Delhi-Dehradun Expressway: ऊपर फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, नीचे आराम से टहलेंगे हाथी, NHAI ने बनाया एशिया का सबसे लंबा 12 KM वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
एशिया का सबसे लंबा 12 KM वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, ऊपर तेज गाड़ियां, नीचे हाथी-वन्यजीव सुरक्षित; 6.5 घंटे का सफर घटकर 2.5 घंटे, 1200 करोड़ की लागत
Delhi-Dehradun Expressway: भारत में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधने की एक अनूठी और प्रेरणादायक मिसाल पेश हो रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के गणेशपुर-देहरादून सेक्शन को एक ऐसे अनूठे और क्रांतिकारी तरीके से डिजाइन किया है जो पूरे देश के लिए एक नई मिसाल बन गई है। इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे में ऊपर से तेज रफ्तार गाड़ियां दौड़ेंगी और नीचे से हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीव बिल्कुल बेरोकटोक और सुरक्षित तरीके से अपने प्राकृतिक आवास में आते-जाते रहेंगे। यह सड़क परियोजना विकास और प्रकृति के बीच के पुराने और गहरे टकराव को खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और साहसी कदम है।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है जो इसे न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया में एक अनूठा और विशेष स्थान दिलाता है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय को मौजूदा 6.5 घंटे से घटाकर मात्र 2.5 से 3 घंटे कर देगा जो उत्तराखंड और दिल्ली के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क को पूरी तरह बदल देगा।
राजाजी नेशनल पार्क के बीच से गुजरती है यह सड़क
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का गणेशपुर-देहरादून सेक्शन एक अत्यंत पारिस्थितिकी संवेदनशील और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस एलिवेटेड स्ट्रक्चर का एक किनारा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटा हुआ है। राजाजी नेशनल पार्क उत्तराखंड का एक प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है जहां हाथी, हिरण, तेंदुआ, बाघ और कई दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियां पाई जाती हैं। इस पार्क के दूसरी तरफ रिस्पना और बिंदाल नदियां बहती हैं। ऐसे संवेदनशील इलाके से सड़क बनाना एक बेहद बड़ी चुनौती थी लेकिन NHAI के इंजीनियरों और पर्यावरणविदों ने मिलकर एक ऐसा अभिनव समाधान निकाला जिसने सड़क निर्माण और वन्यजीव संरक्षण दोनों को एक साथ संभव कर दिखाया।
Delhi-Dehradun Expressway: 575 पिलरों पर टिका अनूठा एलिवेटेड ढांचा
इस पूरे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर वाले हिस्से के निर्माण में लगभग 1,200 करोड़ रुपये की भारी लागत आई है। यह एलिवेटेड सड़क पूरी तरह 575 मजबूत पिलरों पर टिकी हुई है। इन पिलरों के बीच पर्याप्त जगह छोड़ी गई है ताकि हाथी और अन्य बड़े वन्यजीव बिना किसी रुकावट या डर के स्वतंत्र रूप से नीचे से गुजर सकें। इस अनूठी इंजीनियरिंग संरचना की वजह से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और उनकी आवाजाही का रास्ता बाधित नहीं होता। यह ढांचा जमीन से काफी ऊंचाई पर बना है जिससे नीचे जानवरों को पर्याप्त और खुली जगह मिलती है। यह तकनीकी चमत्कार भारतीय इंजीनियरिंग की दक्षता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का एक शानदार उदाहरण है।
वन्यजीवों के लिए किए गए विशेष इंतजाम
NHAI ने इस एक्सप्रेसवे में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनकी सुविधा के लिए कई विशेष और व्यापक इंतजाम किए हैं। इसमें समर्पित एनिमल क्रॉसिंग बनाई गई हैं जो विशेष रूप से वन्यजीवों के आने-जाने के लिए डिजाइन की गई हैं। जंगली जानवरों को सड़क पर आने से रोकने के लिए मजबूत और विशेष प्रोटेक्टिव फेंसिंग भी लगाई गई है। एक्सप्रेसवे के पूरे मार्ग पर इको-सेंसिटिव यानी पर्यावरण संवेदनशील योजना को ध्यान में रखकर निर्माण किया गया है। इसके अलावा कई अंडरपास भी बनाए गए हैं जिनसे छोटे वन्यजीव और अन्य प्राणी सुरक्षित रूप से सड़क के पार जा सकते हैं। इन सभी उपायों से यह सुनिश्चित किया गया है कि इस आधुनिक हाईवे के बनने से वन्यजीवों के जीवन और उनके प्राकृतिक व्यवहार पर न्यूनतम नकारात्मक प्रभाव पड़े।
Delhi-Dehradun Expressway: 6.5 घंटे का सफर होगा मात्र 2.5 घंटे में
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पूरा होने पर यात्रियों को जो सबसे बड़ा फायदा होगा वह है यात्रा समय में भारी कमी। इस 6-लेन के आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर जो अभी 6.5 घंटे में पूरा होता है वह घटकर मात्र 2.5 से 3 घंटे में पूरा हो जाएगा। यानी सफर का समय लगभग आधे से भी कम हो जाएगा। कारों के लिए इस एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है जबकि भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा होगी। इससे न केवल यात्री समय की बचत होगी बल्कि ईंधन की भी बचत होगी और व्यापार और पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
12,000 करोड़ की लागत, चार हिस्सों में बंटा महाप्रकल्प
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर कुल लगभग 12,000 करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार हो रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना चार हिस्सों में बंटी हुई है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली में अक्षरधाम के पास से शुरू होकर बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक जाएगा। इस तरह यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई जिलों को उत्तराखंड से जोड़ेगा जिससे पूरे उत्तरी भारत में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
Delhi-Dehradun Expressway: आधुनिक सुविधाओं से लैस है यह हाईवे
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में कई आधुनिक और उन्नत तकनीकी सुविधाएं शामिल की गई हैं। इसमें 340 मीटर लंबी डेटकाली सुरंग बनाई गई है जो पहाड़ी इलाके में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा 16 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट बनाए गए हैं जिससे अलग-अलग शहरों और कस्बों से एक्सप्रेसवे तक आसान पहुंच होगी। 113 अंडरपास और 5 रेलवे ओवरब्रिज भी इस परियोजना का हिस्सा हैं। सहारनपुर का 80 किलोमीटर लंबा हिस्सा और 12 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड पहले ही पूरी तरह तैयार हो चुकी है और कुछ हिस्सों पर यातायात भी शुरू हो गया है।
यह पूरी परियोजना 2020 में स्वीकृत हुई थी और दिसंबर 2021 में इसकी आधारशिला रखी गई थी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे न केवल उत्तराखंड और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा बल्कि यह भारत में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बुनियादी ढांचे के विकास का एक ऐतिहासिक उदाहरण बनेगा जिसे दुनियाभर में सराहा जाएगा।
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