी त्वचा को भारी नुकसान पहुंच सकता है। एक्सपायर्ड सनस्क्रीन का लगातार इस्तेमाल करने से त्वचा पर रैशेज, गंभीर इरिटेशन या लंबे समय में प्रीमैच्योर एजिंग (समय से पहले बुढ़ापा) का खतरा काफी बढ़ जाता है, इसलिए हर यूजर को यह जानना बेहद जरूरी है कि कब अपनी सनस्क्रीन को बदलकर नई बोतल खरीद लेनी चाहिए।

सनस्क्रीन क्यों एक्सपायर होती है, इसका वैज्ञानिक महत्व और कमजोर एसपीएफ (SPF) का असर

सनस्क्रीन में मौजूद मुख्य केमिकल या मिनरल यूवी फिल्टर्स समय के साथ हवा के संपर्क में आने से ऑक्सीडाइज हो जाते हैं। अत्यधिक गर्मी, सीलन भरी नमी, सीधी रोशनी या गलत स्टोरेज के कारण ये रासायनिक बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, वैसे तो ज्यादातर सनस्क्रीन अपनी मैन्युफैक्चरिंग डेट से लगभग तीन साल तक प्रभावी रहती हैं, लेकिन एक बार पैक का सील खुलने के बाद इसकी वास्तविक उम्र काफी कम हो जाती है। सनस्क्रीन न सिर्फ सामान्य सनबर्न से त्वचा को बचाती है बल्कि लंबे समय में स्किन कैंसर, झुर्रियों और अनचाहे काले धब्बों से भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन अगर यह भीतर से खराब हो जाए तो फायदा पहुंचाने के बजाय उल्टा नुकसान कर सकती है। कई लोग अपनी साल भर पुरानी खुली बोतल का इस्तेमाल करते रहते हैं, जिससे सनस्क्रीन की एसपीएफ (SPF) क्षमता घट जाती है और धूप में घंटों बिताने के बावजूद त्वचा लाल हो जाती है या पिगमेंटेशन तेजी से बढ़ने लगता है। भारत जैसे देश में जहां सूरज की किरणें साल भर बहुत तेज रहती हैं, सनस्क्रीन का सही व सुरक्षित होना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद आवश्यक है।

संकेत नंबर 1 और 2: क्रीम के मूल रंग में बदलाव आना और बदबू या स्मेल में होने वाला फर्क

सनस्क्रीन के खराब होने का सबसे पहला और स्पष्ट लक्षण (Expired sunscreen) उसके मूल रंग में बदलाव आना है। यदि आपकी सफेद या ऑफ-व्हाइट दिखने वाली सनस्क्रीन का रंग धीरे-धीरे पीला पड़ने लगा है या उसमें कोई असामान्य मटमैला शेड नजर आने लगा है, तो यह साफ संकेत है कि इसमें मौजूद सक्रिय केमिकल घटक पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से ऑक्सीडेशन और अत्यधिक तापमान के कारण होता है, जो केमिकल बेस्ड सनस्क्रीन में बहुत जल्दी देखने को मिलता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस्तेमाल से पहले बोतल को हिलाकर उसका रंग जरूर चेक करें। इसके समांतर, सनस्क्रीन की गंध में अचानक बदलाव आना भी इसके एक्सपायर होने का एक बड़ा संकेत माना जाता है। जब सनस्क्रीन खराब होती है, तो वह बैक्टीरिया के पनपने या केमिकल ब्रेकडाउन के कारण बेहद तीखी, खट्टी या अजीब रासायनिक गंध देने लगती है। त्वचा पर लगाते समय यदि आपको ऐसी कोई अप्रिय गंध महसूस हो, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए क्योंकि ऐसी सनस्क्रीन त्वचा पर गंभीर एलर्जी या फंगल इंफेक्शन का कारण बन सकती है।

संकेत नंबर 3 और 4: फॉर्मूला का अलग होकर लेयर में बटना और सूखी, दानेदार या फ्लेकी बनावट होना

