पैसिव फंड्स में निवेश का तूफान, गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ ने पहली बार इक्विटी फंड्स को पीछे छोड़ा

पैसिव फंड्स का AUM ₹15.02 लाख करोड़ पार, गोल्ड ETF में ₹24,039 करोड़ मासिक निवेश, सिल्वर ETF ने गोल्ड को पीछे छोड़ा, 70-137% रिटर्न

0

Gold-Silver ETF: भारत में निवेश का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब लोग अपनी मेहनत की कमाई बैंक एफडी, पीपीएफ और पारंपरिक बचत योजनाओं में लगाते थे, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। गोल्ड ईटीएफ, सिल्वर ईटीएफ और इंडेक्स फंड जैसे पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स ने निवेशकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार पैसिव फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट दिसंबर 2025 तक ₹14.57 लाख करोड़ को पार कर गया, जो साल-दर-साल 31 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है। जनवरी 2026 में यह आंकड़ा ₹15.02 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह साफ संकेत है कि भारतीय निवेशक अब कम लागत वाले स्मार्ट निवेश विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं।

क्या हैं पैसिव फंड्स और क्यों बन रहे हैं निवेशकों की पसंद?

पैसिव फंड्स वे म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं जो निफ्टी 50, सेंसेक्स, गोल्ड या सिल्वर की कीमत जैसे बेंचमार्क को ट्रैक करती हैं। इनमें फंड मैनेजर को सक्रिय स्टॉक चयन नहीं करना पड़ता, इसलिए एक्सपेंस रेशियो बहुत कम रहता है। जहां एक्टिव फंड्स 1.0 से 2.0 प्रतिशत तक चार्ज करते हैं, वहीं पैसिव फंड्स में यह सिर्फ 0.02 से 0.30 प्रतिशत होता है। भारत में पैसिव फंड्स का हिस्सा अब कुल म्यूचुअल फंड एयूएम का करीब 17 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका में यह 50 प्रतिशत से अधिक है, यानी भारत में अभी विकास की अपार संभावनाएं हैं।

Gold-Silver ETF: गोल्ड ईटीएफ में रिकॉर्ड निवेश

गोल्ड ईटीएफ ने 2025-26 में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। जनवरी 2026 में अकेले गोल्ड ईटीएफ में ₹24,039 करोड़ का रिकॉर्ड मासिक निवेश आया। फोलियो की संख्या अगस्त 2025 के 80.34 लाख से बढ़कर जनवरी 2026 में 1.14 करोड़ हो गई। पिछले एक साल में गोल्ड ईटीएफ ने 70-77 प्रतिशत तक का शानदार रिटर्न दिया है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, फेडरल रिजर्व की नीतियों में बदलाव की उम्मीद और रुपये में गिरावट ने सोने की कीमतों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। MCX पर अप्रैल 2026 गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,57,909 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे हैं।

सिल्वर ईटीएफ ने मचाया तहलका, गोल्ड को पीछे छोड़ा

2025 में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन सिल्वर ईटीएफ का रहा। चांदी आधारित ईटीएफ ने 85 से 137 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया, जो गोल्ड ईटीएफ से भी काफी अधिक है। जनवरी 2026 में सिल्वर ईटीएफ में ₹9,463 करोड़ का निवेश आया और फोलियो पांच गुना से अधिक बढ़कर 47.85 लाख हो गए। सिल्वर ईटीएफ का एयूएम दिसंबर 2025 के ₹72,652 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में ₹1.17 लाख करोड़ हो गया। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग ने इसे एक रणनीतिक निवेश विकल्प बना दिया है।

Gold-Silver ETF: संयुक्त AUM ₹3 लाख करोड़ के पार

गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ का संयुक्त एयूएम जनवरी 2026 में ₹3 लाख करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर गया। पांच महीने पहले अगस्त 2025 में यह सिर्फ ₹1 लाख करोड़ था। जनवरी 2026 में इन ईटीएफ में कुल ₹33,503 करोड़ का निवेश आया, जो इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के ₹24,029 करोड़ से भी अधिक है। पहली बार कीमती धातु ईटीएफ ने मासिक प्रवाह में इक्विटी फंड्स को पीछे छोड़ा। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड अकेले ₹1 लाख करोड़ से अधिक का प्रीशियस मेटल्स एयूएम प्रबंधित कर रहा है।

