Crude Oil Contract Strike Price,- क्रूड ऑयल में भूचाल के बीच MCX और NSE का बड़ा फैसला! स्ट्राइक प्राइस बढ़ाकर 151 किए, जानें क्या है क्रूड ऑयल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट और ट्रेडर्स को क्या मिलेगा फायदा

मिडिल ईस्ट युद्ध से क्रूड में उछाल, MCX-NSE ने स्ट्राइक प्राइस बढ़ाकर 151 किए, ट्रेडर्स को ज्यादा हेजिंग विकल्प

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Crude Oil Contract Strike Price: मध्य-पूर्व में छिड़े युद्ध और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछल रही हैं। इस भूचाल के बीच भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज MCX यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज और NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने 2 मार्च 2026 को एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। दोनों एक्सचेंजों ने अपने क्रूड ऑयल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में स्ट्राइक प्राइसेज की संख्या में भारी बढ़ोतरी कर दी है ताकि ट्रेडर्स को बाजार की उठापटक में अधिक विकल्प मिल सकें।

Crude Oil Contract Strike Price: क्या होता है क्रूड ऑयल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट

क्रूड ऑयल ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट एक वित्तीय साधन है जो ट्रेडर्स को भविष्य में एक निश्चित मूल्य पर कच्चा तेल खरीदने या बेचने का अधिकार देता है लेकिन यह बाध्यता नहीं होती। इसमें दो प्रकार के ऑप्शन होते हैं। पहला कॉल ऑप्शन यानी CE जो खरीदार को एक निश्चित मूल्य पर कच्चा तेल खरीदने का अधिकार देता है। दूसरा पुट ऑप्शन यानी PE जो खरीदार को एक निश्चित मूल्य पर कच्चा तेल बेचने का अधिकार देता है। स्ट्राइक प्राइस वह पूर्वनिर्धारित मूल्य है जिस पर ऑप्शन का प्रयोग किया जा सकता है। इन-द-मनी यानी ITM वे स्ट्राइक होती हैं जो मौजूदा बाजार मूल्य से अनुकूल हों। आउट-ऑफ-द-मनी यानी OTM वे स्ट्राइक होती हैं जो मौजूदा बाजार मूल्य से प्रतिकूल हों।

Crude Oil Contract Strike Price: MCX ने क्यों और कैसे बढ़ाए स्ट्राइक प्राइस

MCX ने 2 मार्च 2026 से अपने क्रूड ऑयल ऑप्शंस ऑन फ्यूचर्स जो 100 बैरल का कॉन्ट्रैक्ट है और क्रूड ऑयल मिनी ऑप्शंस जो 10 बैरल का कॉन्ट्रैक्ट है दोनों में स्ट्राइक प्राइसेज की संख्या में बड़ा बदलाव किया है। पहले MCX पर 25 ITM, 25 OTM और 1 नियर-द-मनी स्ट्राइक उपलब्ध थी यानी कुल 51 स्ट्राइक। अब इसे बढ़ाकर 75 ITM, 75 OTM और 1 नियर-द-मनी कर दिया गया है। इस प्रकार अब ट्रेडर्स के पास कुल 151 स्ट्राइक का विशाल दायरा होगा जो पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। यह बदलाव मौजूदा और आने वाले दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा। हालांकि स्ट्राइक प्राइस का अंतर यानी इंटरवल 50 रुपये ही बना रहेगा।

Crude Oil Contract Strike Price: NSE ने भी किया बड़ा बदलाव

MCX के बाद NSE ने भी 2 मार्च 2026 के अपने सर्कुलर में WTI क्रूड ऑयल ऑप्शंस ऑन फ्यूचर्स में न्यूनतम स्ट्राइक की संख्या बढ़ाने का फैसला किया। पहले NSE पर 25 ITM, 25 OTM और 1 नियर-द-मनी स्ट्राइक के साथ 51 कॉल यानी CE और 51 पुट यानी PE ऑप्शन उपलब्ध थे। अब इसे बढ़ाकर 50 ITM, 50 OTM और 1 नियर-द-मनी कर दिया गया है। इससे अब 101 कॉल और 101 पुट ऑप्शन उपलब्ध होंगे। NSE का यह नया ढांचा मार्च 2026 से एक्सपायर होने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा। यह बदलाव ट्रेडर्स को बाजार की अस्थिरता के बीच अपनी पोजिशन को अधिक सटीक तरीके से हेज करने की सुविधा देगा।

Crude Oil Contract Strike Price: ईरान-इजरायल युद्ध का क्रूड ऑयल पर असर

इन बदलावों की पृष्ठभूमि में मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष है। 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने ईरान में संयुक्त हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है। यदि यह मार्ग बंद हो जाता है या अवरुद्ध होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आ सकती है। इसी भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछली हैं।

Crude Oil Contract Strike Price: एक्सचेंजों ने क्यों उठाया यह कदम

दोनों एक्सचेंजों ने स्पष्ट किया है कि स्ट्राइक प्राइसेज बढ़ाने का मकसद बाजार में पर्याप्त ट्रेडिंग विकल्प उपलब्ध कराना और कीमतों के बड़े और अप्रत्याशित दायरे को कवर करना है। जब बाजार में भारी उठापटक होती है तो कीमतें अचानक इतनी ऊपर या नीचे जा सकती हैं कि पुरानी स्ट्राइक प्राइसेज का दायरा अपर्याप्त पड़ जाता है। ऐसे में ट्रेडर्स अपनी पोजिशन को हेज करने में असमर्थ हो जाते हैं। स्ट्राइक प्राइसेज की संख्या बढ़ाने से ट्रेडर्स को बाजार की किसी भी दिशा में अपनी रणनीति बनाने की सुविधा मिलती है। एक्सचेंजों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भविष्य में स्थिति और अधिक अस्थिर होती है तो संख्या में और बढ़ोतरी की जा सकती है।

Crude Oil Contract Strike Price: भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारत पर पड़ता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं जिससे परिवहन और माल ढुलाई महंगी होगी। इसका असर खाद्य वस्तुओं और अन्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ेगा। महंगाई बढ़ने से आरबीआई की मौद्रिक नीति पर भी दबाव आ सकता है। ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए MCX और NSE के यह नए बदलाव इस उथल-पुथल भरे बाजार में अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने और लाभ कमाने के नए अवसर लेकर आए हैं।

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