CM Yogi: 2017 से पहले जर्जर थे आंगनवाड़ी केंद्र, अब बदल गई तस्वीर! योगी बोले- 70 हजार से ज्यादा केंद्र बने मॉडल
CM Yogi: वाराणसी में राष्ट्रीय पोषण माह पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर थे। अब 70 हजार से अधिक केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है।
CM Yogi: वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में हुए बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले ज्यादातर केंद्र जर्जर और अव्यवस्थित थे। समय पर रेसिपी नहीं मिलती थी, पेयजल और बैठने की व्यवस्था कमजोर थी और बच्चे टाट बिछाकर बैठते थे। उनके अनुसार तब पोषाहार आपूर्ति की व्यवस्था पर सवाल उठे थे और मानदेय भी कम था। कार्यकर्ताओं को तीन हजार तथा सहायिकाओं को डेढ़ हजार रुपये मिलते थे। अब सरकार का दावा है कि साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है। स्मार्टफोन से रियल टाइम डेटा, हॉट मील, टीएचआर पैक्ड सामग्री और महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़े प्लांट इस मॉडल का हिस्सा बताए गए।
CM Yogi: 2017 से पहले केंद्रों की क्या स्थिति बताई गई
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में पुरानी तस्वीर रखते हुए कहा कि उस समय आंगनवाड़ी केंद्रों में व्यवस्था का अभाव था। गंदगी और जर्जर भवन आम शिकायत थे। उनके मुताबिक पोषाहार नियमित नहीं पहुंचता था और कभी तीन महीने में एक बार आपूर्ति होने की बात सामने आई। उन्होंने यह भी कहा कि गलती ऊपर के स्तर पर होती थी, लेकिन आंगनवाड़ी बहनों को ही आलोचना झेलनी पड़ती थी। बच्चे अपना टाट लेकर आते थे। पीने के पानी, बैठने की जगह और गर्म दूध जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं। यह बयान सरकारी मूल्यांकन के रूप में दिया गया। स्वतंत्र जांच के नए आंकड़े इस संबोधन में अलग से नहीं बताए गए।
पोषाहार आपूर्ति को लेकर क्या दावा किया गया
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले आपूर्ति की जिम्मेदारी पर सवाल उठे और गुणवत्ता जांच के आदेश दिए गए। वर्तमान व्यवस्था में आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए हॉट मील के साथ टीएचआर यानी घर ले जाने वाला पैक्ड पोषाहार भी वितरित हो रहा है। प्रदेश में टीएचआर के 204 प्लांट लग चुके बताए गए। इन कार्यों को महिला स्वयं सहायता समूह संचालित करते हैं, ऐसा उन्होंने कहा। सरकार का तर्क है कि स्थानीय संचालन से नियमितता बढ़ती है। संबोधन में आपूर्ति की मासिक निगरानी और शिकायत निपटान का विस्तार से ब्योरा नहीं दिया गया। फिर भी पोषण माह के मंच पर इसे वर्तमान जरूरत का मॉडल बताया गया।
नए स्वरूप वाले केंद्रों में कौन सी सुविधाएं गिनीं
मुख्यमंत्री के अनुसार निर्माण और नवीनीकरण में राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य बजट की धनराशि लगाई गई है। बाउंड्री वॉल, शौचालय, पेयजल और शुद्ध पानी को प्राथमिकता बताई गई। कई केंद्रों पर बाल वाटिका चल रही है, जहां खेल के जरिए अक्षर और अंक सिखाने का दावा किया गया। कार्यकर्ताओं के पास स्मार्टफोन होने और रियल टाइम डेटा अपलोड करने की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र अब देखने लायक बन रहे हैं। यह तस्वीर सरकारी प्राथमिकता के रूप में पेश की गई। हर केंद्र की एक जैसी स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन इस भाषण में शामिल नहीं था।
कानपुर दौरे का जिक्र क्यों किया गया
योगी ने बताया कि वे बिना सूचना के कानपुर के एक दूरस्थ गांव के केंद्र पर पहुंचे। वहां करीब 20-22 बच्चे मौजूद थे। कार्यकर्ता पढ़ा रही थीं और बच्चे अलग-अलग गति से सीख रहे थे। कुछ खेल में मस्त थे, कुछ के सामने लड्डू भी रखे थे, फिर भी वे गतिविधि में जुड़े रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दृश्य उन्हें अच्छा लगा। इस प्रसंग से सरकार यह संदेश देना चाहती थी कि केंद्र अब केवल राशन वितरण की जगह नहीं, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल का स्थल भी बन रहे हैं। एक केंद्र के अनुभव को पूरे प्रदेश का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन भाषण में इसे सकारात्मक उदाहरण की तरह रखा गया।
CM Yogi: कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और मानदेय का क्या संदर्भ रहा
पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानदेय मात्र तीन हजार और सहायिकाओं के लिए डेढ़ हजार रुपये था। वर्तमान में कितना मानदेय है, यह आंकड़ा इस संबोधन में स्पष्ट नहीं कहा गया। कार्यक्रम से जुड़े संदर्भ में यह भी बताया गया कि कुछ महीने पहले 739 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और 15203 सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। सरकार का जोर नए भवन, पोषाहार मॉडल और निगरानी व्यवस्था पर रहा। पोषण माह के मौके पर बच्चों के पोषण और शुरुआती शिक्षा को एक साथ जोड़कर पेश किया गया। आगे की चुनौती इन सुविधाओं को हर केंद्र पर समान बनाए रखने की रहेगी।
वाराणसी में राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी केंद्रों को 2017 से पहले जर्जर और अब मॉडल स्वरूप की ओर बढ़ता बताया। उनके अनुसार 70 हजार से अधिक केंद्रों का कायाकल्प हुआ है। हॉट मील, टीएचआर के 204 प्लांट, स्मार्टफोन से डेटा और बाल वाटिका इस बदलाव के केंद्र में रखे गए। पुरानी आपूर्ति और कम मानदेय की आलोचना भी की गई। सरकारी दावों के साथ मैदानी निगरानी और नियमित पोषाहार ही असल परीक्षा होंगे। बच्चों को साफ परिसर, पानी, भोजन और शुरुआती पढ़ाई मिले, यही इस चर्चा का मूल मुद्दा है।
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