Engineer Death Case: नोएडा इंजीनियर युवराज की मौत मामले में एसआईटी ने शुरू की जांच, बिल्डर हुआ गिरफ्तार

युवराज मेहता की बेसमेंट में डूबने की मौत पर SIT गठित, नोएडा सीईओ हटाए गए, बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार

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Engineer Death Case: सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौल के निर्माणाधीन मॉल बेसमेंट में भरे पानी में डूबकर मृत्यु के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष जांच दल का गठन किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने सोमवार को अपनी जांच प्रारंभ कर दी। इस बीच नॉलेज पार्क पुलिस ने एमजेड विजटाउन के स्वामी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण में की जांच

विशेष जांच दल ने सोमवार को नोएडा प्राधिकरण कार्यालय (Engineer Death Case) पहुंचकर विस्तृत जांच की। एसआईटी के सदस्यों ने लगभग दो घंटे तक प्राधिकरण कार्यालय में रहकर विभिन्न दस्तावेजों की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। टीम ने निर्माण से जुड़े अनुमोदन पत्र, मैप पास और अन्य औपचारिकताओं की जानकारी एकत्रित की।

प्राधिकरण कार्यालय से जांच पूर्ण करने के उपरांत एसआईटी घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए रवाना हुई। जांच दल को पांच दिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।

Engineer Death Case: नोएडा सीईओ को हटाया गया

Engineer Death Case
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इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद बढ़ते जनाक्रोश और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के मद्देनजर राज्य सरकार ने नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम को पद से हटा दिया। यह कार्रवाई घटना की गंभीरता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। नए सीईओ की नियुक्ति शीघ्र की जाएगी।

सीईओ को हटाने का निर्णय यह संदेश देता है कि सरकार इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका की भी सूक्ष्म जांच की जा रही है।

बिल्डर अभय कुमार की गिरफ्तारी

नॉलेज पार्क (Engineer Death Case) कोतवाली पुलिस ने मामले में निर्णायक कार्रवाई करते हुए एमजेड विजटाउन के स्वामी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार निर्माण स्थल पर उचित सुरक्षा उपायों का अभाव था और बरसाती जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं थी। गहरे गड्ढे के चारों ओर कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत भी नहीं थे।

बिल्डर पर लापरवाही और सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने के आरोप हैं। पुलिस उनसे विस्तृत पूछताछ कर रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि क्या निर्माण कार्य के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त थीं और निर्माण नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

Engineer Death Case: घटना का विवरण

शनिवार की रात युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज अपने कार्यालय से घर लौट रहा था। नोएडा सेक्टर 150 के निकट निर्माणाधीन मॉल परिसर में उसकी कार गहरे गड्ढे में गिर गई जो बरसाती पानी से भरा हुआ था। कार सवार युवराज पानी में डूबकर मृत्यु को प्राप्त हो गया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे। परंतु अंधेरे, गहरे पानी और दलदली स्थिति के कारण बचाव कार्य अत्यंत कठिन हो गया। कार लगभग 70 फीट की दूरी पर थी और पानी की गहराई 30 फीट थी। दुर्भाग्यवश युवराज को बचाया नहीं जा सका।

परिवार का आरोप और पीड़ा

मृतक युवराज के पिता ने घटना का हृदयविदारक विवरण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार युवराज (Engineer Death Case) ने कैब चालक के हाथ जोड़े थे और घटनास्थल को खोजने में 40 मिनट का समय लग गया। यदि समय पर सहायता मिल जाती तो शायद उनके पुत्र की जान बच सकती थी।

परिवार का आरोप है कि यदि निर्माण स्थल पर उचित सुरक्षा व्यवस्था होती, गड्ढे के चारों ओर बैरिकेडिंग होती और चेतावनी बोर्ड लगे होते तो यह दुर्घटना टल सकती थी। उन्होंने कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।

एक और दुखद पहलू यह सामने आया है कि दमकल कर्मियों को तैराकी नहीं आती थी। यदि बचाव दल में प्रशिक्षित गोताखोर होते तो संभवतः युवराज को बचाया जा सकता था। यह आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

Engineer Death Case: निर्माण स्थलों पर सुरक्षा का प्रश्न

यह घटना नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कई निर्माण स्थलों पर खुले गड्ढे, अपर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतों का अभाव देखा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों पर कठोर सुरक्षा मानदंड लागू किए जाने चाहिए। गहरे गड्ढों के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी और स्पष्ट चेतावनी संकेत अनिवार्य होने चाहिए। विशेषकर रात्रि के समय इन स्थलों की निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

एसआईटी की जिम्मेदारी

तीन सदस्यीय एसआईटी को व्यापक जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम को यह निर्धारित करना है कि निर्माण कार्य के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त थीं या नहीं, सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, और प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा था या नहीं।

एसआईटी (Engineer Death Case) को यह भी जांचना है कि क्या प्राधिकरण के अधिकारियों और बिल्डर के बीच कोई मिलीभगत थी। पांच दिवस में प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट सभी पहलुओं को समाहित करेगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा करेगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना एक युवा प्रतिभाशाली जीवन की क्षति और एक परिवार के सपनों के टूटने की कहानी है। आशा है कि जांच निष्पक्ष होगी और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

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