यदि सनस्क्रीन की बोतल को अच्छी तरह हिलाने के बावजूद उसका पानी या तेल और गाढ़ी क्रीम अलग-अलग परतों में बंटी हुई नजर आ रही है, तो समझ लें कि उत्पाद की इमल्शन क्वालिटी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। जब सनस्क्रीन का यह फॉर्मूलेशन आपस में सेपरेट हो जाता है, तो चेहरे पर लगाने के बाद यह त्वचा को समान रूप से यूवी प्रोटेक्शन नहीं दे पाता है, जिससे चेहरे के कुछ हिस्सों पर सनबर्न का खतरा बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि सनस्क्रीन छूने पर पूरी तरह सूखी, दानेदार या खुरदरी महसूस हो, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। एक अच्छी सनस्क्रीन हमेशा चिकनी और त्वचा पर आसानी से अवशोषित होने वाली होनी चाहिए। मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन में यह दानेदार होने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है, जिसके रूखे कण चेहरे की संवेदनशील त्वचा को छील सकते हैं और त्वचा की प्राकृतिक नमी को भी पूरी तरह खत्म कर सकते हैं।

सनस्क्रीन को सही तरीके से स्टोर करने के नियम और खराब प्रोडक्ट के गंभीर त्वचा नुकसान

सनस्क्रीन को उसकी तय एक्सपायरी डेट से पहले खराब होने से बचाने के लिए उसका सही स्टोरेज बहुत मायने रखता है। इसे कभी भी अत्यधिक गर्म जगहों, जैसे कि बाथरूम की शेल्फ या बंद कार की डैशबोर्ड पर बिल्कुल न रखें क्योंकि वहां की उमस और गर्मी इसके केमिकल बॉन्ड्स को तोड़ देती है। सनस्क्रीन को हमेशा कमरे के सामान्य तापमान वाली सूखी और अंधेरी जगह पर रखना चाहिए और इस्तेमाल के तुरंत बाद उसकी कैप को कसकर बंद करना चाहिए ताकि बाहरी हवा प्रवेश न कर सके। एक्सपायर्ड सनस्क्रीन का उपयोग करने से चेहरे पर पिंपल्स, हाइपरपिगमेंटेशन और झुर्रियों की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है। विशेष रूप से संवेदनशील त्वचा वाले लोगों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हमेशा पूरी तरह से फ्रेश और सुरक्षित सनस्क्रीन का ही चयन करना चाहिए क्योंकि उनकी त्वचा केमिकल ब्रेकडाउन के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होती है।

सही सनस्क्रीन चुनने के बेहतरीन टिप्स, रोजमर्रा की स्किनकेयर और मौसम के अनुसार चुनाव

एक नई और प्रभावी सनस्क्रीन खरीदते समय हमेशा ब्रॉड स्पेक्ट्रम यूवीए (UVA) और यूवीबी (UVB) प्रोटेक्शन वाली सनस्क्रीन चुनें, जिसका एसपीएफ कम से कम 30 या उससे अधिक हो। इसके साथ ही पैकेजिंग पर पीए+++ (PA+++) रेटिंग जरूर चेक करें और अपनी ऑयली, ड्राई या कॉम्बिनेशन स्किन टाइप के अनुसार ही सही जेल या क्रीमी फॉर्मूला सिलेक्ट करें। भारतीय उमस भरे मौसम के लिए वॉटर रेसिस्टेंट (पसीने से न छूटने वाली) सनस्क्रीन सबसे बेहतर विकल्प होती है। इसे रोज सुबह घर से निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे, गर्दन और हाथों पर अच्छी तरह लगाएं और यदि आप लगातार धूप में हैं तो हर दो से तीन घंटे में इसे दोबारा अप्लाई करना न भूलें। गर्मियों के दिनों में जहां जेल-बेस्ड सनस्क्रीन चेहरे को चिपचिपाहट से बचाती है, वहीं सर्दियों के शुष्क मौसम में क्रीमी सनस्क्रीन त्वचा को हाइड्रेटेड रखने में मदद करती है। बादलों वाले दिनों में भी सनस्क्रीन लगाना उतना ही जरूरी है क्योंकि बादलों को चीरकर भी अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

निष्कर्ष: सनस्क्रीन आपकी त्वचा (Expired sunscreen) को समय से पहले बूढ़ा होने और स्किन कैंसर जैसी घातक बीमारियों से बचाने का सबसे मजबूत और विश्वसनीय सुरक्षा कवच है। लेकिन इस कवच का सही और प्रभावी होना भी उतना ही आवश्यक है। डॉ. निरुपमा परवंदा जैसे त्वचा रोग विशेषज्ञों की इन आसान गाइडलाइंस को अपनाकर आप खराब हो चुके ब्यूटी प्रोडक्ट्स के नुकसान से खुद को बचा सकते हैं और अपनी त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ व चमकदार बनाए रख सकते हैं।

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