पायलटों के लिए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के नियम हुए और सख्त, तीन बार पॉजिटिव आने पर रद्द होगा लाइसेंस

DGCA ने उड़ान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया बड़ा कदम, 9 फरवरी से लागू हुए संशोधित नियम, विदेशी पायलटों पर भी होगी सख्ती

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DGCA New Rule: विमान यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों के लिए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट से जुड़े नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। नए नियमों के तहत यदि कोई पायलट तीन बार प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में शराब सेवन के लिए पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, ये संशोधित नियम 9 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य भारतीय आसमान में उड़ान भरने वाले सभी विमानों की सुरक्षा को और मजबूत करना है। DGCA का यह कदम विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

विशेष बात यह है कि ये नियम केवल भारतीय पायलटों पर ही नहीं, बल्कि भारत में उड़ान भरने वाले विदेशी पायलटों पर भी समान रूप से लागू होंगे। विदेशी पायलटों का FATA (फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथोराइजेशन) भी रद्द किया जा सकता है और उन्हें दोबारा अनुमति नहीं दी जाएगी।

DGCA New Rule: पहली बार पॉजिटिव – काउंसलिंग और ड्यूटी से हटाना

संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई पायलट पहली बार कन्फर्मेटरी ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में 0.009% BAC (Blood Alcohol Content) या mg/dl तक पॉजिटिव पाया जाता है, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे मामले में संबंधित क्रू मेंबर को तुरंत ड्यूटी रोस्टर से हटा दिया जाएगा। इसके बाद उसकी व्यापक काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। शेड्यूल्ड ऑपरेटर यानी नियमित एयरलाइंस के मामले में यह काउंसलिंग चीफ मेडिकल ऑफिसर और चीफ ऑफ फ्लाइट सेफ्टी द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी।

अन्य ऑपरेटर के मामले में यह जिम्मेदारी अकाउंटेबल मैनेजर और चीफ ऑफ फ्लाइट सेफ्टी अथवा CFI (चीफ फ्लाइट इंस्ट्रक्टर) की होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे सभी मामलों की जानकारी DGCA को अनिवार्य रूप से दी जाएगी। हालांकि, पहली बार के उल्लंघन को पायलट के लाइसेंस पर स्थायी रिकॉर्ड के रूप में दर्ज नहीं किया जाएगा, जिससे पायलट को सुधार का एक मौका मिलेगा।

दूसरी बार पॉजिटिव – लाइसेंस निलंबन

नियमों में और सख्ती करते हुए DGCA ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पायलट दूसरी बार प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा।

इसके अलावा, यदि कोई पायलट एक बार पॉजिटिव पाया जाता है और दूसरी बार जानबूझकर टेस्ट से बचने का प्रयास करता है या टेस्ट मिस करता है, तो भी उसके लाइसेंस को निलंबित किया जाएगा। यह प्रावधान टेस्ट से बचने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए लाया गया है।

विशेष रूप से चिंताजनक मामलों में और भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। यदि कोई पायलट पोस्ट-फ्लाइट यानी उड़ान के बाद के ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो इसे अत्यंत गंभीर माना जाएगा। ऐसे मामले में पायलट का लाइसेंस या अनुमोदन तीन साल की लंबी अवधि के लिए निलंबित किया जा सकता है। यही नियम टेस्ट मिस करने पर भी लागू होगा।

DGCA New Rule: तीसरी बार पॉजिटिव – स्थायी रूप से रद्द होगा लाइसेंस

नए नियमों में सबसे कड़ा प्रावधान तीसरी बार के उल्लंघन के लिए है। यदि कोई पायलट तीन बार उड़ान से पहले ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसका पायलट लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया जाएगा।

यह एक स्थायी निर्णय होगा और ऐसे पायलट को भविष्य में किसी भी परिस्थिति में भारतीय आसमान में विमान उड़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह प्रावधान उन पायलटों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हैं और यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं।

12 घंटे का अनिवार्य अंतराल – केवल टेस्ट ही काफी नहीं

DGCA ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि उड़ान सुरक्षा केवल रक्त में अल्कोहल के स्तर पर निर्भर नहीं करती। कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति का रक्त अल्कोहल स्तर शून्य या नगण्य हो सकता है, लेकिन ‘हैंगओवर’ के कारण उसकी शारीरिक और मानसिक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित रह सकती है।

हैंगओवर की स्थिति में व्यक्ति की प्रतिक्रिया गति, निर्णय लेने की क्षमता और एकाग्रता प्रभावित होती है, जो विमान संचालन के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकती है। इसी कारण से DGCA ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि उड़ान से पहले कम से कम 12 घंटे तक शराब से पूर्ण दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारी मात्रा में शराब के सेवन के प्रभाव 48 से 72 घंटे तक भी शरीर में बने रह सकते हैं। DGCA ने एयरलाइंस को भी अधिकार दिया है कि वे अपने सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम के तहत इससे भी अधिक सख्त नियम लागू कर सकती हैं।

DGCA New Rule: विदेश से आने वाली उड़ानों पर विशेष प्रावधान

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए DGCA ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विदेश से भारत आने वाली उड़ानों के लिए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट का नियम भारत में लैंडिंग के बाद लागू होगा।

जो उड़ानें विदेश से आकर भारत में केवल ट्रांजिट करती हैं यानी यात्रियों को उतारे-चढ़ाए बिना आगे की यात्रा के लिए रुकती हैं, उनके लिए विशेष व्यवस्था है। ऐसे मामलों में एयरलाइन ऑपरेटर को प्रस्थान स्थल पर ही प्री-फ्लाइट मेडिकल सुविधा और ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

यदि किसी कारणवश कोई क्रू मेंबर प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के बिना उड़ान संचालित करता है, तो एयरलाइन के चीफ ऑफ ऑपरेशंस और संबंधित क्रू मेंबर को पहले लैंडिंग पोर्ट पर अनिवार्य रूप से पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट कराना होगा। यदि रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो उसे आगे की उड़ानों के लिए अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी DGCA को देना अनिवार्य होगा।

क्यों आए नए नियम?

पिछले साल सितंबर 2025 में DGCA ने क्रू मेंबर्स के लिए उड़ान से पहले और बाद में मेडिकल जांच की प्रक्रिया से जुड़े सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। उस समय विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे गए थे।

उद्योग विशेषज्ञों, पायलट संघों और सुरक्षा विशेषज्ञों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए ये संशोधित नियम तैयार किए गए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकना है।

DGCA New Rule: निष्कर्ष

DGCA द्वारा लागू किए गए ये सख्त नियम भारतीय विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास हैं। तीन स्तरीय दंड प्रणाली – पहली बार काउंसलिंग, दूसरी बार निलंबन और तीसरी बार स्थायी रद्दीकरण – एक संतुलित और प्रगतिशील दृष्टिकोण है। यह पायलटों को सुधार का अवसर देता है, लेकिन साथ ही बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए कड़ी सजा का भी प्रावधान करता है। 12 घंटे के अनिवार्य अंतराल और हैंगओवर के प्रभाव को मान्यता देना भी एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक कदम है। विदेशी पायलटों पर भी समान नियमों का लागू होना यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय आसमान में उड़ने वाले सभी विमान समान सुरक्षा मानकों का पालन करें।

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