Budget 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट में होगी बड़ी बढ़ोतरी? जानें किन क्षेत्रों पर होगा फोकस
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूंजीगत बजट में 20% वृद्धि संभावित, 8.17 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा में मात्र कुछ दिन शेष हैं और इस बार रक्षा क्षेत्र को लेकर विशेष उत्सुकता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते वर्ष मई में पाकिस्तान में किए गए ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाओं के पश्चात सरकार रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देगी और पूंजीगत बजट में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकती है।
Budget 2026: ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
गौरतलब है कि 7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के नौ ठिकानों पर सटीक हवाई हमला किया था। इस कार्रवाई में मौजूद आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया था। सैन्य अधिकारियों के अनुसार इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे और बड़ी संख्या में आतंकी घायल भी हुए थे। इस सफल सैन्य कार्रवाई ने भारत की सैन्य क्षमता और तत्परता को प्रदर्शित किया।
यह ऑपरेशन भारत की सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि देश अपनी सुरक्षा के लिए (Budget 2026) किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। हालांकि इस प्रकार की कार्रवाइयों के लिए आधुनिक हथियार, उन्नत तकनीक और पर्याप्त गोला-बारूद की आवश्यकता होती है।
रक्षा बजट में 20 प्रतिशत वृद्धि की संभावना

विश्लेषकों का अनुमान है कि सरकार इस बजट (Budget 2026) में रक्षा आवंटन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती है। चालू वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये है। बीते वर्ष रक्षा मंत्रालय के लिए 6,81,210.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यह आवंटन वित्त वर्ष 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.53 प्रतिशत अधिक था और केंद्रीय बजट का 13.45 प्रतिशत था, जो सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक था।
यदि 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो आगामी वित्त वर्ष में रक्षा बजट लगभग 8.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
बढ़े बजट का उपयोग कहां होगा
सूत्रों के अनुसार बढ़े हुए रक्षा बजट (Budget 2026) का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। सर्वप्रथम सेना की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन आवंटित किया जाएगा। इसमें नए हथियारों और गोला-बारूद की खरीद सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य क्षमताओं को देखते हुए भारत को अपनी युद्धक क्षमता में निरंतर वृद्धि करने की आवश्यकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र अनुसंधान एवं विकास होगा। स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश अत्यावश्यक है। तीसरा क्षेत्र उन्नत तकनीक का अधिग्रहण होगा। साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित विमान और अंतरिक्ष आधारित रक्षा प्रणालियों में निवेश बढ़ाया जा सकता है।
Budget 2026: एफडीआई सीमा में संभावित वृद्धि
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार रक्षा क्षेत्र (Budget 2026) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर सकती है। यह कदम विदेशी कंपनियों को भारत में रक्षा उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे न केवल उन्नत तकनीक का हस्तांतरण होगा बल्कि रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।
इसके अतिरिक्त सरकार विदेशी निवेश से संबंधित अन्य शर्तों में भी ढील दे सकती है। इससे निवेश प्रक्रिया सरल होगी और अधिक विदेशी कंपनियां भारतीय रक्षा बाजार में प्रवेश करने के लिए आकर्षित होंगी।
आधुनिकीकरण पर जोर
रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 (Budget 2026) को सुधारों का वर्ष घोषित किया था। सरकार का उद्देश्य सशस्त्र बलों के व्यापक आधुनिकीकरण को गति देना है। इसके लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने पर काम किया जा रहा है ताकि आवंटित धन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत नए युद्धक विमान, नौसेना के लिए पनडुब्बियां और युद्धपोत, सेना के लिए आधुनिक तोपखाना और बख्तरबंद वाहन तथा वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
Budget 2026: आत्मनिर्भरता की दिशा
भारत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। बजट (Budget 2026) में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान हो सकते हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियों को रक्षा उत्पादन में अधिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
यह कदम न केवल विदेशी मुद्रा की बचत करेगा बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी विकास में भी सहायक होगा। आगामी बजट भारत की रक्षा तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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