Delhi News: CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा, अभिजीत दीपके और नेहा बोरा के सामने लगे नारे
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में CJP और AISA की संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान नारेबाजी, SIR विवाद और तिरंगा मार्च पर चर्चा।
Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान भारी हंगामे और अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा जब पत्रकारों को संबोधित करने मंच पर पहुंचे, तभी हॉल में मौजूद कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने आक्रामक रूप से नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यक्रम की शुरुआत होते ही विरोध कर रहे लोगों ने ‘बंद करो’ और ‘दफा हो जाओ’ जैसे तीखे नारे लगाए, जिससे आयोजन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए नेहा बोरा ने तुरंत आयोजकों से व्यवधान डालने वालों को बाहर निकालने का आग्रह किया, जबकि अभिजीत दीपके मंच से स्थिति को शांत कराने का प्रयास करते नजर आए। यह घटनाक्रम सीजेपी द्वारा 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से ठीक एक दिन पहले सामने आया है।
Delhi News: प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामे और तीखी नारेबाजी का पूरा घटनाक्रम
प्रेस वार्ता की शुरुआत में जैसे ही आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की सुप्रसिद्ध रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों के साथ अपनी बात रखनी शुरू की, सभागार के पिछले हिस्से से कुछ लोगों ने अचानक व्यवधान डालना शुरू कर दिया। विरोध करने वाले लगातार कार्यक्रम को बंद करने की मांग कर रहे थे और आयोजकों के खिलाफ ऊंची आवाज में नारेबाजी कर रहे थे। अप्रत्याशित विरोध के कारण प्रेस वार्ता को कुछ समय के लिए बीच में ही रोकना पड़ा।
शोर-शराबा बढ़ने पर नेहा बोरा ने माइक से अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए और यदि किसी को असहमति है तो वह बात रखने का अवसर दे, न कि आयोजन को बाधित करे। उन्होंने आयोजन समिति से अपील की कि जो लोग जानबूझकर बाधा पहुंचा रहे हैं, उन्हें हॉल से बाहर किया जाए। वहीं अभिजीत दीपके भी मंच से लोगों को शांत रहने और कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलने देने का अनुरोध करते दिखाई दिए। हालांकि नारेबाजी करने वाले लोगों की औपचारिक पहचान को लेकर रिपोर्टों में कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
अभिजीत दीपके के गंभीर आरोप: चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा तैनाती पर सवाल
माहौल सामान्य होने के बाद अपने संबोधन में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दिनों से छात्र और युवा लोकतांत्रिक अधिकारों तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के मुद्दे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन अत्यधिक बल प्रयोग कर उन्हें जंतर-मंतर और अन्य सार्वजनिक स्थलों से खदेड़ रहा है। दीपके ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाओं को बाधित किया गया तथा प्रदर्शनकारियों को गैर-कानूनी ढंग से हिरासत में लिया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए दीपके ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के निर्णयों के विरुद्ध उठने वाली आवाज को दबाने के लिए प्रशासन इतना सख्त रुख क्यों अपना रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती पर भी आपत्ति जताई और कहा कि तिरंगा फहराना या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर भारतीय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और त्योहारों के दौरान आम जनजीवन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ही सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।
पत्रकारों से कथित बदसलूकी और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा
संयुक्त प्रेस वार्ता में आइसा नेता नेहा बोरा ने हालिया प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों के साथ हुई कथित ज्यादतियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कवर कर रहे मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और उनके कैमरे छीनने व फुटेज डिलीट कराने की घटनाएं सामने आई हैं।
नेहा बोरा ने एक महिला पत्रकार के साथ कथित अभद्रता के मामले का हवाला देते हुए सवाल किया कि जब पीड़ित पत्रकार ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो उसके बाद उल्टे जवाबी एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र लोकतंत्र में प्रेस का काम सत्ता से सवाल पूछना और जमीन की हकीकत जनता के सामने लाना है, न कि प्रशासनिक दबाव में काम करना। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों के मताधिकार और असहमति की आवाज को केवल कानूनी प्रतिबंध लगाकर दबाया नहीं जा सकता।
क्या है 16 अक्टूबर का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च और जमीनी हलचल?
यह संयुक्त प्रेस वार्ता दरअसल 16 अक्टूबर 2026 को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च की पृष्ठभूमि में बुलाई गई थी। सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के विरोध में दीपके ने देश भर के युवाओं और नागरिकों से तिरंगा लेकर जुटने की अपील की है।
प्रस्तावित मार्च को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, जिसमें व्यवसायिक केंद्र में संभावित अव्यवस्था की आशंका जताई गई थी। यद्यपि उच्च न्यायालय ने विरोध-प्रदर्शन पर एकतरफा रोक लगाने से इनकार करते हुए पुलिस को सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, वहीं दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। आगामी 3 नवंबर को अदालत में इस मामले पर आगे की सुनवाई होनी है।
Delhi News: चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर (SIR) को लेकर गहराता विवाद
इस पूरे राजनीतिक और सामाजिक तनाव की जड़ में निर्वाचन आयोग द्वारा कराया जा रहा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) है। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते वैध नागरिकों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की अवधारणा प्रभावित हो सकती है।
सीजेपी और सहयोगी छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से पद छोड़ने और इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। दूसरी ओर, प्रेस वार्ता में हुए इस हंगामे ने यह साबित कर दिया है कि राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तीव्र हो चुका है, जहां एक ओर विरोध मार्च की तैयारियां हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक और जन-प्रतिरोध की स्थितियां भी खड़ी हो रही हैं।
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