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Supreme Court News: रूस-यूक्रेन युद्ध की चौथी वर्षगांठ पर शांति वार्ताओं के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और खतरनाक खुलासा सामने आया है। रूसी विदेश खुफिया सेवा यानी SVR ने दावा किया है कि फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम यूक्रेन को परमाणु हथियार उपलब्ध कराने की गुप्त योजना बना रहे हैं। इस खुलासे के बाद क्रेमलिन ने पश्चिमी देशों को कड़ी चेतावनी दी है। हालांकि यूक्रेन, ब्रिटेन और फ्रांस तीनों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे रूसी प्रचार करार दिया है।
Supreme Court News: SVR ने क्या दावा किया? (खुफिया रिपोर्ट का विवरण)
रूसी खुफिया सेवा SVR ने मंगलवार सुबह बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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गोपनीय योजना: SVR का आरोप है कि लंदन और पेरिस के अधिकारी गोपनीय रूप से ऐसे कंपोनेंट्स, उपकरण और तकनीक यूक्रेन को भेजने की योजना बना रहे हैं जिससे वह एक सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल का निर्माण कर सके।
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परमाणु क्षमता: यह मिसाइल थर्मोन्यूक्लियर वारहेड यानी परमाणु युद्धक ले जाने में पूरी तरह सक्षम होगी।
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रणनीतिक उद्देश्य: SVR के अनुसार, इस कथित परमाणु हथियार का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन को अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ताओं में एक अत्यंत मजबूत और प्रभावी स्थिति दिलाना है।
Supreme Court News: क्रेमलिन की कड़ी प्रतिक्रिया और परमाणु चेतावनी
SVR के इस दावे के तुरंत बाद क्रेमलिन ने बहुत ही सख्त रुख अपनाया है:
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अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी नियमों और स्थापित सिद्धांतों का घोर उल्लंघन करार दिया है।
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अप्रसार व्यवस्था को खतरा: उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम पूरी वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था (Nuclear Non-Proliferation Regime) के लिए एक गंभीर खतरा है।
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संयुक्त हमले की परिभाषा: पेसकोव ने स्पष्ट किया कि रूस की परमाणु नीति के अनुसार, किसी गैर-परमाणु राज्य द्वारा परमाणु शक्ति संपन्न देशों की मदद से की जाने वाली किसी भी आक्रामकता को उन देशों का संयुक्त हमला माना जाएगा। यह लंदन और पेरिस के लिए एक सीधी और गंभीर परमाणु चेतावनी है।
Supreme Court News: रूसी संसद और कूटनीतिक दबाव
रूस के ऊपरी सदन, फेडरेशन काउंसिल ने भी इस मामले में अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने ब्रिटिश और फ्रांसीसी सांसदों से अपील की है कि वे SVR द्वारा लगाए गए इन परमाणु हथियार दावों की तुरंत संसदीय जांच शुरू करें। यह इस बात का संकेत है कि रूस इन आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कितनी गंभीरता से उठा रहा है और इसे अपनी कूटनीतिक बढ़त के रूप में इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
Supreme Court News: पश्चिम का खंडन और जर्मनी की स्थिति
दूसरी ओर, पश्चिमी देशों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है:
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यूक्रेन का पक्ष: यूक्रेन ने रूसी खुफिया एजेंसी के इन आरोपों को “बेतुका झूठ” करार दिया है।
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ब्रिटेन और फ्रांस का रुख: लंदन और पेरिस ने भी इन दावों का पूरी तरह खंडन किया है।
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जर्मनी की दूरी: उल्लेखनीय है कि जर्मनी ने कथित तौर पर इस खतरनाक योजना का हिस्सा बनने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
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प्रचार का आरोप: विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि SVR ने अपने दावों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है, इसलिए इसे बड़े पैमाने पर रूसी प्रचार (Propaganda) का हिस्सा माना जा रहा है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
यह सनसनीखेज खुलासा ऐसे समय में आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता एक बड़े गतिरोध में फंसी हुई है। दोनों पक्ष क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। इस साल अब तक तीन दौर की बातचीत हो चुकी है और चौथे दौर की उम्मीद इसी सप्ताह की जा रही है। ऐसी नाजुक स्थिति में, परमाणु हथियारों से जुड़े ये आरोप वैश्विक तनाव को और अधिक खतरनाक स्तर पर ले जा सकते हैं।
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