धनबाद में CBI का जाल! रेलवे इंजीनियर संजीव कुमार 50 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, 24 लाख बिल पास कराने के नाम पर घूस मांगी, घर-दफ्तर में छापेमारी, भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर
धनबाद रेल मंडल में वरिष्ठ इंजीनियर संजीव कुमार 50 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार, 24 लाख बिल पास कराने के नाम पर घूस मांगी, CBI ने कसा शिकंजा
CBI trap Dhanbad: झारखंड के धनबाद रेल मंडल में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की टीम ने एक वरिष्ठ रेलवे इंजीनियर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। यह मामला उस समय सामने आया जब एक ठेकेदार ने सीबीआई के पास शिकायत दर्ज कराई कि उसका 24 लाख रुपये का पुराना बिल पास कराने के एवज में बार-बार घूस मांगी जा रही है। इसके बाद सीबीआई ने सुनियोजित ट्रैप बिछाया और इंजीनियर को जाल में फंसा लिया।
गिरफ्तार किए गए अधिकारी का नाम संजीव कुमार है, जो धनबाद मंडल में वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता के पद पर तैनात थे। यह गिरफ्तारी न केवल धनबाद रेल मंडल के लिए बल्कि पूरे रेलवे महकमे के लिए एक बड़े झटके की तरह है।
CBI trap Dhanbad: कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
धनबाद के रहने वाले ठेकेदार अनिल झा लंबे समय से रेलवे के लिए काम करते आ रहे हैं। उनका 24 लाख रुपये का बिल कई महीनों से अटका पड़ा था। सूत्रों के अनुसार, संजीव कुमार उन्हें बार-बार अपने दफ्तर में बुलाते थे और बिल पास करने के नाम पर मोटी रिश्वत की मांग करते थे। शुरुआत में ठेकेदार ने इस मामले को टालने की कोशिश की, लेकिन जब दबाव बढ़ता गया और काम अटका रहा तो उन्होंने हिम्मत जुटाई और सीधे सीबीआई दफ्तर का दरवाजा खटखटाया। ठेकेदार की शिकायत मिलते ही सीबीआई की टीम हरकत में आ गई। एजेंसी ने पूरी कार्रवाई की योजना बनाई और शुक्रवार को उसे अंजाम दिया।
CBI trap Dhanbad: कार में हुई घूस की डील
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, रिश्वत देने और लेने की जगह धनबाद के पूजा टॉकीज के पास तय की गई थी। ठेकेदार अनिल झा वहां पहुंचे और इंजीनियर संजीव कुमार को उनकी कार के भीतर 50 हजार रुपये सौंपे। पैसे लेने के बाद संजीव कुमार वहां से सीधे डीआरएम कार्यालय की ओर रवाना हो गए। उन्हें शायद जरा भी अंदाजा नहीं था कि सीबीआई की नजर उन पर टिकी हुई है। दफ्तर पहुंचते ही उन्होंने रिश्वत की रकम अपने चैंबर के दराज में छिपा दी। लेकिन सीबीआई की टीम उनके पीछे-पीछे वहां तक पहुंच चुकी थी। जैसे ही वे चैंबर में दाखिल हुए, सीबीआई के अधिकारियों ने दबिश दी। दराज खोला गया और सारे नोट बरामद कर लिए गए।
CBI trap Dhanbad: घर की तलाशी में भी मिली नकदी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई टीम ने संजीव कुमार के आवास पर भी छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, घर की तलाशी के दौरान भी संदिग्ध नकदी मिली है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। सीबीआई ने संबंधित दस्तावेज और फाइलें भी अपने कब्जे में ले ली हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। इस गिरफ्तारी ने रेलवे के अन्य अधिकारियों के बीच भी बेचैनी पैदा कर दी है। सीबीआई की टीमें अब यह भी खंगाल रही हैं कि क्या संजीव कुमार ने पहले भी इसी तरह के अन्य मामलों में ठेकेदारों से अवैध वसूली की है।
CBI trap Dhanbad: देर रात तक चली पूछताछ
सीबीआई की टीम रात के अंधेरे तक संजीव कुमार के सरकारी चैंबर में डटी रही। उनके पीए के कमरे की भी गहन छानबीन हुई। कार्यालय में मौजूद तमाम फाइलों को खंगाला गया। अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। डीआरएम ऑफिस के गलियारों में पूरे दिन सन्नाटा और घबराहट का माहौल बना रहा। रेलवे के जानकारों का कहना है कि यह धनबाद मंडल का दूसरा ऐसा मामला है जब किसी विद्युत अभियंता को सीबीआई ने रिश्वतखोरी में रंगे हाथों पकड़ा हो। इससे पहले भी इसी विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आ चुका है।
CBI trap Dhanbad: रेल मंत्रालय ने लिया संज्ञान
इस गिरफ्तारी की खबर तेजी से ऊपर तक पहुंची। सूत्रों के अनुसार, रेल मंत्रालय ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। विभागीय जांच भी शुरू किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। रेलवे प्रशासन की इस पूरे मामले में चुप्पी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्रालय की ओर से सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह के मामलों में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
CBI trap Dhanbad: भ्रष्टाचार की जड़ें कहां तक
इस गिरफ्तारी ने रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। ठेकेदारों का पैसा महीनों तक अटकाना और फिर उसे छुड़ाने के लिए घूस वसूलना एक पुरानी बीमारी बन चुकी है। यह पहला मामला नहीं है जब किसी सरकारी इंजीनियर ने बिल पास करने के नाम पर अवैध वसूली की हो। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ऐसी कार्रवाइयां जारी नहीं रहेंगी, तब तक यह सिलसिला थमेगा नहीं। सीबीआई की इस कार्रवाई को विशेषज्ञ एक बड़े संदेश के रूप में देख रहे हैं। इससे न केवल धनबाद बल्कि अन्य रेल मंडलों में भी भ्रष्ट अधिकारियों के बीच हड़कंप मचना तय है।
CBI trap Dhanbad: आगे क्या होगा
संजीव कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उनसे पूछताछ जारी है। सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस घूसखोरी के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल धनबाद रेल मंडल का पूरा महकमा सीबीआई की जांच के साए में है। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि भ्रष्टाचार कितना भी चतुराई से किया जाए, कानून की पकड़ से बचना मुश्किल है। अब सबकी नजरें कोर्ट की कार्यवाही और सीबीआई के अगले कदम पर टिकी हैं।
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