कमर्शियल LPG में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी! 19 किलो सिलेंडर का दाम 3071 रुपये पहुंचा, होटल-रेस्टोरेंट 15% तक महंगे होंगे, आम आदमी की थाली पर असर
1 मई 2026 से 19 किलो कमर्शियल गैस सिलेंडर 3071.50 रुपये, तीन महीने में 1332 रुपये का इजाफा, FHRAI ने 15% महंगाई की चेतावनी दी
Commercial LPG Price Hike: देश में महंगाई की चौतरफा मार के बीच होटल और रेस्टॉरेंट संचालकों के लिए 1 मई 2026 की सुबह एक बड़ा झटका लेकर आई है। सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद 19 किलो वाले सिलेंडर का दाम अब 3,071.50 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि पिछले तीन महीनों से जारी उस सिलसिले की सबसे आक्रामक कड़ी है, जिसकी शुरुआत मार्च में हुई थी। महज 90 दिनों के भीतर कमर्शियल गैस के दामों में कुल 1,332.50 रुपये का इजाफा हो चुका है। इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने न केवल छोटे ढाबों और बड़े रेस्टॉरेंट के बजट को तहस-नहस कर दिया है, बल्कि इसका सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर पड़ने वाला है। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FHRAI) ने आगाह किया है कि इस लागत वृद्धि के कारण बाहर खाना कम से कम 15 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा।
कमर्शियल LPG की कीमतों में उछाल: तीन महीने का पूरा गणित
विमानन ईंधन (ATF) के दाम भले ही स्थिर रखे गए हों, लेकिन कमर्शियल गैस के मोर्चे पर राहत के बजाय आफत आई है। पिछले तीन महीनों का डेटा देखें तो यह स्पष्ट होता है कि लागत का बोझ किस तेजी से बढ़ा है:
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मार्च 2026: कीमतों में 144 रुपये की पहली वृद्धि हुई।
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अप्रैल 2026: दाम 195.50 रुपये और बढ़ाए गए।
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1 मई 2026: एकमुश्त 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।
महज तीन महीने पहले जो सिलेंडर लगभग 1,739 रुपये का था, वह अब 3,000 के पार जा चुका है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चैन बाधित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते जोखिम के कारण बीमा और शिपिंग लागत में जो वृद्धि हुई है, उसका सीधा भार अब कमर्शियल उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
Commercial LPG Price Hike: होटल और रेस्टॉरेंट उद्योग पर संकट के बादल
होटल और रेस्टॉरेंट सेक्टर के लिए गैस सिलेंडर कोई विलासिता नहीं, बल्कि अनिवार्य दैनिक आवश्यकता है। एक मध्यम आकार के रेस्टॉरेंट में रोजाना कम से कम एक से दो सिलेंडर की खपत होती है। नई दरों के लागू होने के बाद, इन संचालकों का मासिक खर्च 30,000 से 50,000 रुपये तक बढ़ सकता है। FHRAI के उपाध्यक्ष प्रदीप शेट्टी के अनुसार, यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब उद्योग पहले से ही कमजोर नकदी प्रवाह और कच्चे माल की ऊँची कीमतों से जूझ रहा है।
रेस्टॉरेंट संचालकों के सामने अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे घाटा सहकर व्यवसाय बंद कर दें, या फिर इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल दें। अधिकांश संचालकों ने अपने ‘मेनू कार्ड’ की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में अब बाहर का खाना आम आदमी की पहुंच से और दूर हो जाएगा।
आम उपभोक्ता पर असर: आपकी थाली कितनी महंगी?
जब कमर्शियल गैस महंगी होती है, तो इसका असर केवल आलीशान होटलों तक सीमित नहीं रहता। सड़कों पर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले वेंडर, ऑफिस के पास स्थित लंच होम और सस्ते ढाबे भी इसकी चपेट में आते हैं। यदि आप रोजाना बाहर खाना खाते हैं या सप्ताहांत पर परिवार के साथ डिनर पर जाते हैं, तो आपको अपने बिल में स्पष्ट अंतर दिखेगा। उदाहरण के लिए, 500 रुपये के बिल पर अब आपको कम से कम 75 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।
इस महंगाई का सबसे बुरा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के उन लोगों पर पड़ेगा जो काम के सिलसिले में घर से दूर रहते हैं और मेस या टिफिन सेवाओं पर निर्भर हैं। टिफिन सेवाओं की कीमतों में भी 200 से 500 रुपये प्रति माह की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि खाद्य मुद्रास्फीति पहले से ही चुनौती बनी हुई है और ईंधन की यह मार इसे और विकराल बना देगी।
Commercial LPG Price Hike: सरकार से राहत की मांग और वैकल्पिक ईंधन की तलाश
इस संकट को देखते हुए देश भर के होटल एसोसिएशनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि कमर्शियल एलपीजी को भी आंशिक सब्सिडी के दायरे में लाया जाए या कम से कम जीएसटी दरों में कुछ रियायत दी जाए। वहीं, कुछ संचालक अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की ओर रुख करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, पीएनजी का नेटवर्क अभी भी भारत के कई टियर-2 और टियर-3 शहरों में उपलब्ध नहीं है, और इलेक्ट्रिक कुकिंग की शुरुआती सेटअप लागत छोटे दुकानदारों के लिए बहुत अधिक है।
निष्कर्षतः, कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में यह अभूतपूर्व बढ़ोतरी भारतीय विमानन और खाद्य सेवा उद्योग के लिए एक “डबल व्हैमी” साबित हो रही है। यदि सरकार ने जल्द ही कीमतों को नियंत्रित करने या उद्योग को राहत देने के कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में कई छोटे फूड आउटलेट्स पर ताले लटक सकते हैं और बेरोजगारी का संकट भी बढ़ सकता है। तब तक के लिए, आम जनता को अपनी जेब और ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना होगा।
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