डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कसेगा शिकंजा! बच्चों की सुरक्षा को लेकर IT मंत्री ने दे दी कड़ी चेतावनी

बच्चों की सुरक्षा को लेकर IT मंत्री अश्विनी वैष्णव की कड़ी चेतावनी, डीपफेक और दुष्प्रचार पर लगाम जरूरी

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IT Update: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट संदेश दिया कि अब उन्हें अपने कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। मंत्री ने कहा कि बच्चों और नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना इन प्लेटफॉर्म्स का कर्तव्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

IT Update: डीपफेक और दुष्प्रचार बना बड़ा खतरा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन यानी डीएनपीए के सम्मेलन को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने डीपफेक तकनीक और इंटरनेट पर तेजी से फैलते दुष्प्रचार अभियानों पर गहरी चिंता जाहिर की:

  • समाज के लिए खतरा: उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीक समाज के मूलभूत सिद्धांतों के लिए सीधा खतरा बन चुकी है।

  • व्यक्तित्व का दुरुपयोग: डीपफेक ऐसी तकनीक है जो किसी के चेहरे, आवाज और व्यक्तित्व का इस्तेमाल करके नकली वीडियो और ऑडियो बना सकती है।

  • भ्रामक सूचनाएं: यह तकनीक लोगों को ऐसी घटनाओं पर विश्वास दिला सकती है जो वास्तव में कभी हुई ही नहीं।

मंत्री ने कहा कि डीपफेक और दुष्प्रचार के शिकार लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इन लोगों की ऑनलाइन सुरक्षा और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना समय की मांग है।

IT Update: प्लेटफॉर्म्स को जागना होगा

अश्विनी वैष्णव ने सम्मेलन में यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अब जागने और उन संस्थाओं में विश्वास को मजबूत करने के महत्व को समझने की जरूरत है:

“प्लेटफॉर्म्स को अपने कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी ही होगी। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा हो या सभी नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा, यह जिम्मेदारी सीधे तौर पर इन्हीं प्लेटफॉर्म्स की है।”

केंद्रीय मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि जो प्लेटफॉर्म इन सिद्धांतों का पालन करने में विफल रहेंगे, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि सरकार भविष्य में सख्त नियामक कदम उठा सकती है।

IT Update: AI कंटेंट पर लगाम जरूरी

सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से बनाई जा रही सामग्री का मुद्दा भी केंद्र में रहा:

  • रेगुलेशन की मांग: अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई से तैयार किए जाने वाले कंटेंट को रेगुलेट करने की सख्त जरूरत है।

  • निजता का सम्मान: किसी भी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या व्यक्तित्व का इस्तेमाल करके कोई भी सामग्री तब तक नहीं बनाई जानी चाहिए जब तक कि उस व्यक्ति की स्पष्ट सहमति न हो।

  • बदलाव की अपील: उन्होंने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अपील की कि वे मानव समाज की बुनियादी जरूरतों में सहयोग करें।

IT Update: विश्वास ही है हर संस्था की नींव

अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण बात कही कि मानव समाज का पूरा ढांचा संस्थाओं में विश्वास पर टिका हुआ है:

  • संस्थागत ढांचा: परिवार, न्यायपालिका, मीडिया और विधायिका तक, हर संस्था विश्वास के मूल सिद्धांत पर काम करती है।

  • मीडिया की विश्वसनीयता: किसी भी मीडिया संस्थान की विश्वसनीयता तीन चीजों पर निर्भर करती है:

    1. निष्पक्षता

    2. प्रकाशन से पहले सूचनाओं की पुष्टि

    3. अपनी सामग्री के लिए जवाबदेही

  • खतरे की चेतावनी: उन्होंने चेताया कि डीपफेक जैसी उभरती तकनीकें इस विश्वास को कमजोर करने का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी हैं।

IT Update: इंटरनेट का स्वरूप बदल चुका है

वैष्णव ने यह भी स्वीकार किया कि आज इंटरनेट का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है:

  • बदलता माध्यम: कुछ साल पहले तक इंटरनेट सूचना और ज्ञान का माध्यम था, लेकिन आज यह गलत सूचनाओं, नफरत और मनोवैज्ञानिक हेरफेर का अड्डा भी बनता जा रहा है।

  • बढ़ती जिम्मेदारी: ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

IT Update: इंडिया एआई समिट के बाद और बढ़ी चिंता

यह बयान इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के कुछ ही दिनों बाद आया है:

  • वैश्विक चिंता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन सहित कई बड़े नेताओं ने डीपफेक और गलत सूचनाओं के बढ़ते खतरे पर नागरिकों को सचेत किया था।

  • प्रगति बनाम सुरक्षा: इससे साफ है कि यह मुद्दा अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गया बल्कि यह एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है।

निष्कर्ष

अश्विनी वैष्णव के इस बयान के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि:

  • सख्त नियम: सरकार जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए और सख्त नियम ला सकती है।

  • नई नीति: एआई से बने कंटेंट, डीपफेक वीडियो और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नई नीति बनाने की तैयारी हो सकती है।

देश में बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन उत्पीड़न की घटनाओं के बीच सरकार का यह रुख स्वागत योग्य माना जा रहा है।

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