Ghaziabad Triple Suicide: पिता चेतन ने तीन सगी बहनों से की थी शादी, कोरियन कल्चर की दीवानगी में तीन नाबालिग बेटियों ने दी जान, जांच में खुले कई चौंकाने वाले राज
तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या में चौंकाने वाला खुलासा, पिता चेतन ने तीन सगी बहनों से शादी की, कोरियन कल्चर की लत और मोबाइल छीने जाने से दी जान
Ghaziabad Triple Suicide: साहिबाबाद की भारत सिटी सोसायटी में तीन सगी नाबालिग बहनों की आत्महत्या के दर्दनाक मामले में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि मृतक बच्चियों के पिता चेतन कुमार ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन सगी बहनों से शादी की है। 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी ने नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर जान दे दी थी। घटना की कहानी इतनी जटिल और उलझी हुई है कि पुलिस भी कुछ स्पष्ट कहने से बच रही है। तीनों बच्चियों ने आठ पेज का सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमें कोरियन कल्चर से जुड़ाव और पिता द्वारा मोबाइल छीने जाने का जिक्र था।
Ghaziabad Triple Suicide: तीन सगी बहनों से शादी – पारिवारिक उलझन
पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि दिल्ली के सीलमपुर निवासी चेतन कुमार ने तीन सगी बहनों से शादी की थी। पहली शादी सुजाता के साथ हुई थी। लंबे समय तक संतान न होने के कारण चेतन ने दूसरी शादी अपनी सगी साली हिना के साथ कर ली।
विडंबना यह रही कि दूसरी शादी के तुरंत बाद ही पहली पत्नी सुजाता को बेटी निशिका का जन्म हुआ। इसके बाद सुजाता को बेटा लविश हुआ जो मानसिक रूप से बीमार बताया जाता है। दूसरी पत्नी हिना से चेतन को तीन बच्चे हुए – प्राची, पाखी और तीन वर्षीय देव्यांशी।
हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार, चेतन ने लगभग पांच वर्ष पहले तीसरी साली टीना से भी शादी की थी। तीन साल की सबसे छोटी बच्ची देव्यांशी टीना से है। देव्यांशी चेतन के साथ रहती है और टीना घर आती-जाती रहती है।
मई 2025 में पत्नियों ने छोड़ा था घर
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इसी जटिल पारिवारिक स्थिति के कारण मई 2025 में दोनों पत्नियां सुजाता और हिना घर छोड़कर चली गई थीं। घर में केवल पिता चेतन और बच्चे रह गए थे। यह स्थिति कितने समय तक रही और क्या बाद में पत्नियां वापस लौटीं, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।
Ghaziabad Triple Suicide: आर्थिक तंगी ने बढ़ाई समस्याएं
मूल रूप से दिल्ली के खजूरी स्थित गामड़ी गांव के रहने वाले चेतन कुमार शेयर ट्रेडिंग का काम करते हैं। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। साल 2020 में परिवार की गंभीर आर्थिक कठिनाइयों के कारण तीनों बेटियों की पढ़ाई छूट गई थी।
तब से निशिका, प्राची और पाखी घर पर ही रहने लगीं। स्कूल न जाने के कारण तीनों बच्चियों का अधिकांश समय मोबाइल फोन पर गेम खेलने और ऑनलाइन कंटेंट देखने में बीतने लगा। धीरे-धीरे यह आदत नशे में बदल गई।
कोरियन कल्चर की खतरनाक लत
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों लड़कियां कोरियन संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित थीं। वे ऑनलाइन गेम, कोरियन फिल्में और वेब सीरीज की आदी हो गई थीं। उनका अधिकांश समय इन्हीं गतिविधियों में बीतता था।
आठ पेज के सुसाइड नोट में तीनों बच्चियों ने लिखा था – “यू आर इंडियन, आई एम कोरियन”। यह वाक्य उनकी मानसिक स्थिति और पहचान के संकट को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वे अपने भारतीय परिवेश से कटकर एक काल्पनिक कोरियन दुनिया में जी रही थीं।
Ghaziabad Triple Suicide: 15 दिन पहले मोबाइल बेच दिया था पिता ने
जब पिता चेतन कुमार ने देखा कि बच्चियां पूरी तरह से मोबाइल की दुनिया में खो गई हैं तो उन्होंने लगभग 15 दिन पहले तीनों से मोबाइल फोन ले लिया और उन्हें बेच दिया।
यह कदम तीनों बच्चियों के लिए असहनीय साबित हुआ। मोबाइल के बिना वे गहरे तनाव और अवसाद में चली गईं। उनका पूरा जीवन उस वर्चुअल दुनिया के इर्द-गिर्द घूम रहा था जिससे वे अचानक कट गई थीं। यह अचानक अलगाव उनके लिए इतना कष्टदायक था कि उन्होंने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
आठ पेज का सुसाइड नोट
तीनों बच्चियों ने आठ पेज का विस्तृत सुसाइड नोट लिखा था। इस नोट में उन्होंने कोरियन कल्चर से अपने लगाव, पिता द्वारा मोबाइल छीने जाने का दर्द और अपनी भावनात्मक स्थिति का वर्णन किया था।
नोट में बीच वाली बहन प्राची ने खुद को ‘लीडर’ बताया था। तीनों बहनें इतनी करीब थीं कि वे बाथरूम भी साथ जाती थीं। उनका अपना एक अलग ही संसार था जिसमें बाकी परिवार की कोई जगह नहीं थी।
Ghaziabad Triple Suicide: पुलिस जांच जारी
डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने बताया कि तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सुसाइड नोट, मां सुजाता का मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य विस्तृत जांच के लिए भेजे गए हैं।
मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच के बाद ही गेमिंग एप्लिकेशन और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों की पूर्ण पुष्टि हो सकेगी। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि किन विशेष गेम्स और कंटेंट का बच्चियों पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा।
यह दुखद घटना कई सवाल खड़े करती है – डिजिटल नशा, माता-पिता की जिम्मेदारी, बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और सामाजिक सरोकारों का अभाव। यह परिवार और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है।
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