कार्डियक अरेस्ट आने पर संजीवनी बन सकता है CPR: जान बचाने के लिए सीखें सही तरीका और ये स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
इमरजेंसी में हर सेकंड है कीमती; सही तरीके से दिया गया सीपीआर जान बचने की संभावना 3 गुना बढ़ाता है।
How to Give CPR: कार्डियक अरेस्ट किसी भी उम्र के व्यक्ति को अचानक हो सकता है। दिल की धड़कन रुकते ही दिमाग और शरीर के जरूरी अंगों तक खून और ऑक्सीजन का बहाव बंद हो जाता है। ऐसे में हर सेकंड मायने रखता है। अगर सही समय पर सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया जाए तो व्यक्ति की जान बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के पहले 4-6 मिनट में CPR शुरू कर दिया जाए तो ब्रेन डैमेज का खतरा काफी कम हो जाता है।
How to Give CPR: कार्डियक अरेस्ट क्या होता है और यह क्यों खतरनाक है?
कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। यह हार्ट अटैक से अलग है। हार्ट अटैक में दिल की धमनियों में ब्लॉकेज होता है लेकिन दिल अभी भी धड़क रहा होता है। कार्डियक अरेस्ट में दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल हो जाती है और पंपिंग रुक जाती है। इस स्थिति में दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। 4 मिनट बाद ब्रेन सेल्स मरने लगती हैं और 10 मिनट बाद स्थायी नुकसान हो सकता है। भारत में हर साल लाखों लोग कार्डियक अरेस्ट का शिकार होते हैं।
How to Give CPR: सीपीआर कब देना चाहिए?
सीपीआर तभी शुरू करें जब व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए। सबसे पहले उसे हिलाएं और नाम लेकर पुकारें। अगर कोई जवाब न मिले और सांस सामान्य न हो (हांफना, तेज सांस या बिल्कुल सांस न लेना) तो तुरंत CPR शुरू करें। पल्स चेक करने की कोशिश न करें क्योंकि आम व्यक्ति इसे सही से नहीं पहचान पाता। अगर व्यक्ति होश में नहीं है और सांस नहीं ले रहा है तो इंतजार न करें। तुरंत किसी को 108 या लोकल इमरजेंसी नंबर पर फोन करने को कहें और खुद CPR देना शुरू कर दें।
सीपीआर देने का सही तरीका: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
व्यक्ति को सपाट और सख्त जगह पर पीठ के बल लिटाएं। उसके बगल में घुटनों के बल बैठ जाएं।
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चेस्ट कंप्रेशन: छाती के बीच में एक हाथ की हथेली रखें। दूसरे हाथ को पहले हाथ पर रखकर उंगलियां आपस में इंटरलॉक कर लें। कोहनियां सीधी रखें और 5-6 सेमी गहराई तक छाती दबाएं। हर मिनट 100 से 120 बार दबाव दें।
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रेस्क्यू ब्रेथ: 30 बार छाती दबाने के बाद 2 रेस्क्यू ब्रेथ दें। सिर को पीछे झुकाएं, नाक बंद करें और अपना मुंह व्यक्ति के मुंह पर रखकर 1 सेकंड तक सांस फूंकें।
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चक्र: 30:2 का यह चक्र तब तक जारी रखें जब तक मेडिकल मदद न पहुंच जाए या व्यक्ति होश में न आ जाए।
How to Give CPR: बच्चों और शिशुओं के लिए CPR में क्या अंतर है?
बच्चों (1 से 8 साल) के लिए CPR थोड़ा अलग होता है। छाती दबाने की गहराई 5 सेमी रखें। दो उंगलियों या एक हाथ का इस्तेमाल करें। रेस्क्यू ब्रेथ में मुंह और नाक दोनों को ढकें। शिशुओं (1 साल से कम) के लिए सिर्फ दो उंगलियों से छाती के बीच में दबाएं। गहराई 4 सेमी रखें। रेस्क्यू ब्रेथ बहुत हल्की होनी चाहिए। हर उम्र के लिए 30:2 का अनुपात वही रखें लेकिन दबाव की ताकत उम्र के अनुसार कम करें।
How to Give CPR: सीपीआर के फायदे, महत्व और सावधानियां
सही समय पर दिया गया CPR दिल और दिमाग को ऑक्सीजन पहुंचाता रहता है। इससे व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने तक जिंदा रखा जा सकता है।
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सावधानियां: हाथ सीधे रखें, कमर से नहीं बल्कि कंधे से दबाव दें। छाती दबाते समय रुकें नहीं, लगातार 100-120 स्पीड बनाए रखें। रेस्क्यू ब्रेथ देते समय ज्यादा जोर न लगाएं। अगर व्यक्ति उल्टी करे तो साफ करके CPR जारी रखें। खुद थकने पर किसी दूसरे को CPR देने को कहें। अगर AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) उपलब्ध हो तो तुरंत लगाएं।
How to Give CPR: भारत में CPR जागरूकता क्यों जरूरी?
भारत में कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शहरों में स्ट्रेस, प्रदूषण और अनहेल्दी लाइफस्टाइल इसके बड़े कारण हैं। ज्यादातर लोग CPR नहीं जानते। स्कूलों, कॉलेजों और ऑफिसों में CPR ट्रेनिंग अनिवार्य होनी चाहिए। सरकार और एनजीओ मिलकर पब्लिक प्लेस पर AED मशीन लगवा रहे हैं। लेकिन मशीन के साथ CPR का ज्ञान भी जरूरी है। अगर हर व्यक्ति CPR सीख ले तो हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।
निष्कर्ष
कार्डियक अरेस्ट कोई पूर्व चेतावनी नहीं देता। इसलिए CPR का ज्ञान हर घर, हर परिवार में होना चाहिए। आज ही अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर CPR का डेमो देखें और प्रैक्टिस करें। याद रखें – सही समय पर दिया गया CPR किसी की जान बचा सकता है। डॉक्टर से सलाह लेकर या ट्रेनिंग सेंटर जाकर सीखें।
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