मध्य-पूर्व युद्ध ने कच्चे तेल को आग लगाई, WTI क्रूड 10% उछलकर 75 डॉलर के पार, Barclays ने ब्रेंट का अनुमान 100 डॉलर तक बढ़ाया, भारत की चिंता बढ़ी

ईरान पर US-इजरायल हमलों के बाद WTI क्रूड 75 डॉलर पार, ब्रेंट में 8%+ उछाल, Barclays ने 100 डॉलर अनुमान लगाया। होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा, भारत का आयात बिल बढ़ेगा।

0

Crude Oil Price: जिसका डर था वही हुआ। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद सोमवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड फ्यूचर्स एक समय 10 प्रतिशत तक उछलकर 75 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा जो पिछले आठ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। बाद में कीमतों में थोड़ी नरमी आई लेकिन फिर भी 8 प्रतिशत से अधिक की बढ़त बनी रही। ब्रिटेन के प्रमुख बैंक Barclays ने हालात को देखते हुए ब्रेंट क्रूड का अपना अनुमान बढ़ाकर 100 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। यह खबर भारत के लिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है।

होर्मुज पर टिकी हैं दुनिया की निगाहें

इस पूरे संकट में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत संभालता है और अगर यह किसी भी कारण से बाधित हुआ तो पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भारी असर पड़ेगा। ईरान ने दावा किया है कि यह जलडमरूमध्य अभी खुला हुआ है लेकिन दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने एहतियात के तौर पर अपने जहाजों को इस रास्ते से हटाकर वैकल्पिक मार्गों पर भेजना शुरू कर दिया है। इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है और तेल की सप्लाई में देरी हो रही है।

इस बीच ईरान ने अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक और सीरिया में जवाबी हमले किए हैं। इससे युद्ध का दायरा पूरे मध्य-पूर्व तक फैल गया है और तेल उत्पादक देशों के बुनियादी ढांचे पर खतरा मंडराने लगा है।

Crude Oil Price: Barclays ने 100 डॉलर का अनुमान लगाया

वैश्विक तेल बाजार में बढ़ते तनाव को देखते हुए ब्रिटेन के प्रमुख बैंक Barclays ने ब्रेंट क्रूड के अपने पुराने अनुमान को संशोधित कर 100 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। बैंक ने चेतावनी दी है कि बाजार को गंभीर आपूर्ति बाधा का जोखिम उठाना पड़ सकता है। Barclays ने कहा कि सोमवार को तेल बाजारों को अपने सबसे बड़े डर का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में हालात और बिगड़े तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी आगे निकल सकती हैं।

OPEC+ का फैसला नाकाफी साबित होता दिख रहा है

रविवार को OPEC+ ने अप्रैल महीने से प्रतिदिन 2 लाख 6 हजार बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन का ऐलान किया था जिसे बाजार को राहत देने की कोशिश के रूप में देखा गया था। लेकिन यह अतिरिक्त उत्पादन वैश्विक मांग का 0.2 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा हो तो OPEC+ का यह कदम ऊंट के मुंह में जीरे जैसा साबित हो रहा है।

Crude Oil Price: भारत पर क्या पड़ेगा असर

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल सालाना करीब 10 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये बढ़ जाता है। अगर तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो भारत के लिए आर्थिक दबाव बहुत बड़ा होगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी, रुपया कमजोर होगा और आम आदमी की जेब पर सीधी मार पड़ेगी। भारत सरकार के सामने यह सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।

फिलहाल सबकी निगाहें मध्य-पूर्व में युद्ध की दिशा और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हैं। जब तक वहां शांति नहीं लौटती तब तक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.