चंद्रबाबू का बच्चों को बड़ा झटका! आंध्र प्रदेश में सोशल मीडिया बैन, 90 दिन में होगा लागू
चंद्रबाबू नायडू ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया, 90 दिनों में लागू होगा
Andhra Pradesh social media ban: देश में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक के बाद एक बड़े फैसले सामने आ रहे हैं। अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार 6 मार्च को एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला उन लाखों अभिभावकों के लिए राहत की खबर लेकर आया है जो अपने छोटे बच्चों के स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते लत से परेशान थे। सरकार ने इस बैन को अगले 90 दिनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना तैयार कर ली है।
Andhra Pradesh social media ban: क्या है आंध्र प्रदेश सरकार का पूरा फैसला
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में 13 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इस निर्णय को लागू करने के लिए सरकार ने पहले से पॉलिसी तैयार कर ली है और इसे अगले 90 दिनों में फेजवाइज यानी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि राज्य सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि इस प्रतिबंध की आयु सीमा को 13 साल से बढ़ाकर 16 साल तक किया जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि यह अंतिम फैसला पॉलिसी रिव्यू और कंसल्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
Andhra Pradesh social media ban: कर्नाटक के बाद आंध्र ने भी उठाया कदम
यह फैसला उसी दिन आया जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी बजट सत्र के दौरान राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। एक ही दिन में देश के दो बड़े राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने का ऐलान किया, जो इस बात का संकेत है कि देशभर में इस मुद्दे पर एक साझा सोच बनती जा रही है। हालांकि कर्नाटक सरकार की तरफ से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस प्रतिबंध को लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी। इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने राज्य के उच्च शिक्षा परिषद के कुलपतियों के साथ बैठक में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने के विषय पर विस्तृत चर्चा की थी।
Andhra Pradesh social media ban: देश के कई और राज्य भी तैयार कर रहे हैं योजना
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ही नहीं, देश के कई अन्य राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। गोवा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक लगाने के लिए टास्क फोर्स का गठन कर दिया है। यह टास्क फोर्स यह तय करेगी कि बैन को किस तरह लागू किया जाए और इसकी निगरानी कैसे हो। केंद्र सरकार ने भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत सरकार की तरफ से बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर उम्र के आधार पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है। यानी ऊपर से नीचे तक यह संदेश साफ है।
Andhra Pradesh social media ban: ऑस्ट्रेलिया के फैसले से मिली प्रेरणा
यह पूरा घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया के उस ऐतिहासिक फैसले से प्रेरित है जो उसने कुछ समय पहले लिया था। ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। यह दुनिया का पहला देश बना जिसने इतनी सख्ती से यह कदम उठाया। ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले की दुनियाभर में चर्चा हुई और कई देशों ने इसे एक मॉडल के तौर पर देखा। भारत के राज्य सरकारें भी ऑस्ट्रेलिया के इसी अनुभव का हवाला देते हुए अपने यहां बैन लागू करने की तैयारी कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऑस्ट्रेलिया जैसी तकनीकी रूप से उन्नत देश यह फैसला कर सकता है तो भारत में भी यह संभव है।
Andhra Pradesh social media ban: क्यों जरूरी है यह बैन, क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाले विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात को लेकर चिंता जता रहे थे कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कम उम्र में सोशल मीडिया के संपर्क में आने से बच्चों में नींद न आने की समस्या, एकाग्रता की कमी, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी जैसी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री, साइबर बुलिंग और अनजान लोगों से संपर्क जैसे खतरे भी बच्चों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में इस बैन को एक बेहद जरूरी और सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
Andhra Pradesh social media ban: अभिभावकों ने किया स्वागत, तकनीकी चुनौती बरकरार
इस फैसले का देशभर के अभिभावकों ने भरपूर स्वागत किया है। उनका कहना है कि वे खुद चाहते थे कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए क्योंकि घर में बच्चों को मोबाइल से दूर रखना अकेले माता-पिता के लिए बेहद मुश्किल हो गया था। हालांकि इस बैन को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्र की सही पहचान करना और उसे सुनिश्चित करना एक जटिल प्रक्रिया है। सरकार को इसके लिए सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा। अगले 90 दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आंध्र प्रदेश इस बैन को जमीन पर कैसे उतारता है।
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