Budget 2026: शेयर बाजार में निवेशकों को मिल सकती है बड़ी राहत, केंद्र सरकार कर रही STT में कटौती की तैयारी

बजट 2026 में सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) घटाने पर सरकार विचारशील

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Budget 2026: बजट 2026 की घोषणा नजदीक आते ही शेयर बाजार में निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आ सकती है। सरकार शेयर खरीदने-बेचने पर लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में कटौती पर विचार कर रही है। यह कदम शेयर बाजार में फंड के स्थिर प्रवाह को सुनिश्चित करने और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा सकता है।

Budget 2026: क्या है सरकार का प्लान?

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार शेयर बाजार में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है कैश सेगमेंट में सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स को कम करना।

इसके अलावा, सरकार पेंशन फंड और एंडॉमेंट फंड के निवेश के लिए टैक्स-फ्री स्टेटस देने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम लंबी अवधि के संस्थागत निवेशकों को भारतीय बाजार में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार को और अधिक आकर्षक बनाना है। STT में कमी से ट्रेडिंग की लागत घटेगी और बाजार में तरलता बढ़ेगी।

क्या है सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT)?

सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) एक प्रत्यक्ष कर है जो शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है। यह टैक्स वर्ष 2004 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा पेश किया गया था।

Budget 2026: STT लागू करने के मुख्य उद्देश्य

STT को लागू करने के पीछे सरकार के कई उद्देश्य थे। पहला, कैपिटल गेन टैक्स की चोरी को रोकना। दूसरा, सरकार को आसानी से और सीधे टैक्स कलेक्शन का तरीका उपलब्ध कराना। तीसरा, शेयर बाजार के लेनदेन पर नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाना।

STT एक ऐसा टैक्स है जो स्रोत पर ही काट लिया जाता है, इसलिए इसमें टैक्स चोरी की संभावना नहीं रहती। यह पूरी तरह से पारदर्शी और ऑटोमेटिक प्रक्रिया है।

कैसे लगता है STT?

सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स स्टॉक एक्सचेंज द्वारा शेयर खरीदते और बेचते समय ही ऑटोमैटिक रूप से काट लिया जाता है। निवेशक को अलग से कोई भुगतान या फाइलिंग नहीं करनी पड़ती।

STT के महत्वपूर्ण बिंदु

Budget 2026
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चाहे आप शेयर खरीद-बेचकर मुनाफा कमाएं या घाटा उठाएं, STT हर हाल में लगता है। यह टैक्स लेनदेन की राशि पर आधारित होता है, न कि मुनाफे-नुकसान पर।

यह टैक्स इक्विटी शेयरों की खरीद-बिक्री, फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग, म्यूचुअल फंड यूनिट्स और डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स, सभी पर लागू होता है।

STT को ब्रोकर द्वारा सीधे काट लिया जाता है और स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से सरकार के पास जमा कर दिया जाता है। निवेशक को इसके लिए अलग से कोई प्रयास नहीं करना पड़ता।

Budget 2026: फिलहाल क्या हैं STT की दरें?

सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स की दरों में समय-समय पर बदलाव होता रहा है। आखिरी बार 2023 में इसमें बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। वर्तमान में STT की दरें इस प्रकार हैं:

इक्विटी डिलीवरी ट्रेडिंग

इक्विटी शेयरों की डिलीवरी आधारित खरीद पर 0.1% STT लगता है। यह टैक्स केवल खरीद पर लगता है, बिक्री पर नहीं। उदाहरण के लिए, अगर आप 1 लाख रुपये के शेयर खरीदते हैं तो 100 रुपये STT देना होगा।

इक्विटी शेयरों की डिलीवरी आधारित बिक्री पर 0.1% STT लगता है। यह टैक्स बिक्री राशि पर लगाया जाता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग

इक्विटी शेयरों की इंट्राडे खरीद और बिक्री पर 0.025% STT लगता है। यह टैक्स सिर्फ बिक्री पर लगता है। इंट्राडे ट्रेडिंग में खरीदारी पर STT नहीं लगता।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग

फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू पर 0.02% STT लगता है। यह टैक्स केवल बिक्री के समय लगाया जाता है।

ऑप्शंस ट्रेडिंग

ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू पर 0.1% STT लगता है। यह टैक्स भी सिर्फ बिक्री पर लागू होता है।

म्यूचुअल फंड्स

इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड यूनिट्स की बिक्री पर 0.001% STT लगता है।

2023 में हुआ था आखिरी बदलाव

वर्ष 2023 के बजट में सरकार ने STT की दरों में बढ़ोतरी की थी। विशेष रूप से ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT बढ़ाया गया था। इसका उद्देश्य सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना और सरकार के राजस्व को बढ़ाना था।

उस समय ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT 0.05% से बढ़ाकर 0.1% कर दिया गया था, यानी दोगुना कर दिया गया था। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिला, लेकिन ट्रेडर्स पर बोझ भी बढ़ा।

Budget 2026: STT में कटौती से क्या होगा फायदा?

अगर सरकार बजट 2026 (Budget 2026) में STT घटाने का फैसला करती है तो इसके कई सकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।

ट्रेडिंग कॉस्ट में कमी

STT कम होने से शेयर खरीदने-बेचने की लागत घटेगी। खासकर रिटेल निवेशकों और छोटे ट्रेडर्स को बड़ा फायदा होगा।

बाजार में तरलता बढ़ेगी

कम टैक्स से अधिक लोग शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे बाजार में तरलता और गहराई बढ़ेगी।

विदेशी निवेश आकर्षित होगा

कम टैक्स रेट से भारतीय शेयर बाजार अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अधिक निवेश कर सकते हैं।

रिटेल निवेशकों को प्रोत्साहन

छोटे और मध्यम वर्ग के निवेशकों को STT की कम दर से बड़ा लाभ मिलेगा। इससे उनका रिटर्न बेहतर हो सकता है।

इंट्राडे ट्रेडर्स को राहत

जो ट्रेडर्स दिन में कई बार खरीद-बिक्री करते हैं, उनके लिए STT एक बड़ा खर्च है। इसमें कटौती से उन्हें विशेष लाभ होगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि STT में कटौती एक सकारात्मक कदम होगा। इससे भारतीय शेयर बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा और अधिक निवेश आकर्षित करेगा।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सरकार को STT में कटौती करते समय राजस्व के नुकसान को ध्यान में रखना होगा। इसलिए कटौती मामूली हो सकती है, बड़े पैमाने पर नहीं।

बजट 2026 में और क्या उम्मीदें?

STT के अलावा, बजट 2026 (Budget 2026) में कई अन्य घोषणाओं की उम्मीद है। आयकर में छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है। GST की दरों में सरलीकरण हो सकता है। मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान हो सकते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया जा सकता है। कृषि और MSME सेक्टर के लिए नई योजनाएं घोषित हो सकती हैं।

Budget 2026 कब पेश होगा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह मोदी सरकार 3.0 का दूसरा पूर्ण बजट होगा।

STT में कटौती की घोषणा होने पर शेयर बाजार में तेजी आ सकती है और करोड़ों निवेशकों को राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी यह सिर्फ अनुमान है और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

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