मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी में विपक्ष, INDIA गठबंधन ने तैयार किया महाभियोग नोटिस का मसौदा, इसी सप्ताह लोकसभा में देंगे नोटिस, जानें क्या है पूरी संवैधानिक प्रक्रिया
INDIA गठबंधन ने महाभियोग नोटिस का मसौदा तैयार, इसी हफ्ते लोकसभा में देंगे; SIR, हिंसा आशंका पर सवाल, संवैधानिक प्रक्रिया में 2/3 बहुमत जरूरी
CEC Gyanesh Kumar: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ने पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार इस नोटिस का मसौदा पूरी तरह तैयार हो चुका है और इसी सप्ताह यह नोटिस संसद के निचले सदन लोकसभा में दिया जा सकता है। देश की चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर यह विवाद अब सीधे संसद के पटल पर पहुंचने वाला है।
INDIA गठबंधन का संयुक्त मोर्चा
इस पूरी कवायद में INDIA गठबंधन के सभी प्रमुख दल एकजुट नजर आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस इस प्रस्ताव की सबसे मुखर समर्थक है। महाभियोग नोटिस का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल तृणमूल के एक सांसद ने कहा कि यह शत-प्रतिशत सामूहिक प्रयास है। मसौदा बनाने से लेकर रणनीति बनाने तक हर कदम पर समान विचारधारा वाले सभी दलों की भागीदारी रही है। दोनों सदनों में इसे लागू करना भी पूरी तरह टीमवर्क होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने संवैधानिक पद की पूरी तरह अनदेखी की है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस नोटिस को अपना समर्थन देने की पुष्टि की है। INDIA गठबंधन में शामिल अन्य घटक दल भी इस फैसले से सहमत हैं। अब विपक्षी सांसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के अपने सदस्यों के हस्ताक्षर एकत्र करने में जुट गए हैं।
CEC Gyanesh Kumar: क्या है महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित है और यह उतनी ही कठिन है जितनी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया। इस पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
सबसे पहले नोटिस देना होता है। नोटिस के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। वहीं राज्यसभा में यह नोटिस देने के लिए कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। यह नोटिस संसद के किसी भी सदन में दिया जा सकता है।
दूसरा चरण है आधार का निर्धारण। सीईसी को केवल दो आधारों पर हटाया जा सकता है। पहला दुर्व्यवहार यानी मिसबिहेवियर और दूसरा अक्षमता। इसके अलावा किसी अन्य आधार पर महाभियोग नहीं चलाया जा सकता।
तीसरा और सबसे कठिन चरण है मतदान। यह प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो तिहाई को इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में लोकसभा में NDA का बहुमत होने के कारण यह प्रस्ताव पारित होना व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है। लेकिन विपक्ष का मकसद प्रस्ताव पारित करवाना नहीं बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक बहस छेड़ना और राजनीतिक दबाव बनाना है।
विपक्ष की आपत्तियां क्या हैं?
विपक्ष की मुख्य शिकायत SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया है जो 12 राज्यों में जारी है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वैध मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा सकता है जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। ममता बनर्जी इस मुद्दे पर खुद मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने दिल्ली आ चुकी हैं। कोलकाता में CEC की यात्रा के दौरान उन्हें काले झंडे दिखाए गए।
पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों को लेकर भी विवाद गहरा है। बंगाल के पुलिस महानिदेशक को चुनाव तैयारी बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने कड़ी फटकार लगाई थी जो विवाद का विषय बना। चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ कोलकाता पहुंच रही है और दो दिनों तक पश्चिम बंगाल चुनाव तैयारियों का व्यापक मंथन होगा।
CEC Gyanesh Kumar: क्या है इस कदम का राजनीतिक संदेश?
इतिहास में पहली बार किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का नोटिस देने की तैयारी हो रही है। यह अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। विपक्ष यह बताना चाहता है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर उसे गंभीर संदेह है। यह कदम पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह प्रस्ताव सदन में पारित न हो लेकिन इस पर होने वाली बहस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूचियों की शुद्धता जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय ध्यान खींचने में सफल होगी। लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी जवाबदेही को लेकर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होगी।
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