गुजरात में शुरू हुआ सेमीकंडक्टर का व्यावसायिक उत्पादन, अश्विनी वैष्णव बोले- सेमीकॉन 2.0 में 20 लाख प्रतिभाओं की होगी जरूरत, युवाओं के लिए खुलेंगे अवसरों के द्वार

भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट गुजरात में व्यावसायिक उत्पादन शुरू, अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 की रूपरेखा बताई, युवाओं के लिए 20 लाख प्रतिभाओं की कमी से सुनहरा मौका

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Gujarat News: भारत के तकनीकी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पल आ गया है। गुजरात में देश के पहले सेमीकंडक्टर संयंत्र में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है और यह खबर पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। रविवार को गांधीनगर में आयोजित ‘गुजरात सेमीकनेक्ट कॉन्फ्रेंस 2026’ के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में कुल 10 सेमीकंडक्टर संयंत्र हैं जिनमें से पहले संयंत्र में व्यावसायिक उत्पादन शनिवार से ही शुरू हो गया और दूसरा संयंत्र भी बहुत जल्द उत्पादन शुरू करने वाला है। इसके साथ ही उन्होंने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण यानी सेमीकॉन 2.0 की रूपरेखा भी सामने रखी। इस दौरान उन्होंने अहमदाबाद-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी की।

Gujarat News: पहले चरण में मिली बड़ी सफलता

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेमीकॉन 1.0 का मुख्य उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करना था और यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया गया है। देश में अब 10 संयंत्र मौजूद हैं और पहले संयंत्र में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे भी बड़ी बात यह है कि पहले चरण में 10 साल के भीतर 85 हजार सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन यह काम मात्र चार साल में ही पूरा हो गया। यह भारत के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था की क्षमता का प्रमाण है।

सेमीकॉन 2.0 का फोकस डिजाइन पर होगा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 पहले चरण से बिल्कुल अलग होगा। पहले चरण में जहां विनिर्माण सुविधाएं खड़ी करना प्राथमिकता था वहीं दूसरे चरण में एक मजबूत डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र बनाना सबसे बड़ा लक्ष्य होगा। वैष्णव ने कहा कि इस चरण में भारत के डीप-टेक स्टार्टअप को इतना सक्षम बनाया जाएगा कि उनमें से कुछ आगे चलकर क्वालकॉम, ब्रॉडकॉम या एनवीडिया जैसी दुनिया की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियों की बराबरी कर सकें।

उन्होंने साफ कहा कि यह आसान काम नहीं है। यह एक बहुत लंबी और जटिल यात्रा है और सरकार इस जटिलता को पूरी तरह समझती है। इसीलिए इस दिशा में बहुत यथार्थवादी और व्यावहारिक नजरिए से काम किया जाएगा। इस 20 साल की यात्रा को सफल बनाने के लिए देश में सामग्री, मशीन, उपकरण, परीक्षण और सत्यापन की एक ठोस और सुस्थापित व्यवस्था खड़ी करनी होगी।

Gujarat News: 20 लाख प्रतिभाओं की कमी बनेगी युवाओं के लिए सुनहरा मौका

वैष्णव ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग अभी 800 से 900 अरब डॉलर का है और यह बहुत जल्द एक हजार अरब डॉलर यानी एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनने वाला है। इस तेज रफ्तार विस्तार के कारण दुनियाभर में इस क्षेत्र में करीब 20 लाख प्रतिभाओं की कमी पैदा होने वाली है। यह कमी भारत के युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है।

इस अवसर का फायदा उठाने के लिए सेमीकॉन 2.0 में विश्वविद्यालयों की संख्या 350 से बढ़ाकर 500 की जाएगी। हर राज्य में ऐसे विश्वविद्यालय और कॉलेज होंगे जहां छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और सत्यापन में व्यावहारिक प्रशिक्षण ले सकेंगे। इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों का एक बड़ा और निरंतर प्रवाह बनेगा।

अहमदाबाद-धोलेरा हाई-स्पीड रेल परियोजना की समीक्षा

रेल मंत्री के रूप में अश्विनी वैष्णव ने इसी दौरे में अहमदाबाद और धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के बीच बनाई जा रही सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। पश्चिम रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप गुप्ता ने रेल मंत्री को इस परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।

इस परियोजना की खास बात यह है कि यह 1676 मिलीमीटर चौड़े गेज पर विकसित की जाने वाली दुनिया की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल प्रणाली होगी जिसकी अधिकतम संभावित रफ्तार 220 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह परियोजना पूरे देश में आने वाली ऐसी परियोजनाओं के लिए एक मॉडल यानी प्रोटोटाइप के रूप में विकसित की जा रही है। वैष्णव ने 134 किलोमीटर लंबी उस सहायक रेल लाइन की भी समीक्षा की जो राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर और धोलेरा हवाई अड्डे को जोड़ेगी।

Gujarat News: भारत के लिए क्यों है यह खबर इतनी अहम?

सेमीकंडक्टर आधुनिक दुनिया की रीढ़ है। स्मार्टफोन से लेकर कार तक, रक्षा उपकरणों से लेकर मेडिकल उपकरणों तक हर चीज में सेमीकंडक्टर चिप की जरूरत होती है। कोरोना महामारी के दौरान जब सेमीकंडक्टर की वैश्विक कमी हुई थी तब भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इससे बुरी तरह प्रभावित हुई थी। अब भारत खुद सेमीकंडक्टर बनाने की ताकत हासिल कर रहा है जो देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

गुजरात में पहले संयंत्र का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना इस दिशा में एक मील का पत्थर है। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे और संयंत्र पूरी क्षमता से काम करने लगेंगे भारत धीरे-धीरे सेमीकंडक्टर के मामले में आत्मनिर्भर बनता जाएगा और दुनिया के प्रमुख सेमीकंडक्टर उत्पादक देशों में अपनी जगह बनाएगा।

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