CEC कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CJI सूर्यकांत ने कहा- जल्द करेंगे फैसला

CEC-EC नियुक्ति कानून को संविधान पीठ भेजने के आदेश पर रिकॉल याचिका, CJI ने मामले पर फैसला लेने की बात कही

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सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से संबंधित नए कानून को चुनौती देने वाले मामले में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजने के पूर्व आदेश को वापस लेने (रिकॉल करने) की मांग वाली याचिका पर विचार किया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट संकेत दिया कि अदालत इस प्रक्रियात्मक और संवैधानिक प्रश्न पर बहुत जल्द अपना निर्णय सुनाएगी।

CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून की पृष्ठभूमि

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से विधिक और राजनीतिक बहस चलती रही है। इससे पहले शीर्ष अदालत की संविधान पीठ ने फैसला देते हुए चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने का निर्देश दिया था।
बाद में संसद द्वारा पारित नए अधिनियम के जरिए चयन समिति में सीजेआई के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। इस नए कानूनी प्रावधान को चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर प्रभाव डालने वाला बताते हुए शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिन्हें बाद में वृहद संविधान पीठ को संदर्भित कर दिया गया था।

संविधान पीठ को मामला भेजने के आदेश पर क्यों उठी आपत्ति?

मौजूदा सुनवाई में मुख्य रूप से उस आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई गई है जिसके तहत मामले को संविधान पीठ के सुपुर्द किया गया था। याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क है कि इस मामले में तात्कालिकता को देखते हुए नियमित पीठ द्वारा ही जल्द सुनवाई पूरी की जानी चाहिए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
इसके साथ ही सुनवाई के दौरान पीठ के गठन और प्रक्रियात्मक पहलुओं को लेकर भी बिंदु उठाए गए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पीठ में शामिल न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा को लेकर संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) का विषय भी अदालत के संज्ञान में लाया गया। इन आपत्तियों के सामने आने के बाद अब शीर्ष अदालत का रुख इस बात पर केंद्रित है कि मामले की सुनवाई की रूपरेखा और न्यायिक प्रक्रिया की दिशा क्या होनी चाहिए।

संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और न्यायिक समीक्षा का दायरा

चुनाव आयोग देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने वाली शीर्ष संवैधानिक संस्था है। ऐसे में उसके शीर्ष पदाधिकारियों के चयन का तंत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन यह मामला केवल किसी प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यपालिका की शक्तियों, विधायिका द्वारा बनाए गए कानून और स्वतंत्र संस्थाओं के शक्ति-संतुलन (चेक्स एंड बैलेंसेज) की संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा है। कानूनविदों की नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत चयन प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने के लिए क्या दिशा-निर्देश तय करती है।

CJI सूर्यकांत के रुख से जल्द फैसले की बढ़ी उम्मीद

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा शीघ्र निर्णय लिए जाने का भरोसा दिए जाने के बाद इस विधिक विवाद के जल्द सुलझने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अदालत का औपचारिक आदेश आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मामले की सुनवाई वर्तमान पीठ के समक्ष जारी रहेगी या फिर इसे विस्तृत संवैधानिक परीक्षण के लिए बड़ी पीठ को ही सौंपा जाएगा।

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