Diwali Decoration Ideas: कपड़ों की कतरनों से बनाएं 4 सुंदर डेकोर आइटम

सिलाई की बची कतरनों, पुरानी साड़ियों की लेस और गोटा-पट्टी से बनाएं खूबसूरत तोरण, डेकोरेटिव बेल्स और रंगीन लटकन।

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Diwali Decoration Ideas: रोशनी और उमंग के सबसे बड़े पावन पर्व दीपावली पर घर के हर कोने को सजाने-संवारने की परंपरा सदियों पुरानी है। आमतौर पर लोग दिवाली की सजावट के लिए बाजारों से महंगी प्लास्टिक की लड़ियां, रेडीमेड तोरण और चीनी सजावटी सामान खरीदने में भारी रकम खर्च करते हैं। हालांकि, यदि थोड़ी-सी रचनात्मकता और सूझबूझ अपनाई जाए, तो बिना जेब ढीली किए घर के बेकार सामान से भी आशियाने को एक अनूठा, पारंपरिक और कलात्मक रूप दिया जा सकता है।

घरों में अक्सर नए कुर्ते, ब्लाउज या सूट सिलवाने के बाद दर्जी से मिली कपड़े की रंग-बिरंगी कतरनें अलमारियों के कोनों में बेकार पड़ी रह जाती हैं। इन बेकार समझी जाने वाली कतरनों, पुरानी साड़ियों की लेस और गोटा-पट्टी का इस्तेमाल करके बेहद खूबसूरत तोरण, वॉल हैंगिंग और सजावटी बीड्स तैयार किए जा सकते हैं। इससे न केवल कपड़ों की बर्बादी रुकती है, बल्कि आपका आशियाना बाजारू सामान से अलग एकदम सजीव और पारंपरिक सौंदर्य से चमक उठता है।

Diwali Decoration Ideas: सिलाई की रंगीन कतरनों से तैयार करें आकर्षक फैब्रिक बीड्स

सूट, ब्लाउज या पर्दों की सिलाई के बाद बचने वाले छोटे-छोटे रेशमी, सिल्क, ब्रोकेड या कॉटन के टुकड़ों से बहुत ही सुंदर ‘फैब्रिक बीड्स’ (कपड़े के मोती) बनाए जा सकते हैं। इन्हें तैयार करने के लिए बस थोड़ी-सी रुई (कॉटन) या फाइबर, सुई-धागा और गोटा-पट्टी की आवश्यकता होती है।

कपड़े के चौकोर टुकड़े के बीच में थोड़ी-सी रुई रखकर पोटली का आकार दें और नीचे से धागे से मजबूती से बांध दें। इसके बाद ऊपर से सुनहरी गोटा-पट्टी या जरी का धागा लपेटकर इसे पारंपरिक राजस्थानी लुक दिया जा सकता है। अलग-अलग चटक रंगों जैसे लाल, पीले, गुलाबी और फिरोजी रंग के बीड्स बनाकर उन्हें एक साथ पिरोया जा सकता है। इन बीड्स का उपयोग पर्दों की लटकन, पूजा की थाली की सजावट या दीवारों के खाली कोनों को सजाने के लिए शानदार तरीके से किया जा सकता है।

मुख्य द्वार के लिए पुराने कपड़ों और गोटा-पट्टी से बनाएं शुभ तोरण

भारतीय परंपरा में दिवाली के पावन अवसर पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर तोरण (बंदनवार) लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। बाजार में मिलने वाले प्लास्टिक के तोरणों के बजाय कपड़े की कतरनों से बना हस्तनिर्मित तोरण घर को वास्तविक उत्सव का अहसास कराता है।

इसके लिए लाल, पीले और हरे रंग की कतरनों को बराबर आकार में तिकोने या पत्तों (आम के पत्तों) के रूप में काट लें। इन टुकड़ों के किनारों पर सुनहरी लेस या गोटा-पट्टी सिल दें ताकि धागे न निकलें। इसके बाद एक मजबूत सूती या जरी की डोरी में इन पत्तों को बराबर दूरी पर पिरोएं। पत्तों के बीच में फैब्रिक बीड्स, छोटे शीशे (मिरर) और पीतल की छोटी घुंघरू या घंटियां जोड़ दें। यह पारंपरिक तोरण मुख्य द्वार, बैठक या पूजा घर की चौखट पर बेहद मनमोहक दिखाई देता है।

