इजरायल-ईरान युद्ध का 26वां दिन,- बैलिस्टिक मिसाइलों की 80वीं लहर से बढ़ी तबाही, येरुशलम-तेल अवीव में हमले तेज, ट्रंप की शांति डील पर टिकी वैश्विक नजर, मध्य पूर्व में तनाव चरम पर
80वीं मिसाइल लहर के बीच ट्रंप की शांति डील पर टिकी दुनिया की नजर
Israel Iran war: जब एक तरफ शांति वार्ता की बातें हो रही हों और दूसरी तरफ मिसाइलें आसमान चीर रही हों, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि यह युद्ध वाकई अपने अंत की तरफ बढ़ रहा है या सबसे खतरनाक मोड़ पर आ गया है।
Israel Iran war: इजरायल ईरान युद्ध का आज क्या है ताजा हाल
मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष का आज 26वां दिन है। ईरान की सेना ने इजरायल के खिलाफ बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की 80वीं लहर शुरू करने की आधिकारिक घोषणा की है। ईरान ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है। येरुशलम में दो जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी और पूरे शहर में युद्ध के सायरन बज उठे। नागरिकों को तत्काल सुरक्षित बंकरों में जाने की अपील की गई। तेल अवीव और हाईफा में भी ईरानी मिसाइलों का हमला हुआ है।
Israel Iran war: ईरान के हमले कितने सटीक और घातक हो रहे हैं
मंगलवार को उत्तरी इजरायल के सफेद इलाके में ईरान ने मध्यम दूरी की एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इजरायल के वायु रक्षा तंत्र ने इसे कई बार रोकने की कोशिश की लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया। इजरायली रक्षा बलों का दावा है कि वे ईरान के अधिकांश हमलों को नाकाम कर रहे हैं। लेकिन दक्षिणी इजरायल में एक ईरानी मिसाइल हमले के बाद लगी भीषण आग की तस्वीरें और वीडियो इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। वेस्ट बैंक के हेब्रोन पर भी ईरान ने एक के बाद एक कई मिसाइलें दागीं।
Israel Iran war: ईरान ने इजरायल पर जवाबी हमले में क्या निशाना बनाया
इजरायल ने ईरान के मिसाइल हमलों के जवाब में इस्फहान स्थित परमाणु स्थल पर जोरदार हमला किया। इसके साथ ही वहां मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण स्थल और हथियार निर्माण इकाइयों को भी निशाना बनाया गया। इजरायल ने तेहरान और बेरुत के कुछ इलाकों पर भी हवाई हमले किए हैं। दोनों पक्षों की ओर से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं हालांकि दोनों तरफ से सटीक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।
Israel Iran war: ट्रंप ने क्या बड़ा दावा किया और शांति डील की स्थिति क्या है
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के गृह सुरक्षा मंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी डील होने वाली है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की पुरानी सैन्य शक्ति लगभग समाप्त हो चुकी है और अब नई टीम के साथ चर्चा जारी है। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरान के अंदर 9000 से अधिक सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने यह भी बताया कि युद्ध खत्म करने के बदले अमेरिका को तेल और गैस क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल रहा है। हालांकि 15 सूत्री शांति प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Israel Iran war: ईरान ट्रंप के किस प्रतिनिधि से बात करना चाहता है
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ या जेरेड कुश्नर से किसी भी तरह की वार्ता करने को तैयार नहीं है। तेहरान का कहना है कि वह सीधे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बातचीत करना पसंद करेगा क्योंकि वेंस का रुख अपेक्षाकृत नरम माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, “ईरान का यह रुख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे साफ होता है कि तेहरान वार्ता की मेज पर अपनी शर्तें खुद तय करना चाहता है और किसी दबाव में नहीं आना चाहता।”
Israel Iran war: इराक और क्षेत्रीय मोर्चे पर क्या हो रहा है
यह संघर्ष अब केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहा। इराक के इरबिल में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। इसके जवाब में इराकी मिलिशिया ने अमेरिका के एक हेलीकॉप्टर को मार गिराया। यह हमला तब हुआ जब एक दिन पहले मिलिशिया के मुख्यालय पर एक हमले में उसके प्रमुख कमांडर समेत 14 लड़ाके मारे गए थे। ईरान ने इन घटनाओं के बीच यह भी ऐलान किया है कि वह खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर एक नया सुरक्षा गठबंधन बनाना चाहता है जिसमें अमेरिका और इजरायल की कोई भागीदारी नहीं होगी।
Israel Iran war: ईरान और चीन के बीच क्या हो रही है बातचीत
इस संघर्ष के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत की और युद्ध की ताजा स्थिति से चीन को अवगत कराया। यह संकेत है कि ईरान अपने वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को इस दौरान भी सक्रिय रख रहा है। चीन इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं है लेकिन वह ईरान का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और कूटनीतिक साझेदार है। इस बातचीत को क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष एक ऐसे नाजुक मोड़ पर है जहां युद्ध और शांति दोनों की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। ट्रंप की डील की कोशिशें और ईरान की मिसाइलें एक साथ चल रही हैं। यह तय है कि जब तक दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बनती तब तक यह संघर्ष न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना रहेगा।
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