Gold-Silver Price: सोना-चांदी रिकॉर्ड हाई पर, कमजोर डॉलर और वैश्विक तनाव से कीमतों में उछाल, जानें आज के ताजा भाव
MCX पर सोना ₹1,57,086 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3,35,521 प्रति किलो पर पहुंची
Gold-Silver Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को सोना और चांदी ने नई ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छू लिया। कमजोर अमेरिकी डॉलर, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया। इसके परिणामस्वरूप कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया।
भारतीय बाजार में भी यह तेजी साफ दिखाई दी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,57,086 प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं चांदी भी ₹3,35,521 प्रति किलोग्राम के नए हाई पर कारोबार कर रही है। यह तेजी निवेशकों के लिए चिंता और अवसर दोनों लेकर आई है।
कमजोर डॉलर ने बढ़ाई सोने की मांग
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी सोने की कीमतों (Gold-Silver Price) में तेजी का मुख्य कारण बन रही है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो डॉलर में कारोबार होने वाली कीमती धातुएं अन्य मुद्राओं में रखने वाले निवेशकों के लिए सस्ती हो जाती हैं। इससे मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं।
वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर भ्रम की स्थिति भी डॉलर को कमजोर कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों ने फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है।
Gold-Silver Price: भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव भी सोने और चांदी की कीमतों (Gold-Silver Price) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व में अस्थिरता और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा की है।
ऐसे समय में निवेशक पारंपरिक रूप से सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोना सदियों से सुरक्षित निवेश का सबसे विश्वसनीय माध्यम रहा है। जब शेयर बाजार अस्थिर होते हैं या राजनीतिक-आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने में निवेश बढ़ जाता है।
फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों ने फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने कई बार ब्याज दरों में कटौती की मांग की है और फेड के निर्णयों पर सार्वजनिक टिप्पणी की है।
आमतौर पर फेडरल रिजर्व राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर मौद्रिक नीति बनाता है। लेकिन इस स्वतंत्रता पर सवाल उठने से बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भविष्य में ब्याज दरों और मुद्रास्फीति को लेकर क्या नीति अपनाई जाएगी।
इस अनिश्चितता ने निवेशकों को सोने की ओर धकेला है। सोना मुद्रास्फीति के खिलाफ एक बेहतर बचाव माना जाता है और आर्थिक अनिश्चितता के समय इसकी मांग बढ़ जाती है।
Gold-Silver Price: भारतीय बाजार में भी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। MCX पर सोना ₹1,57,086 प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया। यह पिछले रिकॉर्ड से भी ऊपर है। चांदी भी ₹3,35,521 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है।
हाजिर बाजार में भी कीमतें (Gold-Silver Price) ऊंची बनी हुई हैं। दिल्ली, मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों में सोने की कीमत ₹15,700 से ₹15,800 प्रति ग्राम के बीच पहुंच गई है। यह आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है, खासकर शादी-विवाह के सीजन में।
भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा आयातक देशों में से एक है। यहां सोने की मांग त्योहारों, शादियों और निवेश के लिए लगातार बनी रहती है। ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय बाजार में सोने की मांग अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
गोल्ड और सिल्वर ETFs में गिरावट
दिलचस्प बात यह है कि जबकि भौतिक सोने और चांदी की कीमतें (Gold-Silver Price) रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, गोल्ड और सिल्वर ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में 15 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। यह गिरावट दावोस में राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण के बाद आई।
ट्रंप ने अपने भाषण में कुछ ऐसे संकेत दिए जिनसे बाजारों में थोड़ी राहत मिली। उन्होंने व्यापारिक तनाव कम करने और कुछ देशों के साथ बेहतर संबंधों की बात की। इससे जोखिम लेने की भावना बढ़ी और निवेशकों ने ETFs से पैसा निकालना शुरू कर दिया।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी गिरावट हो सकती है। लंबी अवधि में भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता जारी रहने की संभावना है, जो सोने की मांग को बनाए रखेगी।
Gold-Silver Price: निवेशकों के लिए क्या रणनीति
मौजूदा परिस्थिति में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सोना (Gold-Silver Price) एक सुरक्षित निवेश है लेकिन इसमें भी उतार-चढ़ाव होता है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर अगर अल्पकालिक लाभ की उम्मीद हो।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कुल पोर्टफोलियो का 10-15 प्रतिशत सोने में रखना समझदारी हो सकती है।
जो लोग ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें थोड़ा इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है। कीमतों में कुछ सुधार की संभावना है, खासकर अगर वैश्विक तनाव में कमी आती है या डॉलर मजबूत होता है। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेड की नीति, वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम और डॉलर की चाल से सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय होगी।
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