International Drug Traffickers: ‘ऑपरेशन ग्लोबल हंट’ के तहत भारतीय एजेंसियों के रडार पर आए 10 सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर
दुबई से तुर्किये तक फैले नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर, कई कुख्यात तस्कर रडार पर
International Drug Traffickers: भारत में मादक पदार्थों की तस्करी अब केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह दुबई, तुर्किये, कनाडा, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन और अफ्रीकी देशों तक फैले एक बेहद संगठित बहु-अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का रूप ले चुकी है।
इस वैश्विक नेटवर्क को ध्वस्त करने और विदेशों में सुरक्षित पनाहगाहों में बैठे मास्टरमाइंड्स पर शिकंजा कसने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन ग्लोबल हंट’ तेज कर दिया है। इस अभियान के तहत कई कुख्यात सरगनाओं को प्रत्यर्पित और डिपोर्ट कर भारत लाया जा चुका है, जबकि कई अन्य के खिलाफ इंटरपोल के रेड और सिल्वर नोटिस जारी कर शिकंजा कसा जा रहा है।
International Drug Traffickers: ऑपरेशन ग्लोबल हंट, विदेशी ठिकानों, हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क पर प्रहार
भारतीय जांच एजेंसियों की रणनीति अब केवल घरेलू स्तर पर खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में बैठे सिंडिकेट के फाइनेंसरों, सप्लायर्स और मुख्य साजिशकर्ताओं को कानून के कटघरे में खड़ा करना है।
दुबई, इस्तांबुल और बैंकॉक जैसे शहरों को तस्करों ने लंबे समय से अपने सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया, जहां से वे एन्क्रिप्टेड ऐप्स, हवाला चैनलों, फर्जी शेल कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए नशीले पदार्थों के अवैध धन का लेन-देन करते रहे हैं। इंटरपोल और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से भारत अब इन अपराधियों को सीधे विदेशी धरती से पकड़कर देश ला रहा है।
वीरेंद्र सिंह बसोया: पुणे और दिल्ली के मेगा ड्रग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड
वीरेंद्र सिंह बसोया को अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क का सबसे बड़ा किंगपिन माना जाता है। वह लंबे समय तक दुबई में बैठकर सिंगापुर, दुबई और भारत के बीच हजारों करोड़ रुपये की मेफेड्रोन (Mephedrone) और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई चेन संचालित कर रहा था।
दिल्ली और पुणे में पकड़े गए भारी मात्रा में नशीले पदार्थों के मामलों में मुख्य आरोपी के तौर पर चिन्हित होने के बाद, भारतीय एजेंसियों ने उसे यूएई से डिपोर्ट करवाकर भारत लाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। बसोया की गिरफ्तारी को ऑपरेशन ग्लोबल हंट की सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
मोहम्मद सलीम डोला: डी-कंपनी लिंक और ‘म्याऊं-म्याऊं’ का वैश्विक सौदागर
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का बेहद करीबी माना जाने वाला मोहम्मद सलीम डोला वर्षों से भारत से फरार रहकर तुर्किये में अपने अवैध नेटवर्क का संचालन कर रहा था। डोला पूरे भारत में मेफेड्रोन (MD/म्याऊं-म्याऊं) की अवैध फैक्टरियों और सप्लायर्स को कच्चा माल व फंडिंग मुहैया कराने का प्रमुख स्रोत था।
महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में दर्जनों संगीन मामलों में वांछित डोला को भारतीय एजेंसियों ने तुर्किये से भारत वापस लाकर बड़ी सफलता हासिल की। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसके हवाला नेटवर्क और संपत्तियों पर भी व्यापक जब्ती की कार्रवाई की है।
संदीप धुनिया और पवन ठाकुर: 13,000 करोड़ का सिंडिकेट और कोकीन किंगपिन
संदीप धुनिया का नाम दिल्ली में उजागर हुए लगभग ₹13,000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट में प्रमुखता से सामने आया। जांच रिपोर्टों के अनुसार वह दुबई से निकलकर पाकिस्तान में छिपा हुआ है और उसे वापस लाने के लिए इंटरपोल के जरिए रेड नोटिस की प्रक्रिया जारी है।
वहीं पवन ठाकुर दिल्ली में जब्त की गई ₹2,500 करोड़ की हाई-ग्रेड कोकीन की अंतरराष्ट्रीय खेप का मुख्य सरगना है। ठाकुर दुबई से बैठकर लैटिन अमेरिका और यूरोपीय बंदरगाहों से भारत में कोकीन की तस्करी करवाता था। एनसीबी की पहल पर उसके खिलाफ इंटरपोल का सिल्वर नोटिस जारी कराया गया और उसके नेटवर्क से जुड़े सैकड़ों म्यूल बैंक खातों को फ्रीज किया गया।
जसविंदर उर्फ जैज और सनी कालरा: समुद्री मार्ग और नीदरलैंड्स से MDMA सप्लाई
पंजाब से संचालित होने वाले ड्रग नेटवर्क में जसविंदर सिंह उर्फ जैज का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिस पर समुद्री रास्तों से 500 किलोग्राम से अधिक हेरोइन भारत भेजने का आरोप है। उसे दुबई में सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिया गया था।
वहीं सनी कालरा नीदरलैंड्स और पश्चिमी यूरोप से भारत व अन्य एशियाई देशों में उच्च गुणवत्ता वाली एमडीएमए (MDMA/एक्स्टसी) और पार्टी ड्रग्स की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का मुख्य संचालक रहा है। यूरोप से आने वाली सिंथेटिक दवाओं की खेपों में उसकी सीधी भूमिका की जांच की जा रही है।
नार्को-टेरर और पुराने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सरगना
जसमीत सिंह हकीमजादा पर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से नशीले पदार्थों की आपूर्ति और उससे मिलने वाले धन को आतंकी फंडिंग में लगाने के गंभीर आरोप हैं, जिसके चलते एनआईए ने उसके खिलाफ विस्तृत चार्जशीट दायर की है। वहीं कनाडा में शरण लिए बैठा परमजीत सिंह धालीवाल एनसीबी की मोस्ट वांटेड सूची में लंबे समय से शामिल है।
इसके अलावा, विक्की गोस्वामी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 टन एफेड्रिन जब्ती मामले और अफ्रीकी सिंडिकेट के साथ गठजोड़ को लेकर अमेरिकी व भारतीय एजेंसियों की रडार पर रहा। वहीं डी-कंपनी का फाइनेंसर रहा दिवंगत इकबाल मिर्ची भले ही जीवित न हो, लेकिन ईडी ने उसके अंतरराष्ट्रीय ड्रग-मनी और रियल एस्टेट साम्राज्य से जुड़ी सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर पूरे वित्तीय ढांचे को ध्वस्त किया है।
International Drug Traffickers: वैश्विक समन्वय से टूट रहा ड्रग माफिया का तिलिस्म
भारतीय सुरक्षा बलों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के बीच बढ़ते समन्वय ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया का कोई भी कोना अब अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं है।
डिजिटल सर्विलांस, वित्तीय फोरेंसिक और प्रत्यर्पण संधियों के प्रभावी उपयोग से भारत ने ड्रग सिंडिकेट की आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है। ऑपरेशन ग्लोबल हंट के तहत चल रही यह आक्रामक कार्रवाई आने वाले दिनों में देश से मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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