पुरानी साड़ियों की लेस से बनाएं पारंपरिक डेकोरेटिव बेल्स

पुरानी साड़ियों, दुपट्टों या लहंगों से निकली चौड़ी और नक्काशीदार लेस के टुकड़े अक्सर घरों में संभालकर रख दिए जाते हैं। इनसे बहुत ही आकर्षक सजावटी घंटियां (डेकोरेटिव बेल्स) बनाई जा सकती हैं। इसके लिए किसी पुराने इनविटेशन कार्ड, कार्डशीट या बुकरम को काटकर शंकु (कोन) का आकार दें और गोंद से चिपका लें।

अब इस कोन के चारों तरफ पुरानी लेस को लपेटते हुए चिपकाएं। कोन के निचले सिरे पर छोटी-छोटी मोतियों की लटकन या गोटा-फूल जोड़ें और ऊपरी सिरे पर लटकने के लिए सुनहरी डोरी बांध दें। जब इन बेल्स को लिविंग रूम की खिड़कियों, बालकनी की रेलिंग या प्रवेश द्वार के दोनों कोनों पर लगाया जाता है, तो ये किसी महंगे बुटीक डेकोर की तरह नजर आती हैं।

कपड़ों की पतली स्ट्रिप्स से बनाएं राजस्थानी डमरू बीड्स और लटकन

यदि आपके पास कपड़े के लंबे और पतले कतरन बचे हैं, तो उनका सबसे बेहतरीन उपयोग ‘डमरू बीड्स’ बनाने में किया जा सकता है। इसके लिए टिशू पेपर के खाली रोल, दवाइयों के खाली डिब्बे या पतले कार्डबोर्ड को डमरू या बेलनाकार आकार में काट लें।

कपड़े की रंग-बिरंगी पट्टियों को फेविकोल की मदद से इस आधार पर कसकर लपेटें। सिरों को अच्छी तरह चिपकाने के बाद बीच के संकरे हिस्से पर पतली जरी की डोरी या चमकीली लेस बांधें। इन डमरू बीड्स को मोतियों, कौड़ियों और ऊन के फुंदनों (पॉम-पॉम) के साथ एक लंबी डोरी में पिरोकर शानदार डोर हैंगिंग तैयार की जा सकती है। इसे कमरे के दरवाजों के दोनों किनारों पर लगाने से पूरा कमरा उत्सव के रंगों में खिल उठता है।

Diwali Decoration Ideas: इको-फ्रेंडली दिवाली सजावट अपनाएं और सुरक्षित त्योहार मनाएं

सिलाई की बची कतरनों से घर सजाने का यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ ‘जीरो वेस्ट’ जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है। हाथ से बनी इन सजावटों में परिवार का साझा स्नेह और रचनात्मकता झलकती है, जो बाजार के किसी भी रेडीमेड उत्पाद में संभव नहीं है। कपड़े से बनी इन सजावटी वस्तुओं को त्योहार के बाद धोकर सुरक्षित रखा जा सकता है और अगले साल पुनः उपयोग में लाया जा सकता है।

हालांकि, कपड़े और कार्डबोर्ड से बनी इन सजावटी चीजों का उपयोग करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। इन्हें पूजा घर में जलते हुए अखंड ज्योति, तेल के खुले दीयों या मोमबत्तियों की लपटों से सुरक्षित दूरी पर ही लगाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अग्नि दुर्घटना की आशंका न रहे। थोड़ी-सी कल्पनाशीलता और मेहनत से आप अपनी बेकार समझी जाने वाली कतरनों से इस दिवाली अपने घर को सबसे अनूठा और भव्य स्वरूप प्रदान कर सकते हैं।

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