इंडेक्स फंड्स में भी बढ़ रहा भरोसा

गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ के साथ इक्विटी इंडेक्स फंड्स में भी निवेशकों का विश्वास मजबूत हो रहा है। पैसिव फंड्स के कुल एयूएम में 39 प्रतिशत हिस्सेदारी डोमेस्टिक इक्विटी इंडेक्स ईटीएफ की और 15 प्रतिशत इंडेक्स फंड्स की है। शोध बताते हैं कि 10-15 साल में 60 से 80 प्रतिशत एक्टिव लार्ज कैप फंड्स अपने बेंचमार्क को मात नहीं दे पाते, इसलिए समझदार निवेशक इंडेक्स फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं। पैसिव फंड्स के कुल फोलियो दिसंबर 2025 तक 502.35 लाख हो गए, जो सालाना 29 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।

Gold-Silver ETF: निवेश बढ़ने के प्रमुख कारण

इस तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सबसे पहले वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर धकेला है। दूसरा कारण इक्विटी बाजार में बढ़ती अस्थिरता है, जिसने पोर्टफोलियो विविधीकरण की जरूरत बढ़ाई है। तीसरा रुपये में लगातार गिरावट है, जिससे सोने-चांदी में भारतीय मुद्रा में रिटर्न और अधिक बढ़ जाता है। पिछले दशक में रुपया डॉलर के मुकाबले 19 प्रतिशत कमजोर हुआ, जिसने कीमती धातुओं के रिटर्न में सालाना 2-3 प्रतिशत अतिरिक्त बढ़ोतरी की। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मोबाइल ऐप्स ने ईटीएफ व इंडेक्स फंड में निवेश को बेहद सुलभ बना दिया है और निवेशकों की बढ़ती वित्तीय जागरूकता भी एक बड़ा कारण है।

विशेषज्ञों की राय और निवेश रणनीति

एंजेल वन एएमसी के सीईओ हेमेन भाटिया के अनुसार भारत में पैसिव इन्वेस्टिंग तेजी से बढ़ रही है और 2026 में यह दीर्घकालिक पोर्टफोलियो का मुख्य आधार बनेगी। SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज के सीईओ अजय गर्ग कहते हैं कि सोने-चांदी में बढ़ता निवेश निवेशकों की बढ़ती परिपक्वता का संकेत है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो का 10-15 प्रतिशत कीमती धातुओं में रखें और एकमुश्त निवेश की बजाय एसआईपी के माध्यम से निवेश करें।

Gold-Silver ETF: निवेशक अब क्या करें, कहीं पीछे तो नहीं रह गए

अगर आपने अभी तक इन विकल्पों में निवेश शुरू नहीं किया है तो देर मत कीजिए। रूढ़िवादी निवेशक (50+ वर्ष) 90 प्रतिशत गोल्ड और 10 प्रतिशत सिल्वर रखें। संतुलित निवेशक (35-50 वर्ष) 70 प्रतिशत गोल्ड और 30 प्रतिशत सिल्वर का अनुपात अपनाएं। आक्रामक निवेशक (25-35 वर्ष) 60 प्रतिशत गोल्ड और 40 प्रतिशत सिल्वर में निवेश कर सकते हैं। शुरुआती निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ सबसे अच्छा विकल्प है। ईटीएफ के लिए डीमैट खाता जरूरी है, जबकि इंडेक्स फंड में सीधे एसआईपी शुरू की जा सकती है। 2019 में ₹1.9 लाख करोड़ से लेकर 2026 में ₹15 लाख करोड़ तक का सफर बताता है कि पैसिव इन्वेस्टिंग भारत में अब मुख्यधारा बन चुकी है। जो निवेशक आज यह कदम उठाएंगे, वे भविष्य की अनिश्चितताओं से बेहतर तरीके से निपट सकेंगे।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है।

Read More Here

उत्तर भारत में कोहरे का असर जारी, दक्षिण में गर्मी बढ़ी, जानें अपने शहर का पूरा हाल और तापमान

मंगलवार को इन राशियों की बदलेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक सभी का हाल, धन-करियर-प्रेम में क्या होगा खास

रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा की शादी की तारीख फाइनल! 26 फरवरी को उदयपुर में होगी शाही शादी, 3 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन, सामने आया वेडिंग कार्ड

मेरठ मेट्रो का शुभारंभ 22 फरवरी को,- 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन, जानें पूरा रूट और किराया

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.