‘शादी से पहले शारीरिक संबंध में रखें सतर्कता, किसी पर आंख बंद कर भरोसा न करें’,- झूठे वादे पर रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विवाह से पहले अजनबी पर आंख बंद कर भरोसा न करें, झूठे वादे पर रेप केस में अहम टिप्पणी

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झूठा वादा करके रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि विवाह से पहले युवक-युवती एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं, इसलिए उन्हें शारीरिक संबंध बनाने में सतर्कता बरतनी चाहिए। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी से पहले किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।

Supreme Court News: मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला दिल्ली से संबंधित है। शिकायतकर्ता महिला ने युवक पर निम्नलिखित आरोप लगाए हैं:

  • झूठा वादा: युवक ने शादी का वादा किया और उसके आधार पर दुबई में महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए।

  • ब्लैकमेलिंग: आरोपी ने बिना अनुमति के अंतरंग वीडियो बनाए और उन्हें वायरल करने की धमकी दी।

  • धोखाधड़ी: महिला को बाद में पता चला कि युवक ने जनवरी 2024 में किसी अन्य महिला से शादी कर ली थी।

Supreme Court News: अदालती कार्यवाही

  • निचली अदालत: युवक का जमानत आवेदन खारिज कर दिया गया।

  • दिल्ली हाई कोर्ट: हाई कोर्ट ने भी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और जानबूझकर गलत इरादे से किए गए वादे का मामला है। आरोपी ने ब्लैकमेलिंग का भी सहारा लिया।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान जस्टिस बी वी नागरत्ना ने पक्षों से सवाल पूछते हुए कहा:

“विवाह से पूर्व युवक और युवती एक-दूसरे के लिए बिल्कुल अजनबी होते हैं। विवाह से पहले उन्हें शारीरिक संबंध बनाने में सतर्कता बरतनी चाहिए। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वे विवाह से पहले शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं। आपको काफी सतर्क होना चाहिए। किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।”

मध्यस्थता का सुझाव

कोर्ट ने कहा कि यह मामला आपसी सहमति से बने संबंध का प्रतीत होता है और इसे मध्यस्थता (mediation) के लिए भेजा जा सकता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि आरोपी महिला को उचित मुआवजा देकर मामले को समाप्त करने की कोशिश करे। अगली सुनवाई बुधवार (19 फरवरी) को तय की गई है।

Supreme Court News: कानूनी पहलू, शादी के झूठे वादे पर बलात्कार

न्यायालयों ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि बलात्कार तभी माना जाएगा जब:

  1. शुरुआत से ही धोखे का इरादा: आरोपी ने केवल शारीरिक संबंध बनाने के लिए झूठा वादा किया हो।

  2. सहमति का आधार: महिला की सहमति पूरी तरह से उस वादे पर आधारित थी जो जानबूझकर झूठा था।

  3. महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना: जैसे कि आरोपी का पहले से शादीशुदा होना।

 निष्कर्ष और सामाजिक संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणियां भारतीय समाज में विवाह-पूर्व संबंधों के प्रति बदलते दृष्टिकोण और उससे जुड़ी कानूनी जटिलताओं को उजागर करती हैं। कोर्ट ने युवाओं को अपने निर्णयों के परिणामों को समझने और सतर्कता बरतने की सलाह दी है। यह मामला एक बार फिर उस क्षेत्र को रेखांकित करता है जहाँ व्यक्तिगत संबंध, सामाजिक मान्यताएं और कानूनी प्रावधान आपस में मिलते हैं।

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